भारत में वास्तुकला के एक से एक नमूनें स्थित है। और इन्ही में शामिल है एक ऐसा महल जो सैकडों सालों से पानी में तैरता खड़ा है। अपनी अद्भुत बनावट और नायाब वास्तुकला के लिये यह देश ही नहीं बल्कि विदेशी सैलानियों के लिये पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। “पानी में तैरता जहाज़ महल” भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मंडू (धार ज़िला) में स्थित है। यह अफ़ग़ानी काल की बेहद खूबसूरत और अनोखी वास्तुकला का नमूना है। जो अपनी बनावट के लिये खास तौर पर आकर्षण का केन्द्र है।

जानिये क्यों कहा है ‘जहाज़ महल’
यह महल दो झीलों — मुंज तालाब और कपूर तालाब — के बीच बना है। और जब पानी भर जाता है तो महल ऐसा लगता है जैसे वह झीलों के ऊपर तैर रहा कोई जहाज़ हो। इसकी लंबी, पतली आकृति भी जहाज़ जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे यह नाम मिला है।
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जहाज महल की यह है विशेषताएँ
यह महल 15वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी द्वारा बनवाया गया था।महल को गर्मी से राहत देने और रानियों के शाही निवास के लिए डिजाइन किया गया था। खूबसूरत मेहराबें, छत से दिखता जल-प्रतिबिंब और हवा-पानी का प्राकृतिक संतुलन इसे वास्तुकला का नायाब उदाहरण बनाते हैं।
62 मीटर लंबी है छत
इस महल की छत पर जाना न भूलें, जो 62 मीटर लंबी है। यहां आपको कमल के आकार के विशाल कुंड मिलेंगे, जिनकी क्षमता 30 हजार लीटर तक है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहाज महल अपने अद्भुत जल प्रबंधन नेटवर्क के लिए जाना जाता था, क्योंकि मांडू की कई झीलों और तालाबों से पानी महल तक पहुंचता था। महल परिसर के अंदर बनी कई बावड़ियां महल के तापमान को ठंडा रखती थीं और पीने के पानी स्त्रोत थीं।
देश के पर्यटन का प्रमुख केंद्र
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग जहाज़ महल को मंडू के ‘रॉयल एन्क्लोज़र’ का मुख्य आकर्षण मानता है। सर्दियों और मानसून के मौसम में यहाँ पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। झीलों के किनारे ढलते सूरज की रोशनी में चमकता यह महल फोटोग्राफ़रों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं।
बेहद खास है वास्तुकला
इस खास महल की वास्तुकला भी बेहद ही निराली है। यह अफगान, मुगल, हिंदू और यहां तक कि मेसोपोटामिया की स्थापत्य शैलियों का शानदार और बेजोड़ उदाहरण है। 110 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा यह स्मारक बेहद ही विशाल है।आप जब इसके अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको करीगरी से बनी सीढ़ियां मिलेंगी जो आपको ऊपरी मंजिल तक ले जाती हैं। और हर तरफ आपको वास्तुकला की नायाब तस्वीर देखनें को मिलेगी।
पर्यटन विशेषज्ञों की क्या है राय
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संरचना को संरक्षण मिलता रहा तो यह महल आने वाले दशकों तक भारत की मध्यकालीन वास्तुकला का शानदार उदाहरण बना रहेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलता है।
इंदौर से 55 किलोमीटर दूर
मांडू सल्तनत के पतन के बाद यह महल खंडहर में बदल गया था, लेकिन 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश आर्केलोजिस्ट ने इसे खोज निकाला और उनके प्रयासों से इसकी मरम्मत की गई।आज जहाज महल पर्यटकों को भारत के समृद्ध और भव्य ऐतिहासिक काल से रूबरू कराता है।यह अद्भुत जगह इंदौर से महज 55 किलोमीटर दूर है, आप यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं।







