आज कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का जन्मदिन है। और वह अपना 79वां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रही हैं। इस मौके पर देश भर में कांग्रेस जहां उनका जन्मदिन मना रही है वहीं पीएम मोदी ने भी सोनिया गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं, पीएम मोदी ने X पर लिखा कि सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं, ईश्वर करे आपको लंबी उम्र मिले और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिले.

उधर बिहार कांग्रेस ने अपनी सीनियर नेत्री के जन्मदिन को बड़े धूमधाम से सेलीब्रेट करने की तैयारी कर रखी है.बिहार कांग्रेस की ओर से आज के दिन जनसेवा से जुड़े तमाम तरह के कार्य किए जाएंगे, जिसकी तैयारी स्थानीय नेताओं नें पूरी कर इस दिन को जनसेवा के रुप में मना रहे हैं।
तमिलनाडु के सीएम नें भी दी शुभकामनाएं
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी सोनिया गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने X पर पोस्ट कर लिखा, “कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उनका जीवन त्याग, निस्वार्थ सार्वजनिक यात्रा और धर्मनिरपेक्षता एवं संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। ईश्वर करे कि उनका सिद्धांत आधारित मार्ग और मार्गदर्शन एक प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक प्रयासों को निरंतर सशक्त बनाए रखे।
कर्नाटक के डिप्टी सीएम नें भी दी बधाई
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी शिवकुमार नें इस मौके पर सोनिया गांधी को जन्मदिन की बधाई दी है। उन्होंने पोस्ट कर लिखा है कि “हमारी निरंतर सहयोगी, श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपकी निस्वार्थ सेवा, बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता ने कांग्रेस को आकार दिया है और जनता की सेवा के हमारे संकल्प को और मज़बूत किया है। मैं आपके मार्गदर्शन और मेरे पूरे सफ़र में आपने मुझ पर जो विश्वास दिखाया है, उसके लिए तहे दिल से आभारी हूं। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे और जन कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति प्रदान करे तथा हम सभी को समर्पण भाव से राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित करे।”
इटली के एक छोटे से शहर की बेटी सोनिया गांधी
9 दिसंबर 1946 को जन्मी सोनिया गांधी स्टेफानो माइनो और पाओला माइनो की बेटी हैं। वह अपनी बहनों नादिया और अनुष्का के साथ इटली के एक छोटे से शहर ओरबासानो में एक रोमन कैथोलिक परिवार में पली-बढ़ीं। 1964 में, वह इंग्लिश की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज, इंग्लैंड चली गईं। यहीं पर उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। 1968 में उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। शादी के बाद, सोनिया अपनी सास, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर रहने लगीं|
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इंदिरा गांधी के परिवार में जिम्मेदारी और सादगी
विवाह के समय सोनिया का जीवन पूरी तरह बदल चुका था। एक बड़े राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनना सरल नहीं था। इंदिरा गांधी का जीवन संघर्षों से भरा था और इसी माहौल में सोनिया ने खुद को ढाला। उन्होंने अपनी निजी ज़िंदगी को हमेशा परिवार के इर्द-गिर्द रखा, और राजनीति से दूर रहने का प्रयास किया। उनकी प्राथमिकता थी परिवार, बच्चे और शांतिपूर्ण जीवन। लेकिन आगे कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें राजनीति में आना पड़ा।
1984 के एक झटके ने बदल दिया जीवन
31 अक्टूबर 1984 का दिन न सिर्फ देश के लिए, बल्कि सोनिया गांधी के लिए भी सदमे से भरा था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरा परिवार गहरे संकट में था। इसके बाद राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने और सोनिया ने एक बार फिर एक बड़े राजनीतिक और राष्ट्रीय दायित्व को परिवार के साथ निभाया हालाँकि, सोनिया राजनीति से अभी भी दूर ही रहीं। लेकिन 1991 में जब राजीव गांधी की हत्या हुई, तो सोनिया गांधी ने जीवन का सबसे कठिन दौर देखा। वे टूट चुकी थीं, पर फिर भी उन्होंने संयम से परिवार को संभाला। बाहर की दुनिया उसी समय उन्हें राजनीति में आने का आग्रह कर रही थी, लेकिन उन्होंने लगभग सात वर्षों तक हर प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी।
जब मजबूत नेतृत्व की पड़ी आवश्यकता
1997–1998 में परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि कांग्रेस पार्टी को एक मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पड़ी। सोनिया गांधी, जिन्हें पार्टी कार्यकर्ता वर्षों से आग्रह कर रहे थे, आखिरकार वह राजनीति में आईं।
1998 में वह कांग्रेस अध्यक्ष बनीं, और यही वह क्षण था जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। कांग्रेस आंतरिक कलह और चुनावी हार से जूझ रही थी। कांग्रेस केवल तीन राज्यों, मध्य प्रदेश, ओडिशा और मिजोरम में सत्ता में थी। उनके नेतृत्व में, पार्टी ने लगातार दो आम चुनाव जीते और 2000 के दशक में 16 राज्यों पर शासन किया। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने न केवल स्वयं को पुनर्जीवित किया, बल्कि 2004 के लोकसभा चुनावों में अप्रत्याशित रूप से विजय भी हासिल की। एनडीए की मजबूत सरकार को पराजित कर यूपीए सरकार बनी और सोनिया गांधी इसके केंद्र में रहीं। 2014 के बाद धीरे-धीरे इसकी स्थिति कमजोर होती गई, और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।
उदाहरण बनी सोनिया जब प्रधानमंत्री के पद को ठुकराया
2004 में जब यूपीए को बहुमत मिला, तो पार्टी के भीतर और जनता के बीच सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने का आह्वान था। परंतु उन्होंने यह पद ठुकरा दिया,यह निर्णय भारतीय राजनीति के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है।
उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया और खुद यूपीए अध्यक्ष के रूप में गठबंधन की नैतिक और रणनीतिक जिम्मेदारी निभाई। इस निर्णय को आज भी उनकी विनम्रता, दूरदर्शिता और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
माता और नेता दो भूमिकाओं का एक साथ निर्वहन
सोनिया गांधी के जीवन में मातृत्व की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को तैयार करने में उनका योगदान अत्यंत गहरा है। उन्होंने हमेशा परिवार को मजबूत बनाए रखा, चाहे परिस्थितियाँ कितनी ही कठिन क्यों न रही हों। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी उनका परिवार पहले का सिद्धांत नहीं बदला, सोनियां गांधी दोनों भूमिकाओं को निभाती गई।
राज्यसभा की सदस्य हैं सोनिया गांधी
उनका उदय विवादों से अछूता नहीं रहा। मई 1999 में, वरिष्ठ नेताओं शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने उनके विदेशी मूल पर सवाल उठाए। सोनिया ने कुछ समय के लिए इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन पार्टी के भीतर भारी समर्थन ने उनकी स्थिति मजबूत कर दी। इस विवाद के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन हुआ। उम्र और स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी ने घोषणा की है कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में पार्टी का मार्गदर्शन करेंगी। वह इस समय राज्यसभा सदस्य हैं।






