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कैसे हालचाल हैं सिंधिया जी…? कमल नाथ का छलका दर्द, विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय लगाते रहे ठहाके-कमल नाथ ने साधा निशाना

कमल नाथ
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 5, 2025 7:37 अपराह्न
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सदन में शुरुआत से ही गर्म माहौल

मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज का दिन राजनीतिक तकरार, तंज और ठहाकों से भरा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर हुई एक टिप्पणी ने सदन का माहौल अचानक बदल दिया। जैसे ही चर्चा सरकारी योजनाओं की समीक्षा से राजनीतिक पलटवार की ओर मुड़ी, विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने नज़र आने लगे। इसी बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ठहाकों ने बातचीत को और भी हल्का-फुल्का लेकिन तंजभरा बना दिया।

कमल नाथ ने साधा निशाना, सिंधिया पर किया सीधा टिप्पणी

विपक्ष की ओर से बोलते हुए कमल नाथ ने प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर बात करते-बात करते अचानक एक वाक्य कह दिया— “कैसे हालचाल हैं सिंधिया जी?”

कमल नाथ ने साधा निशाना

दरअसल, यह वाक्य उन्होंने सीधा ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर देखते हुए कहा। सदन में मौजूद सदस्यों को यह एक सामान्य औपचारिकता की तरह नहीं लगा, बल्कि उन्होंने इसे एक पुरानी राजनीतिक कड़वाहट की याद दिलाने वाली टिप्पणी के रूप में महसूस किया। कमल नाथ के इस सवाल पर सत्तापक्ष के कई नेता मुस्कुराने लगे।

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कमल नाथ के बयान में दर्द और तंज दोनों की परत साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जो उलटफेर हुआ, उसका असर अभी तक राज्य की नीतियों और प्रशासन पर साफ नजर आता है।

उनका इशारा 2020 में कांग्रेस सरकार के गिरने और सिंधिया के भाजपा में शामिल होने की घटनाओं की ओर था। उन्होंने कहा, “राजनीति में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन जनता को हुई हानि को कोई कैसे भूल सकता है?”

सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया: विजयवर्गीय के ठहाके छाए

कमल नाथ के तंज के बाद जैसे ही सदन में हलचल हुई, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जोरदार ठहाका लगाया। उनका हंसना विपक्ष की ओर से की गई टिप्पणी पर भी था और शायद उस राजनीतिक इतिहास पर भी, जिसका संकेत कमल नाथ दे रहे थे। विजयवर्गीय ने हल्के अंदाज़ में कहा—“कमल नाथ जी को पुराने दिनों की याद बहुत आती है, लेकिन राजनीति आगे बढ़ती है, पीछे नहीं।”

उनके इस तंज पर सत्ता पक्ष के कई विधायक भी हंस पड़े। कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि आज का मध्यप्रदेश विकास के नए चरण से गुजर रहा है और सरकार विपक्ष की बातों से विचलित नहीं होती, क्योंकि जनता ने पूरी तरह से भाजपा पर भरोसा जताया है।

सिंधिया शांत, लेकिन चेहरा बताता रहा अपनी बात

विपक्ष के नेता कमल नाथ ने जिस अंदाज़ में सिंधिया से “हालचाल” पूछा, उस पर खुद सिंधिया ने कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। वे चुपचाप अपनी सीट पर बैठे रहे, लेकिन सदन मौजूद सदस्यों के अनुसार उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान जरूर थी, जो यह बताने के लिए काफी थी कि वह टिप्पणी उन्हें अप्रत्याशित नहीं लगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंधिया अब पूरी तरह केंद्रीय राजनीति में स्थापित हो चुके हैं। ऐसे में कमल नाथ का तंज उन्हें प्रभावित करे, इसकी संभावना कम ही है। हालांकि सदन के अंदर यह क्षण जरूर चर्चा का प्रमुख कारण रहा।

विपक्ष का आरोप: राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की जड़ 2020 की घटनाएं

कमल नाथ ने सदन में यह भी कहा कि यदि प्रदेश लगातार विकास में पिछड़ रहा है तो उसकी सबसे बड़ी वजह 2020 की राजनीतिक उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि सरकार के गिरने के बाद नौकरशाही की दिशा बदल गई, योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा और प्रदेश को स्थिर नेतृत्व नहीं मिल पाया।

उन्होंने कहा—“जब राजनीति में छल-कपट और सौदेबाज़ी हावी हो जाती है, तब विकास की गति धीमी पड़ ही जाती है।” इस टिप्पणी पर भी कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कांग्रेस अपनी नाकामी छिपाने के लिए भाजपा को दोष देती रहती है।

सत्तापक्ष का पलटवार: कांग्रेस ‘आत्मचिंतन’ करे

भाजपा विधायकों ने कमल नाथ के बयान को राजनीति का ‘ड्रामेटिक एक्ट’ बताया। कई नेताओं ने कहा कि यदि कांग्रेस खुद मजबूत होती तो टूट-फूट की स्थिति बनती ही नहीं। एक विधायक ने कहा,“सिंधिया जी को लेकर भावुक होना बंद कीजिए। जनता ने उन्हें स्वीकार किया है, इसलिए वह आज सफल हैं।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष का काम केवल आरोप लगाना नहीं, बल्कि रचनात्मक सुझाव देना भी है।

सदन का माहौल: तकरार और हंसी-मज़ाक का मिला-जुला दृश्य

सदन में कमल नाथ के बयान के बाद तकरीबन 20 मिनट तक चर्चा का रुख गंभीर बहस से हटकर व्यंग्य और हल्के-फुल्के संवाद की ओर मुड़ गया। कई सदस्य यह कहते नजर आए कि राजनीति में व्यक्तिगत कटाक्ष का स्तर बढ़ता जा रहा है, और इससे सदन की कार्यवाही का महत्व कम होता है। वहीं कुछ सदस्यों का यह भी कहना था कि ऐसे क्षण लोकतंत्र को अधिक जीवंत बनाते हैं, क्योंकि इससे नेताओं का मानवीय पक्ष भी सामने आता है।

आज की बहस का राजनीतिक असर

विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना आगामी महीनों में होने वाली चुनावी गतिविधियों में एक नया मुद्दा बन सकती है। कमल नाथ ने जिस तरह से सिंधिया को केंद्र में रखकर अपनी बात कही, उससे साफ है कि विपक्ष अभी भी 2020 की घटनाओं को जनता के सामने एक ‘विश्वासघात’ के रूप में पेश करना चाहता है।

दूसरी ओर सत्ता पक्ष यह बताना चाहता है कि सिंधिया और भाजपा का गठजोड़ अब स्थायी है और यह प्रदेश विकास के लिए फायदेमंद है।

राजनीति में तंज की परंपरा जारी

आज की विधानसभा कार्यवाही ने यह एक बार फिर साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश की राजनीति में कमल नाथ और सिंधिया का समीकरण अभी भी सुर्खियां बटोर सकता है। कमल नाथ के “कैसे हालचाल हैं सिंधिया जी?” जैसे बयान ने राजनीतिक स्मृतियों को एक बार फिर ताज़ा कर दिया। कैलाश विजयवर्गीय के ठहाके इस बात की याद दिलाते रहे कि राजनीति में कटाक्ष और व्यंग्य भी एक हथियार होता है, जिसे दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल करते हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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