टना में अधिकारी समेत 12 पर FIR-बिहार की राजधानी पटना में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुआ यह फर्जीवाड़ा भ्रष्टाचार के उस जाल को उजागर करता है जहाँ सरकारी तंत्र की मिलीभगत से जनता के पैसे की लूट की गई। यह मामला मुख्य रूप से पटना के बिहटा-सरमेरा फोरलेन (NH-95) के निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है।
कहाँ हुआ यह फर्जीवाड़ा
यह घोटाला पटना जिले के दनियावां और फतुहा अंचल के अंतर्गत आने वाले गांवों में हुआ। विशेष रूप से बिहटा-सरमेरा फोरलेन सड़क परियोजना के लिए अधिगृहित की गई जमीनों के मुआवजे के वितरण के दौरान इसे अंजाम दिया गया।
किस विभाग द्वारा और किसने पकड़ा
- संबंधित विभाग-यह मुख्य रूप से जिला भू-अर्जन कार्यालय (District Land Acquisition Office) पटना से जुड़ा मामला है।
- पकड़ने वाला विभाग –इस फर्जीवाड़े का खुलासा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) और जिला प्रशासन की आंतरिक जांच समिति ने किया। जब मुआवजे की राशि में भारी विसंगतियां पाई गईं तो पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर जांच शुरू हुई।
कैसे किया गया फर्जीवाड़ा
जालसाजी का तरीका काफी शातिर था जिसमें कागजी हेरफेर को मुख्य हथियार बनाया गया
- जमीन की प्रकृति बदलना –खेती की जमीन (Agricultural Land) को व्यावसायिक (Commercial) या आवासीय जमीन दिखाकर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया।
- फर्जी वंशावली और के वाला-मृत व्यक्तियों के नाम पर या फर्जी वारिस बनकर फर्जी कागजात तैयार किए गए।
- बिचौलियों की भूमिका-सरकारी अधिकारियों ने बिचौलियों के साथ मिलकर उन जमीनों का मुआवजा भी निकाल लिया जो विवादित थीं या जिनका अस्तित्व ही संदिग्ध था।
- दोहरा भुगतान –एक ही जमीन के लिए दो अलग-अलग दावों पर भुगतान कर दिया गया।
कितने लाख का हुआ घोटाला
शुरुआती जांच में यह मामला लगभग 12 से 15 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया था लेकिन अलग-अलग एफआईआर (FIR) में यह राशि अलग-अलग है। दनियावां के एक विशेष मामले में ही करीब 80 लाख से 1 करोड़ के अवैध भुगतान की पुष्टि हुई थी। कुल मिलाकर यह आंकड़ा करोड़ों में जाता है।
कौन-कौन शामिल थे घोटाले में
इस मामले में कुल 12 लोगों पर FIR दर्ज की गई थी जिनमें सरकारी अधिकारी और रसूखदार ग्रामीण शामिल थे। मुख्य नाम इस प्रकार हैं
तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी (LAO)- विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जिनकी देखरेख में फाइलें पास हुईं।
- कानूनगो और अमीन- जिन्होंने जमीन के भौतिक सत्यापन की गलत रिपोर्ट दी।
- राजस्व कर्मचारी- जिन्होंने जमीन के लगान और किस्म की गलत जानकारी भरी।
- कंप्यूटर ऑपरेटर- जिन्होंने डेटा एंट्री में हेरफेर की।
- निजी व्यक्ति (रैयत)- वे ग्रामीण जिन्होंने फर्जी दस्तावेज पेश कर पैसे लिए।
भ्रष्टाचार का नेक्सस- प्रशासनिक विफलता और साजिश
इस घोटाले ने साबित किया कि बिना ‘निचले स्तर से ऊपरी स्तर’ तक की साठगांठ के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। नियमानुसार मुआवजे के भुगतान से पहले अंचल अधिकारी (CO) और भू-अर्जन कार्यालय को कागजातों का मिलान करना होता है। लेकिन इस मामले में अधिकारियों ने जानबूझकर फाइलों की अनदेखी की।
जांच और कानूनी कार्रवाई
जब निगरानी विभाग ने दबिश दी तो पता चला कि कई ऐसे चेक जारी किए गए थे जिनका कोई ठोस आधार नहीं था। FIR दर्ज होने के बाद कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और उनकी संपत्ति की जांच के आदेश भी दिए गए।
कार्रवाई धारा
धारा 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR पटना का यह भूमि मुआवजा घोटाला सिस्टम में मौजूद खामियों का उदाहरण है। यह न केवल सरकारी खजाने की क्षति है बल्कि उन असली किसानों के साथ भी अन्याय है जिनकी जमीनें विकास कार्यों के लिए ली गईं लेकिन उन्हें सही समय पर हक नहीं मिला। फिलहाल मामला कोर्ट में है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।







