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वैश्विक भावनाओं को ठेस पहुंची: थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर विष्णु प्रतिमा ध्वस्त होने पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर विष्णु प्रतिमा ध्वस्त होने पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 27, 2025 11:31 पूर्वाह्न
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थाईलैंड–कंबोडिया सीमा क्षेत्र में भगवान विष्णु की एक प्राचीन प्रतिमा को ध्वस्त किए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। भारत ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस कृत्य से न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में सनातन आस्था से जुड़े करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। विदेश मंत्रालय ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर हमला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रतिमा की बहाली की मांग की है।

 घटना का पूरा विवरण 

जानकारी के अनुसार यह घटना थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा के पास स्थित एक विवादित क्षेत्र में हुई, जहां प्राचीन काल से हिंदू और बौद्ध सांस्कृतिक प्रभाव देखने को मिलते हैं। इसी क्षेत्र में भगवान विष्णु की एक प्रतिमा स्थापित थी, जिसे स्थानीय लोग ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का प्रतीक मानते हैं।

हाल ही में सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कथित तौर पर इस प्रतिमा को तोड़ा गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इसे सीमा से जुड़े एक निर्माण या सुरक्षा परियोजना के दौरान हटाया गया, लेकिन हटाने की प्रक्रिया में प्रतिमा को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। 

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भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया 

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा,

“हम थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर भगवान विष्णु की प्रतिमा को ध्वस्त किए जाने की खबरों से अत्यंत व्यथित हैं। यह कृत्य वैश्विक स्तर पर हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। भारत इस घटना की निंदा करता है और संबंधित देशों से अपेक्षा करता है कि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।”

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है। 

‘सांस्कृतिक विरासत पर हमला’ 

भारत के कई सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों ने इस घटना को “सांस्कृतिक विरासत पर सीधा हमला” बताया है। उनका कहना है कि दक्षिण–पूर्व एशिया में हिंदू सभ्यता और परंपराओं की गहरी जड़ें रही हैं। थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों में आज भी रामायण, महाभारत और विष्णु उपासना के अनेक प्रमाण मिलते हैं।

ऐसे में भगवान विष्णु की प्रतिमा को नष्ट किया जाना केवल एक धार्मिक प्रतीक को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि साझा एशियाई इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को चोट पहुंचाना है। 

थाईलैंड और कंबोडिया की स्थिति 

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद कोई नया नहीं है। दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों की सरकारों की ओर से आधिकारिक बयान सामने आए हैं, जिनमें कहा गया है कि मामले की जांच की जा रही है।

कंबोडिया के एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि “यह जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।” वहीं थाईलैंड की ओर से कहा गया है कि वे धार्मिक स्थलों और प्रतीकों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारत की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। 

वैश्विक हिंदू समुदाय में आक्रोश

इस घटना के बाद दुनिया भर में बसे हिंदू समुदाय में आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर #SaveHinduHeritage और #RespectVishnu जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि ऐसे धार्मिक स्थलों और प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में रहने वाले हिंदू समुदायों ने अपने-अपने देशों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 

इतिहासकारों के अनुसार, दक्षिण–पूर्व एशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव पहली से बारहवीं शताब्दी के बीच अपने चरम पर था। अंगकोरवाट (कंबोडिया) और अयुत्थाया (थाईलैंड) जैसे ऐतिहासिक स्थल हिंदू देवताओं, विशेषकर विष्णु और शिव की उपासना के प्रमाण हैं।

ऐसे में इस क्षेत्र में स्थित विष्णु प्रतिमा केवल एक धार्मिक मूर्ति नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक आदान–प्रदान की गवाही भी है। 

भारत की अपेक्षाएं 

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को कूटनीतिक माध्यमों से उठाता रहेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत संबंधित देशों से यह अपेक्षा करता है कि

  • घटना की निष्पक्ष जांच हो,
  • दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए,
  • क्षतिग्रस्त प्रतिमा की मरम्मत या पुनर्स्थापना की जाए,
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर भगवान विष्णु की प्रतिमा को ध्वस्त किए जाने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक विकास और सुरक्षा के नाम पर क्या सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की अनदेखी की जा सकती है?

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान केवल एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी का विषय है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित देश इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या यह घटना भविष्य में धार्मिक विरासत की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय पहल जन्म देती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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