व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

अमेरिकी टैरिफ पर सियासी घमासान भारत पर 50% शुल्क को अवैध बताकर हटाने की उठी मांग

अमेरिकी टैरिफ पर सियासी घमासान भारत पर 50% शुल्क
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 17, 2025 3:39 अपराह्न
Follow Us:

हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% तक के भारी-भरकम टैरिफ को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए इन शुल्कों को अवैध बताते हुए इन्हें तुरंत हटाने की मांग के साथ तीन प्रमुख अमेरिकी सांसदों ने सदन में एक प्रस्ताव पेश किया है। यह कदम न केवल भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को उजागर करता है बल्कि अमेरिकी कांग्रेस के भीतर भी ट्रम्प प्रशासन की एकतरफा व्यापार नीतियों पर बढ़ते असंतोष को भी दर्शाता है।

अमेरिकी टैरिफ पर सियासी घमासान भारत पर 50% शुल्क

​टैरिफ की पृष्ठभूमि और राजनीतिक विवाद

​ट्रम्प प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act – IEEPA) के तहत एक राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का उपयोग करते हुए 1 अगस्त 2025 में भारतीय आयातों पर 25% का टैरिफ लगाया था जिसके कुछ ही दिनों बाद एक और  द्वितीयक 25% शुल्क लगा दिया गया जिससे कई भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुँच गया।

ट्रंप के ​व्हाइट हाउस ने इस कदम को भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद के लिए उठाया था यह तर्क देते हुए कि यह मास्को के युद्ध प्रयासों को समर्थन देता है। हालाँकि यह निर्णय शुरू से ही विवादास्पद रहा है और द्विपक्षीय संबंधों पर इसके व्यापक प्रभाव की आशंका जताई जा रही है। जिससे बहुत प्रभाव पड़ा है

​सांसदों की आवाज़ अवैध और हानिकारक शुल्क

​डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य डेबोरा रॉस (उत्तरी कैरोलिना) मार्क वीज़ी (टेक्सास) और राजा कृष्णमूर्ति (इलिनोइस) इस टैरिफ के खिलाफ खुला विरोध किया है । उन्होंने एक संयुक्त प्रस्ताव पेश कर ट्रम्प की आपातकाल की घोषणा को समाप्त करने और इन भारी शुल्कों को रद्द करने की मांग की है।

​अवैधता का तर्क सांसदों ने इन टैरिफों को अवैध बताते हुए तर्क दिया है कि ट्रम्प ने व्यापार मामलों पर कांग्रेस के संवैधानिक अधिकार का दुरुपयोग किया है और राष्ट्रीय आपातकाल की शक्तियों का अनुचित उपयोग किया है। उनका मानना ​​है कि IEEPA का इस्तेमाल किसी को भी एकतरफा व्यापार नीतियां थोपने के लिए कभी नहीं किया जाना चाहिए।

​आर्थिक नुकसान 

सांसदों ने इस बात पर जोर दिया है कि ये शुल्क अमेरिकी श्रमिकों उपभोक्ताओं और व्यवसायों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ​कांग्रेसवुमन रॉस ने उत्तरी कैरोलिना के साथ भारत के गहरे और आर्थिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों ने उनके राज्य में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है और हजारों नौकरियाँ दी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह टैरिफ नौकरियों नवाचार और प्रतिस्पर्धा को भी खतरे में डालते हैं।

​कांग्रेसमैन वीज़ी ने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है और ये अवैध टैरिफ उन आम नॉर्थ टेक्सास निवासियों पर एक कर के समान हैं जो पहले से ही बढ़ती लागतों से जूझ रहे हैं।

​भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसमैन कृष्णमूर्ति ने इन शुल्कों को गैर-उत्पादक (counterproductive) बताते हुए यह कहा कि यह टैरिफ आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि हानिकारक टैरिफों को समाप्त करने से  अमेरिका को भारत के साथ हमारे साझा आर्थिक और सुरक्षा ज़रूरतों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

​भारत-अमेरिका साझेदारी पर तनाव

​अमेरिका-भारत का संबंध जो दशकों से द्विदलीय समर्थन का आनंद लेते रहे हैं इन शुल्कों के कारण गंभीर तनाव में आ गए हैं। रणनीतिक रूप से अमेरिका और भारत दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए एक मज़बूत साझेदारी को महत्वपूर्ण मानते हैं। हालांकि ये व्यापारिक बाधाएं दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को कमज़ोर कर रही हैं।

​कई अमेरिकी विशेषज्ञों और सांसदों ने भी यह चेतावनी दी है कि ट्रम्प की टैरिफ नीतियां भारत को चीन और रूस जैसे देशों के करीब धकेल सकती हैं जो अमेरिका के दीर्घकालिक भू-राजनीतिक हितों के लिए हानिकारक होगा। कुछ विश्लेषकों ने तो यहाँ तक तर्क दिया है कि टैरिफ लगाने का मुख्य कारण रूसी तेल खरीद से संबंधित नहीं था बल्कि पूर्व राष्ट्रपति की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और भारत की कुछ टिप्पणियों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया से जुड़ा था।

​अमेरिकी उपभोक्ताओं पर प्रभाव

​टैरिफ का सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। भारत से आयात होने वाले रत्न और आभूषण  वस्त्र  जूते-चप्पल  फर्नीचर और औद्योगिक रसायन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पाद अब अमेरिकी बाज़ारों में काफी महंगे हो गऐ है। यह महँगाई उस समय आ रही है जब अमेरिकी परिवार पहले से ही मुद्रास्फीति और बढ़ती जीवन लागत से जूझ रहे हैं। सांसदों का मानना है कि टैरिफ हटाना सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकों को राहत प्रदान करेगी 

​आगे की राह और कांग्रेस का रुख

​यह प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा ट्रम्प प्रशासन की आपातकालीन शक्तियों के उपयोग पर लगाम लगाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे पहले सीनेट में भी ब्राजील पर इसी तरह के टैरिफ को वापस लेने और राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों को सीमित करने के लिए एक द्विदलीय प्रयास किया गया था। यह दर्शाता है कि कांग्रेस में ट्रम्प की व्यापार नीति को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और वे व्यापार पर अपने संवैधानिक नियंत्रण को बहाल करना चाहते हैं।

​हालांकि यह प्रस्ताव सदन से पारित होता है या नहीं  यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन यह अमेरिकी सरकार के भीतर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है क्या एकतरफा व्यापारिक उपाय एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के साथ दीर्घकालिक आर्थिक और सुरक्षा हितों से ऊपर हैं

​भारत पर 50% टैरिफ ट्रम्प प्रशासन का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक तनाव का कारण बन गया है।जिसे आज तीन अमेरिकी सांसदों  के द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल इन शुल्कों की वैधता है बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि मज़बूत भारत-अमेरिका साझेदारी अमेरिकी की आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। 

टैरिफ को हटाकर ही दोनों देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर कर सकते हैं और अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत दे सकते हैं और एक मुक्त व खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ा सकते हैं। अब गेंद अमेरिकी कांग्रेस के पाले में है और देखना यह होगा कि क्या वे अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करके इस हानिकारक व्यापारिक बाधा को दूर कर पाते हैं।

Harshita

I am a passionate content writer from the Chandigarh–Panchkula region. I am curious and love exploring diverse topics. At DailyBarta.in, I primarily write about video games and sports, bringing readers fresh insights, engaging analysis, and easy-to-understand breakdowns of the latest trends.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment