तेहरान।फुटबॉल की दुनिया में उस समय हलचल मच गई, जब ईरान फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष मेंहदी ताज ने संकेत दिए के अमेरिका में होने वाले अगले विश्व कप में ईरान की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण टीम की अमेरिका यात्रा पर सवाल खड़े हो गए हैं।यह बयान तब आया जब फीफा वर्ल्ड कप 2026 की तैयारी है तो जोरों पर है ।यह विश्व कप पहली बार तीन देशों अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाना है ,लेकिन ईरान के संदर्भ में राजनीतिक परिस्थितियां दिया खेल के रास्ते में बड़ी बाधा बनती दिख रही है।
यह कहा महासंघ के अध्यक्ष ने ?
मेहंदी ताज ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा परिस्थिति में यह कहना मुश्किल है कि हमारी टीम अमेरिका जाकर विश्व कप खेलेगी या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं, और अंतिम निर्णय परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा। उनका यह बयान किसी औपचारिक बहिष्कार की घोषणा नहीं है, लेकिन इसमें गहरी चिंता झलक रही है। यह पहली बार है जब ईरान के आधिकारिक फ़ुटबॉल संस्था ने इतने स्पष्ट शब्दों में विश्व कप भागीदारी पर संशय व्यक्त किया।
अमेरिका, ईरान और तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। आर्थिक प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद और क्षेत्रीय राजनीति, इन सभी ने दोनों देशों के रिश्ते को प्रभावित किया है। हाल के महीना में तनाव बढ़ा है, इसी पृष्ठभूमि के कारण ईरानी फुटबॉल संघ को यह चिंता सता रही कि खिलाड़ियों और अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिल पाएगी या नहीं। वीजा प्रक्रिया सुरक्षा जांच और संभावित राजनीतिक दबाव यह सभी पहलू निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं ।
सुरक्षा और वीजा का मुद्दा
अमेरिका की सख्त वीजा नीतियां पहले भी चर्चा में रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के दौरान खिलाड़ियों को विशेष छूट मिलती है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण प्रक्रिया जटिल हो सकती है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर सरकारों के स्तर पर तनाव बना रहा तो खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और अधिकारियों की यात्रा कठिन हो सकती है। यह केवल खेल का मामला नहीं रह जाता बल्कि कूटनीतिक संबंधों का विषय बन जाता है ।
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क्या होगी फीफा की भूमिका
विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा के सामने भी यह एक चुनौती पूर्ण स्थित है। फीफा का नियम स्पष्ट है कि किसी भी सदस्य देश की टीम को राजनीतिक कारणों से नहीं रोका जाना चाहिए, हालांकि अभी तक फीफा की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार संस्था हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यदि वाकई भागीदारी पर खतरा पैदा होता है, तो फीफा को मध्यस्थता करनी पड़ सकती है।
ईरान की तैयारी और उम्मीदें
एशियाई फुटबॉल में ईरान एक महाशक्ति है ,टीम ने क्वालीफाइंग चरण में अच्छा प्रदर्शन किया और विश्व कप के लिए स्थान सुनिश्चित किया। ईरानी पर प्रशंसकों के लिए यह टूर्नामेंट केवल खेल नहीं,बल्कि राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। यदि टीम को विश्व कप में भाग लेने से रोका जाता है, या स्वयं पीछे हटती है, तो इसका असर खिलाड़ियों के मनोबल और देश के खेल छवि पर भी पड़ेगा।
क्या है विकल्प
यदि किसी कारणवश ईरान विश्व कप में हिस्सा नहीं ले पता, तो नियमों के अनुसार फीफा को विकल्प तलाशना होगा, आमतौर पर ऐसे में महाद्वीप की अगली रैंकिंग वाली टीम को मौका दिया जा सकता है। हालांकि अभी ऐसी स्थिति की पुष्टि नहीं है। ईरान ने आधिकारिक रूप से अपना नाम वापस नहीं लिया है, इसलिए फिलहाल यह केवल आशंका के स्तर पर ही है ।
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खेल और राजनीति का पुराना रिश्ता
इतिहास गवाह है कि कई बार बड़े खेल आयोजनों पर राजनीतिक प्रभाव पड़ा है। ओलंपिक खेलों में बहिष्कार से लेकर विभिन्न टूर्नामेंट में टीमों के प्रवेश पर विवाद जैसी घटनाएं बताती है कि, खेल पूरी तरह से राजनीति से अलग नहीं रह पाया है। फुटबॉल विश्व कप जैसे आयोजन में किसी टीम की अनुपस्थिति सिर्फ खेल जगत को ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है ।
ईरानी प्रशंसकों की प्रतिक्रिया
फुटबॉल ईरान का बेहद लोकप्रिय खेल है। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने मिश्रित प्रक्रिया दी है। कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रीय सम्मान सर्वोपरि है, जबकि अन्य का कहना है कि खेलों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए, और टीम को हर हाल में भाग लेना चाहिए। अमेरिका में बसे ईरानी मूल के लोग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, उनके लिए आयोजन सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है।
आगे की संभावनाएं
अभी अंतिम निर्णय आना बाकी है।आने वाले महीनों में राजनैतिक स्थिति और कूटनीतिक बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय करेगी। यदि दोनों देशों के बीच किसी स्तर पर सहमति बनती है तो ईरान की टीम बिना बाधा के विश्व कप में भाग ले सकती है।लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो मामला खेल इतिहास की एक बड़ी घटना बन सकता है।
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