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टीएमसी से नीलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने आज की अपनी नई पार्टी का एलान- पश्चिम बंगाल की पुरी सीटओं में लड़ेंगे चुनाव

विधायक हुमायूं कबीर
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 23, 2025 12:48 अपराह्न
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक राह चुन ली है। कबीर ने अपनी नई पार्टी के गठन का एलान कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी चुनावों में राज्य की सभी 294 सीटों संभवत आपका आशय सभी सीटों से है पर प्रभाव डालने की तैयारी में हैं। 

विधायक हुमायूं कबीर

​हुमायूं कबीर बागी तेवर और नई पार्टी का उदय​

हुमायूं कबीर बंगाल की राजनीति का एक ऐसा नाम हैं जो अपनी बेबाकी और समय-समय पर अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाने जाते हैं। टीएमसी से निलंबन के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह किसी अन्य स्थापित दल में शामिल होंगे लेकिन उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाकर सबको चौंका दिया है।

​नई पार्टी का नाम और उद्देश्य​

हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी या क्षेत्र के अनुसार घोषित नाम के इर्द-गिर्द रखा है जिसका मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की रक्षा करना है। उनका तर्क है कि मौजूदा राजनीतिक दल अल्पसंख्यकों का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में करते हैं लेकिन जब सत्ता में भागीदारी की बात आती है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।​

सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य

​कबीर ने एलान किया है कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उनका मुख्य ध्यान उन क्षेत्रों पर है जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है जैसे ​मुर्शिदाबाद, ​मालदा, ​उत्तर दिनाजपुर, ​दक्षिण 24 परगना|​

टीएमसी से निलंबन की पृष्ठभूमि​

हुमायूं कबीर और टीएमसी नेतृत्व के बीच खटास काफी समय से चल रही थी। निलंबन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित रहे हैं|

  • ​पार्टी विरोधी बयानबाजी कबीर ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों और पार्टी के आंतरिक कामकाज पर सवाल उठाए।
  • ​सांप्रदायिक बयान और विवाद कुछ समय पहले उनके एक विवादित बयान ने काफी तूल पकड़ा था जिसके बाद भाजपा ने टीएमसी को घेरा था। अपनी छवि बचाने के लिए टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
  • ​संगठनात्मक असंतोष कबीर का मानना था कि मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में उन्हें वह महत्व नहीं मिल रहा था जिसके वह हकदार थे।

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर प्रभाव

​हुमायूं कबीर का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। बंगाल में सत्ता की चाबी अक्सर अल्पसंख्यक वोटों के पास होती है जो पारंपरिक रूप से ममता बनर्जी के साथ रहे हैं।​

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अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण

​यदि हुमायूं कबीर मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत उम्मीदवार उतारते हैं, तो वह टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। इससे वोटों का बंटवारा होगा जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी BJP को मिल सकता है।

​मुर्शिदाबाद और मालदा का समीकरण

​मुर्शिदाबाद हुमायूं कबीर का गढ़ माना जाता है। यहाँ उनका व्यक्तिगत प्रभाव काफी ज्यादा है। यहाँ की सीटों पर वह टीएमसी और कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।​

तीसरा मोर्चा की संभावना

​क्या कबीर अन्य छोटी पार्टियों जैसे पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की ISF या अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करेंगे यदि ऐसा होता है, तो बंगाल में एक मजबूत तीसरा मोर्चा उभर सकता है जो द्विध्रुवीय राजनीति TMC बनाम BJP को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल देगा।

​हुमायूं कबीर की राजनीतिक यात्रा एक नजर

​हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है| ​कांग्रेस से शुरुआत उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। ​टीएमसी में आगमन ममता बनर्जी के करिश्मे से प्रभावित होकर वह टीएमसी में आए और मंत्री भी बने। ​दलबदल का दौर वह बीच में भाजपा में भी शामिल हुए थे लेकिन वहां ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए और वापस टीएमसी में लौट आए। ​वर्तमान स्थिति अब वह एक स्वतंत्र राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

​चुनौतियां और संभावनाएं​

नई पार्टी बनाना और उसे बंगाल जैसे बड़े राज्य में स्थापित करना आसान नहीं है। कबीर के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं| ​संसाधनों की कमी टीएमसी और भाजपा जैसी बड़ी मशीनरियों के सामने चुनाव लड़ना आर्थिक और संगठनात्मक रूप से कठिन है।​

विश्वसनीयता का सवाल बार-बार पार्टी बदलने के कारण जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। ​ममता बनर्जी का प्रभाव बंगाल के ग्रामीण इलाकों में आज भी ममता बनर्जी की लोकप्रियता चरम पर है। क्या कबीर उस दीदी’ ब्रांड को टक्कर दे पाएंगे|

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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