ISL 2025-26 को मिली हरी झंडी-नई दिल्ली।भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी है। लंबे समय से अनिश्चितता और अटकलों के बीच फंसी इंडियन सुपर लीग (ISL) 2025-26 को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है। अब यह प्रतिष्ठित फुटबॉल लीग 14 फरवरी 2026 से शुरू होगी। केंद्र सरकार, अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और सभी ISL क्लबों के बीच सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया है।
पिछले कई महीनों से यह आशंका बनी हुई थी कि आर्थिक और प्रशासनिक कारणों से ISL का अगला सत्र शायद आयोजित न हो पाए, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। खेल मंत्रालय की पहल पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद लीग के आयोजन को लेकर सहमति बनी और फुटबॉल जगत में फैली निराशा उम्मीद में बदल गई।
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अनिश्चितता के दौर का अंत
दरअसल ISL 2025-26 को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर था। लीग के मौजूदा व्यावसायिक समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद नया समझौता तय नहीं हो पाया था। इसका सीधा असर क्लबों की तैयारियों, खिलाड़ियों के अनुबंध और पूरे कैलेंडर पर पड़ा। कई क्लबों ने खुले तौर पर चिंता जताई थी कि अगर लीग नहीं हुई तो भारतीय फुटबॉल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
खिलाड़ियों, कोचों और प्रशंसकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या ISL का भविष्य खतरे में है। कुछ क्लबों ने बज़ट घटाने शुरू कर दिए थे, वहीं कई विदेशी खिलाड़ी भी असमंजस में थे। ऐसे माहौल में ISL के भविष्य को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक था।
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सरकार और AIFF की निर्णायक भूमिका
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया। खेल मंत्रालय की अगुवाई में AIFF और सभी ISL क्लबों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इस बैठक में लीग के आयोजन, प्रारूप और वित्तीय व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद यह तय हुआ कि ISL 2025-26 का आयोजन हर हाल में किया जाएगा और इसकी शुरुआत 14 फरवरी से होगी। यह भी स्पष्ट किया गया कि लीग में सभी 14 टीमें हिस्सा लेंगी, जिससे प्रतियोगिता की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।
खेल मंत्री ने कहा कि भारतीय फुटबॉल देश के युवाओं से जुड़ा है और इसे किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दिया जा सकता। सरकार, महासंघ और क्लब मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि लीग सुचारु रूप से आयोजित हो।
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14 टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले
ISL 2025-26 में देश की 14 प्रमुख टीमें मैदान में उतरेंगी। इनमें मोहन बागान सुपर जायंट, ईस्ट बंगाल, मुंबई सिटी एफसी, केरल ब्लास्टर्स, बेंगलुरु एफसी, एफसी गोवा, चेन्नईयन एफसी, ओडिशा एफसी, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड, हैदराबाद एफसी, पंजाब एफसी, जमशेदपुर एफसी सहित अन्य क्लब शामिल हैं।
लीग के प्रारूप को लेकर भी सहमति बनी है। इस बार मुकाबले सीमित लेकिन प्रतिस्पर्धी होंगे, ताकि कम समय में लीग को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके। हर टीम अपने घरेलू मैदान पर खेलने का मौका पाएगी, जिससे दर्शकों का उत्साह भी बरकरार रहेगा।
आर्थिक व्यवस्था के लिए विशेष फंड
लीग के आयोजन को लेकर सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक थी। इस चुनौती से निपटने के लिए एक विशेष केंद्रीय फंड बनाने का निर्णय लिया गया है। इस फंड से लीग के आयोजन, यात्रा, स्टेडियम, सुरक्षा और अन्य जरूरी खर्च पूरे किए जाएंगे।
AIFF और अन्य सहयोगी संस्थाएं मिलकर इस फंड में योगदान देंगी। साथ ही भविष्य के लिए एक स्थायी व्यावसायिक मॉडल तैयार करने पर भी काम शुरू किया जाएगा, ताकि आगे किसी भी सीजन में ऐसी स्थिति न बने।
इसके अलावा, लीग के संचालन के लिए एक अलग शासी परिषद बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें क्लबों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। इससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और क्लबों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
I-League को भी मिलेगा समानांतर मंच
ISL के साथ-साथ भारतीय फुटबॉल की दूसरी अहम प्रतियोगिता I-League को भी लेकर स्पष्टता आई है। I-League का आयोजन भी तय समय पर होगा और इसमें 11 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे देश में फुटबॉल की पूरी संरचना संतुलित बनी रहेगी और निचले स्तर के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
फुटबॉल जगत में खुशी की लहर
ISL की वापसी की घोषणा के बाद खिलाड़ियों, कोचों और प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई भारतीय खिलाड़ियों ने इसे “भारतीय फुटबॉल के लिए जीवनदायिनी खबर” बताया है। क्लबों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और प्री-सीजन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ISL का यह सत्र सफल रहता है, तो इससे भारतीय फुटबॉल की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। युवा खिलाड़ियों को विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव मिलेगा, जो राष्ट्रीय टीम के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।
भारतीय फुटबॉल के भविष्य की उम्मीद
ISL सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की पहचान बन चुकी है। पिछले वर्षों में इस लीग ने देश में फुटबॉल की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर खिलाड़ी ISL के मंच तक पहुंचे हैं और राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई है।
ISL 2025-26 का आयोजन यह संदेश देता है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद भारतीय फुटबॉल आगे बढ़ने के लिए तैयार है। सरकार, महासंघ और क्लबों के बीच बना यह तालमेल आने वाले समय में खेल के विकास के लिए मजबूत आधार बनेगा।







