लोकसभा में G RAM G Bill 2025 के पारित होते ही देश की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। सरकार ने इसे ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण और पारदर्शी विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने इस पर तीखा विरोध दर्ज कराया। इसी बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान चर्चा का केंद्र बन गया, जिसमें उन्होंने कहा कि “अब कांग्रेस को खुद को भंग कर देना चाहिए।” उनके इस बयान ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

लोकसभा में G RAM G Bill 2025 पारित, सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम
G RAM G Bill 2025 को सरकार ने ग्रामीण विकास, जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर शासन को मजबूत करने वाला विधेयक बताया है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद बहुमत से यह बिल पारित हुआ। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से ग्राम स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
ग्रामीण विकास से जुड़े मंत्रालय की ओर से पेश किए गए तर्कों के अनुसार, G RAM G Bill 2025 ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देता है और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाने का अवसर प्रदान करता है। इसके तहत डिजिटल निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों की गति तेज होगी और जनता को सीधे लाभ मिलेगा।
सत्तापक्ष के सांसदों ने इसे “नए भारत के ग्रामीण मॉडल” की संज्ञा दी। उनका कहना था कि वर्षों से ग्रामीण योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन इस कानून के जरिए अब जवाबदेही तय होगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम गांव, गरीब और किसान के हित में बताया गया।
G RAM G Bill 2025 – कांग्रेस का विरोध, विपक्ष ने जताई आशंकाएं
हालांकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने G RAM G Bill 2025 का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस सांसदों का आरोप है कि यह बिल ग्राम स्वराज की भावना के विपरीत है और केंद्र सरकार को जरूरत से ज्यादा ताकत देता है। उनका कहना है कि इस कानून के जरिए राज्यों के अधिकारों में कटौती की जा रही है और पंचायतों की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस बिल को लेकर व्यापक चर्चा नहीं की और ग्रामीण संगठनों तथा पंचायत प्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस नेताओं ने सदन में कहा कि सरकार एक तरफ विकेंद्रीकरण की बात करती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे कानून ला रही है, जो केंद्र का नियंत्रण बढ़ाते हैं।
सदन के बाहर कांग्रेस नेताओं ने इसे “नाम बदलकर पुरानी व्यवस्था” करार दिया। उनका कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग होगी। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे इस बिल के खिलाफ जन आंदोलन और कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान का तीखा बयान, सियासी घमासान तेज
G RAM G Bill 2025 के पारित होते ही भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान सामने आया, जिसने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया। शिवराज सिंह ने कहा, “कांग्रेस ने हर अच्छे सुधार का विरोध किया है। आज जब ग्रामीण भारत के हित में इतना बड़ा कदम उठाया गया है, तब भी कांग्रेस सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है। अब कांग्रेस को खुद को भंग कर देना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का विकास से कोई लेना-देना नहीं रह गया है और वह केवल सत्ता के लिए राजनीति करती है। शिवराज सिंह ने कहा कि देश की जनता बार-बार कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को नकार चुकी है, फिर भी पार्टी सबक सीखने को तैयार नहीं है। उनके अनुसार, G RAM G बिल जैसे सुधारात्मक कानूनों का विरोध कर कांग्रेस खुद को जनता से और दूर कर रही है।
शिवराज सिंह के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने इसे अहंकार भरा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि भाजपा नेताओं को विपक्ष की भूमिका समझनी चाहिए और असहमति को लोकतंत्र का हिस्सा मानना चाहिए।
राजनीतिक असर और आने वाले दिनों की तस्वीर
G RAM G Bill 2025 का पारित होना केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी राजनीति पर भी असर डालने वाला कदम माना जा रहा है। भाजपा इसे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी का मानना है कि इस कानून से गांवों में विकास कार्यों का सीधा लाभ लोगों तक पहुंचेगा, जिसका राजनीतिक फायदा भी मिलेगा।
दूसरी ओर, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि इस बिल के लागू होने के बाद कहीं भी समस्याएं सामने आती हैं, तो उसे बड़े जनमुद्दे के रूप में उठाया जाएगा। कांग्रेस शासित राज्यों में इसके प्रावधानों को लेकर अलग रुख अपनाने की भी संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के आक्रामक राजनीतिक रुख को दर्शाता है, जहां विपक्ष को कमजोर और अप्रासंगिक साबित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनौती है कि वह केवल विरोध तक सीमित न रहकर वैकल्पिक नीतियों और सकारात्मक एजेंडे के साथ सामने आए।
कुल मिलाकर, G RAM G Bill 2025 के पारित होने और शिवराज सिंह चौहान के बयान ने एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है और राजनीतिक रूप से किसे इसका लाभ या नुकसान मिलता है। फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों तक सियासी बहस के केंद्र में बना रहेगा।






