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EPFO New PF Rules 2026: ₹1 Lakh Salary पर भी सिर्फ ₹1,800 PF कटेगा, जानिए नए नियम और फायदे

EPFO New PF Rules 2026: ₹1 Lakh Salary पर भी सिर्फ ₹1,800 PF कटेगा, जानिए नए नियम और फायदे
नवजोत कौर सिद्धू
On: जुलाई 3, 2026 10:19 पूर्वाह्न
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प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करीब 8 करोड़ कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भविष्य निधि (PF) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत अब केवल ₹15,000 की निर्धारित सैलरी सीमा पर 12% PF योगदान अनिवार्य होगा, जबकि इससे अधिक राशि का योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक माना जाएगा।

इस बदलाव के साथ PF योगदान और निकासी से जुड़े कई नियमों में भी संशोधन किया गया है, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट बचत पर अधिक नियंत्रण देना है।

EPFO के नए PF नियम क्या हैं?

EPFO के नए नियमों के अनुसार, अब केवल ₹15,000 की तय सैलरी सीमा पर ही 12% PF योगदान अनिवार्य रहेगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 प्रति माह अनिवार्य रूप से PF में जमा होंगे और कंपनी भी उतनी ही राशि का योगदान करेगी।

यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹1 लाख प्रति माह है, तब भी अनिवार्य PF कटौती केवल ₹1,800 ही होगी। हालांकि कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त राशि भी PF में जमा कर सकता है, जिसे स्वैच्छिक योगदान माना जाएगा।

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कर्मचारियों और कंपनियों को क्या फायदा होगा?

एक अधिकारी के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी रिटायरमेंट बचत पर अधिक अधिकार और लचीलापन देना है।

इन प्रावधानों को नए लेबर कोड के अनुरूप तैयार किया गया है। चूंकि निजी क्षेत्र में अधिकांश वेतन कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) मॉडल पर आधारित होता है, इसलिए अब कंपनियां और कर्मचारी दोनों वेतन संरचना को अधिक लचीले तरीके से तय कर सकेंगे।

हालांकि, EPFO सदस्यता से जुड़े मौजूदा नियमों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।

EPFO New PF Rules 2026

पहले PF के नियम कैसे थे?

पुरानी EPF योजना 1952 के तहत ₹15,000 की वेतन सीमा केवल इस बात का निर्धारण करती थी कि किसी कर्मचारी के लिए EPFO की सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल होना अनिवार्य होगा या नहीं।

उस समय जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹15,000 या उससे कम थी, उनके लिए योजना में शामिल होना जरूरी था। इससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी अपनी इच्छा से EPFO की योजनाओं का हिस्सा बन सकते थे।

एक बार योजना में शामिल होने के बाद कर्मचारी अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर PF योगदान करते थे और कंपनी को भी बराबर राशि जमा करनी होती थी। यह योगदान सरकार द्वारा निर्धारित वेतन सीमा से अधिक हो सकता था।

2014 में क्या बदलाव हुआ था?

वर्तमान ₹15,000 की सैलरी सीमा वर्ष 2014 में तय की गई थी।

उसी वर्ष कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में संशोधन के बाद कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले 8.33% पेंशन योगदान को केवल ₹15,000 की सैलरी तक सीमित कर दिया गया था। इसके चलते अधिकतम ₹1,250 प्रति माह ही EPS में जमा होता था।

यदि वास्तविक वेतन इससे अधिक होता था, तो कंपनी द्वारा किया गया अतिरिक्त योगदान कर्मचारी के EPF खाते में जमा किया जाता था।

PF से पैसा निकालना अब होगा आसान

नई व्यवस्था में PF निकासी की प्रक्रिया भी सरल बनाई गई है।

पहले जहां निकासी के 13 अलग-अलग कारण निर्धारित थे, अब उन्हें घटाकर 3 श्रेणियों में शामिल कर दिया गया है।

1. जरूरी जरूरतें

  • बीमारी
  • पढ़ाई
  • शादी

2. घर से जुड़े कार्य

  • मकान खरीदना
  • मकान बनवाना

3. विशेष परिस्थितियां

विशेष परिस्थितियों में सदस्य अपने PF खाते का 100% तक पात्र बैलेंस निकाल सकेंगे। इसमें कर्मचारी और कंपनी, दोनों के योगदान की राशि शामिल होगी।

हालांकि, खाते में कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य रहेगा।

Conclusion

EPFO के नए PF नियमों के तहत अब ₹15,000 की निर्धारित वेतन सीमा पर ही 12% अनिवार्य योगदान लागू होगा। इससे अधिक PF जमा करना कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक रहेगा। इसके अलावा PF निकासी के नियमों को भी सरल बनाया गया है, जिससे सदस्यों को अपनी रिटायरमेंट बचत का उपयोग पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक तरीके से करने का अवसर मिलेगा।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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