भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार 21 जून 2026 को पूरे भारत में मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिलेंगे। देश के कुछ हिस्सों में जहां मानसून की झमाझम बारिश और प्री-मानसून बौछारें राहत लेकर आएंगी वहीं उत्तर और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का प्रकोप जारी रहेगा। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिमी भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण पहाड़ी और मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
आइए क्षेत्रवार समझते हैं कि 21 जून 2026 को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है और इस दौरान आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
उत्तर-पश्चिम भारत- पश्चिमी विक्षोभ का असर और गरज-चमक
उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्यों में 21 जून को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर दिखाई देगा। इसके प्रभाव से मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों के मौसम में बदलाव आएगा।
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड- इन पहाड़ी राज्यों में व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चल सकती हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक मौसम खराब होने और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है।
- दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान- इन क्षेत्रों में धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 21 जून को 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूल भरी हवाएं चल सकती हैं जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी और भीषण गर्मी से आंशिक राहत मिलेगी।
- उत्तर प्रदेश- उत्तर प्रदेश के मौसम में दोतरफा असर दिखेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां धूल भरी आंधी और हल्की बारिश की संभावना है वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में भीषण लू (Heatwave) की स्थिति बनी रहेगी। यहां का अधिकतम तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत- भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में इस समय मौसम का सबसे आक्रामक रूप देखने को मिल रहा है। उप-हिमालयी क्षेत्रों में चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय होने के कारण यहां भारी वर्षा का अनुमान है।
- असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश- IMD ने इन राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश (Isolated Very Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी किया है। विशेषकर असम और मेघालय के कुछ जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 21 जून को भी यहां मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
- नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा- इन राज्यों में भी अधिकांश स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जाएगी। आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की पूरी आशंका है।
- बिहार, झारखंड और ओडिशा- बिहार और झारखंड में 21 जून को मौसम काफी संवेदनशील रहेगा। बिहार में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले भीषण तूफान (Thundersquall) की चेतावनी दी गई है। ओडिशा और झारखंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है जिससे यहां के तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। हालांकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।
मध्य और पश्चिम भारत- आंधी-तूफान और छिटपुट वर्षा
मध्य और पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल हो रही हैं लेकिन वर्तमान में मानसून की गति थोड़ी धीमी होने के कारण यहां मुख्य रूप से प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़- मध्य प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी दोनों भाग) और छत्तीसगढ़ में 21 जून को छिटपुट स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं (Gusty Winds) चल सकती हैं। दोपहर के समय उमस भरी गर्मी परेशान करेगी लेकिन शाम को आंधी-बारिश से राहत मिलेगी।
- महाराष्ट्र (कोंकण, गोवा और विदर्भ)- विदर्भ के कुछ हिस्सों में 21 जून को लू (Heatwave) जैसी स्थिति रह सकती है लेकिन इसके साथ ही शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की भी संभावना है। कोंकण और गोवा के तटीय इलाकों में मानसून की हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी।
- गुजरात (सौराष्ट्र और कच्छ)- गुजरात के कुछ हिस्सों में चक्रवातीय हवाओं के प्रभाव से हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। मुख्य रूप से मौसम शुष्क और गर्म बना रहेगा, लेकिन तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलेंगी।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत- मानसून की सक्रियता
दक्षिण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। अरब सागर से आने वाली नमी युक्त हवाओं के कारण तटीय और आंतरिक क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है।
- केरल, माहे और तटीय कर्नाटक- इन क्षेत्रों में 21 जून को व्यापक रूप से मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। केरल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश (Heavy Rainfall) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना है।
- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना- तेलंगाना में 21 जून को कई स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है जिससे पिछले दिनों से चल रही गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आंतरिक इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की छिटपुट वर्षा हो सकती है।
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21 जून 2026 के लिए मौसम संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव
मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है
| क्षेत्र / स्थिति | संभावित जोखिम | आवश्यक बचाव के उपाय |
| उत्तर प्रदेश और विदर्भ (लू वाले क्षेत्र) | हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन | दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस (ORS), या नींबू पानी का सेवन करें। |
| पूर्वोत्तर भारत और केरल (भारी बारिश) | अचानक बाढ़, जलभराव | निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें। जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाने से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। |
| बिहार और उत्तर-पश्चिम भारत (आंधी-तूफान) | आकाशीय बिजली, पेड़ गिरना | गरज-चमक के दौरान बिजली के खंभों, पेड़ों या कच्चे मकानों के नीचे शरण न लें। घर के भीतर रहें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें। |
| पहाड़ी क्षेत्र (उत्तराखंड, हिमाचल) | भूस्खलन (Landslide) | यदि आप यात्रा पर हैं, तो संवेदनशील मार्गों पर जाने से बचें। मौसम साफ होने पर ही पहाड़ी रास्तों पर आगे बढ़ें। |
| समुद्री तट (मछुआरों के लिए चेतावनी) | ऊंची लहरें, तेज हवाएं | केरल, कर्नाटक और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास रहने वाले मछुआरों को 21 जून को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। |
नोट- यह जानकारी पूरी तरह से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक वैज्ञानिक डेटा और पूर्वानुमान पद्धतियों पर आधारित है मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार रीयल-टाइम अपडेट के लिए हमेशा स्थानीय मौसम केंद्र की घोषणाओं पर नजर रखें।







