अपने सुरीले अंदाज में आध्यात्म की अलख जगाने वाले इंद्रेश उपाध्याय का जन्म 7 अगस्त 1972 में उत्तर प्रदेश के वृंदावन धाम में हुआ था। वृंदावन के रमणरेती में उनका घर है महाराज 13 वर्ष की उम्र में गीता भजन ग्रंथों का अध्ययन और कथा के लाखों दीवाने है।

इंद्रेश उपाध्याय जी का बचपन दूसरे बच्चों की तरह खेल कूद में नहीं बिता बल्कि वह बहुत ज्यादा भक्ति शास्त्र और कथा की ओर आकर्षित हो गए थे। उन्होंने वृंदावन के ही कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से ही अपनी शुरुआती पढ़ाई की और वह प्रसिद्ध कथा वाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर के बेटे हैं।
उनकी माता का नाम नरवादा शर्मा है अपनी तीन बहनों में इकलौते भाई हैं उनके पिता ही उनके प्रथम गुरु रहे। उनके पिता ने न केवल उनका शास्त्र का ज्ञान दिया बल्कि कथावाचक की कथा भी सिखाई।
1.9 मिलियन फालोअर्स, खुद का यूट्यूब चैनल, करोड़ों चाहनें वाले
इंद्रेश उपाध्याय केवल कथा वाचक और भजन गायक तक सीमित नहीं रहे । उन्होंने धर्म ज्ञान और भक्ति को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया उसे एक संस्थागत रूप दिया। उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए भक्तिपथ नामक संगठन की स्थापना भी की, महाराज की सोशल मीडिया इंस्टाग्राम में 1.9 मिलियन फॉलोअर्स है, और उनका खुद का भी एक यूट्यूब चैनल है जिसका नाम भक्ति पथ है। जिस पर 1.35 मिलियन से भी ज्यादा सब्सक्राइबर है ।
अपने सरल एवं मधुर स्वभाव के चलते हुए काफी पॉपुलर है।
जानकारी के अनुसार उनकी कथा वाचन की कीमत 11000 से 1.5 लाख रुपए तक की है, इसके अलावा कई शहरों और राज्यों में आयोजन समिति का बजट कितना है वह फिक्स नहीं है। हालांकि इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज की फीस कितनी है इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
सुरीले भजन से लाखों लोगों की बनें पसंद
उन्होंने बहुत से गीत और भजन गए हैं जिन्हें लाखों लोग सुनते हैं उन्होंने अपना एक भजन ‘राधा गोरी गोरी’ बी प्राक के साथ भी लॉन्च किया है। महाराज जी के भजन हर उम्र के लोगों के बीच प्रसिद्ध है। इंद्रेश उपाध्याय महाराज की आय और संपत्ति की कोई औपचारिक प्रमाण नहीं है। उनकी आय का मुख्य स्रोत उनके भजन गायक और कथा वाचन है।
इसके अलावा उनके द्वारा स्थापित भक्ति पथ में कई ऑनलाइन टीचिंग के माध्यम से कई धार्मिक और आध्यात्मिक कोर्स करती है। जिससे भी उन्हें आय अर्जित होती है।
वैदिक आध्यात्मिक थाम पर विशेष आमंत्रण
उनके विवाह के लिए वैदिक-आध्यात्मिक थीम पर आधारित विशेष निमंत्रण पत्र तैयार किया गया है। कार्ड के साथ वृंदावन के प्रमुख मंदिरों का प्रसाद भी भेजा गया है। कार्ड पर श्रीनाथजी की आकर्षक छवि लगी है, जो इसे और विशेष बनाती है।
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जयपुर जा रही है बारात

- वृंदावन के जाने-माने कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय कल शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। उनकी बारात जयपुर के लिए रवाना हो चुकी है।
- अपनी कथाओं और भजन से लोगों का मन मोह लेने वाले इंद्रेश उपाध्याय 5 दिंसबर को जयपुर गुलाबी नगरी’ आमेर स्थित ताज होटल में सात फेरे लेंगे।उनकी शादी की रस्में शुरू हो चुकी हैं।
- कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय शिप्रा संग शादी करने वाले हैं। जोकि हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं।
- वो पंडित हरेंद्र शर्मा की बेटी हैं। हरेंद शर्मा उत्तर प्रदेश में पहले डीपीएस भी रह चुके हैं। शिप्रा और इंद्रेश उपाध्याय के परिवार की जान-पहचान काफी पुरानी है। इन दिनों शिप्रा का पूरा परिवार अमृतसर में रहता है। दोनों परिवारों के बीच वर्षों से परिचय और घनिष्ठता रही है, जिसके चलते पूरे परिवार की सहमति से यह रिश्ता तय हुआ।
- इंद्रेश उपाध्याय के प्री-वेडिंग फंक्शन की रस्में वृंदावन में ही पूरी हो चुकी हैं। हल्दी से लेकर संगीत सेरेमनी का आयोजन बीते दिनों ही पूरा हुआ है।
- इस दौरान इंद्रेश उपाध्याय के करीबी दोस्त और परिवार के लोग इन रस्मों में शामिल हुए हैं।
- इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा कल यानी 5 दिसंबर को सुबह 10 बजे के बाद सात फेरे लेंगे। शादी की रस्में वैदित रीति-रिवाजों से पूरी होने वाली हैं।
देश विदेश से आये है मेहमान
वहीं बात की जाए शादी में आने वाले मेहमानों की तो देश-विदेश से कई नामी-गिरामी लोग वर-वधु को अपना आशीर्वाद देने के लिए आने वाले हैं।







