व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

भारत-ब्रिटेन ऐतिहासिक समझौता- आर्थिक और सामाजिक साझेदारी का नया स्वर्णिम युग

भारत-ब्रिटेन ऐतिहासिक समझौता- आर्थिक और सामाजिक साझेदारी का नया स्वर्णिम युग
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 18, 2026 3:13 अपराह्न
Follow Us:

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों ने बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA – Comprehensive Economic and Trade Agreement) और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC – Double Contribution Convention) पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह ऐतिहासिक समझौता 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी होने जा रहा है।

​यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है बल्कि यह भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को गति देने और ब्रिटेन की पोस्ट-ब्रेक्सिट (Post-Brexit) वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है।

​CETA के मुख्य बिंदु- व्यापारिक दीवारों का ढहना

​भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (CETA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह का मार्ग प्रशस्त करता है। इस समझौते के तहत प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं

  • 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क मुक्ति- समझौते के लागू होते ही ब्रिटेन भारत से आने वाले 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त (Duty-Free) पहुंच प्रदान करेगा।
  • प्रमुख क्षेत्रों को लाभ- भारत के पारंपरिक रूप से मजबूत क्षेत्रों जैसे कपड़ा (Textiles), चमड़ा और फुटवियर, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद (Marine Products), रसायन और फार्मास्यूटिकल्स पर लगने वाले भारी शुल्कों को घटाकर शून्य कर दिया गया है।
  • ब्रिटिश उत्पादों पर रियायत- इसके जवाब में भारत ने भी स्कॉच व्हिस्की (जिस पर पहले 150% शुल्क था उसे घटाकर 40% किया गया है) सौंदर्य प्रसाधन (Cosmetics) और ऑटोमोटिव क्षेत्रों पर टैरिफ को उदार बनाया है।
  • संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण- भारत ने अपने स्थानीय किसानों और डेयरी उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, संवेदनशील सब्जियों और कुछ खाद्य तेलों को इस रियायती सूची से बाहर रखा है।

वैश्विक कूटनीति में ऐतिहासिक मोड़- अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय शांति समझौता (MoU)

​DCC समझौता- पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बड़ी राहत

​CETA के साथ-साथ डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) यानी सामाजिक सुरक्षा समझौते का क्रियान्वयन भी 15 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। यह समझौता विशेष रूप से आईटी (IT) पेशेवरों इंजीनियरों और दोनों देशों में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

​दोहरे कर (Double Taxation) से मुक्ति

​वर्तमान में यदि कोई भारतीय पेशेवर अल्पकालिक परियोजना के लिए ब्रिटेन जाता है तो उसे भारत के साथ-साथ ब्रिटेन के सामाजिक सुरक्षा तंत्र (National Insurance) में भी योगदान देना पड़ता था जिसका लाभ उन्हें कभी नहीं मिल पाता था। नए नियम के अनुसार

  • ​अस्थायी रूप से स्थानांतरित (Detached Workers) कर्मचारियों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से पूरी तरह छूट मिलेगी।
  • ​इस छूट की अवधि को पहले के 36 महीनों से बढ़ाकर अब 60 महीने (5 वर्ष) कर दिया गया है।
  • ​इस कदम से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सीधे वित्तीय लाभ होगा जिससे उनकी परिचालन लागत में भारी कमी आएगी।

​डिजिटल व्यापार और सेवा क्षेत्र का आधुनिकीकरण

​यह समझौता केवल पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है बल्कि 21वीं सदी की आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।

क्षेत्रसमझौते का प्रभाव और लाभ
डिजिटल ट्रेडडेटा सुरक्षा, सीमा पार डेटा प्रवाह और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित नियामक ढांचा।
पेशेवर गतिशीलताडॉक्टरों, नर्सों, वित्तीय सलाहकारों और आईटी विशेषज्ञों के लिए वीजा नियमों में लचीलापन।
शिक्षा साझेदारीब्रिटिश विश्वविद्यालयों (जैसे यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, यॉर्क और ब्रिस्टल) द्वारा भारत (बेंगलुरु और मुंबई) में कैंपस स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी।
सरकारी खरीदपहली बार किसी द्विपक्षीय समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे को सरकारी खरीद (Government Procurement) के बाजारों में अवसर दिए हैं।

आर्थिक प्रभाव और वैश्विक महत्व

​दीर्घकालिक आर्थिक अनुमानों के अनुसार CETA के लागू होने से भारत और ब्रिटेन के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में £25.5 बिलियन की भारी वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा यह ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को लगभग £4.8 बिलियन का बढ़ावा देगा और वास्तविक मजदूरी में वृद्धि करेगा।

​यह समझौता भारत को हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में एक प्रमुख विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के रूप में स्थापित करता है। भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह समझौता चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने और एक विश्वसनीय आर्थिक गलियारा (Economic Corridor) बनाने की दिशा में दोनों लोकतंत्रों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ईरान-अमेरिका ऐतिहासिक शांति समझौता का दावा – फारस की खाड़ी का तनाव और भारत का कड़ा रुख

​सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है ट्रेंड?

​इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर व्यापार जगत, नीति निर्माताओं और आम जनता के बीच भारी उत्साह है। वर्तमान में जो हैशटैग सबसे अधिक लोकप्रिय और ट्रेंडिंग में हैं वे निम्नलिखित हैं

  • #IndiaUKTradeHistoricDeal
  • #CETA2026
  • #EconomicPartnership
  • #ViksitBharat2047

​15 जुलाई 2026 से प्रभावी होने जा रहा भारत-ब्रिटेन CETA और DCC समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह ऐतिहासिक डील न केवल व्यापारिक बाधाओं को तोड़ती है बल्कि दोनों देशों के पेशेवरों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलती है जो वैश्विक मंच पर एक समृद्ध और सुरक्षित भविष्य का निर्माण करेगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment