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जानिए मकर संक्रांति का महत्व- कैसे मनाई जाती है भारत के विभिन्न राज्यों में 

जानिए मकर संक्रांति का महत्व- कैसे मनाई जाती है
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 11, 2026 1:20 अपराह्न
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मकर संक्रांति भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन हिंदू त्योहारों में से एक है। यह न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह खगोलीय घटनाओं और कृषि चक्र से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

मकर संक्रांति की शुरुआत और इतिहास

मकर संक्रांति का इतिहास हजारों साल पुराना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूँकि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन को ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतज़ार किया था, क्योंकि उत्तरायण में प्राण त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्यों है यह साल का पहला त्योहार 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भले ही नव वर्ष अलग-अलग समय पर आता हो, लेकिन सौर कैलेंडर (Solar Calendar) के हिसाब से मकर संक्रांति को साल का पहला बड़ा संक्रमण काल माना जाता है। यह सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करना सकारात्मकता और नई शुरुआत का सूचक है।

विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति के रूप

भारत की विविधता इस त्यौहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है-

राज्य त्यौहार का नाम मुख्य विशेषता 
पंजाब और हरियाणालोहड़ी अग्नि पूजन, भांगड़ा और मक्का की रोटी-सरसों का साग
तमिलनाडु पोंगल चार दिनों का उत्सव, मिट्टी के बर्तन में नए चावल पकाना। 
असममाघ बिहू‘भेलाघर’ बनाना और सामुदायिक भोज। 
गुजरात उत्तरायण पतंगबाजी का भव्य आयोजन। 
उत्तर प्रदेश/बिहार खिचड़ी गंगा स्नान और खिचड़ी का दान। 
कर्नाटक/आंध्र पेड्डा पांडुगा गायों की पूजा और रंगोली। 

इस दिन क्या करें और क्या न करें

क्या करें (Dos)

  • पवित्र स्नान –  संभव हो तो गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • दान-पुण्य –  तिल, गुड़, कंबल, घी और खिचड़ी का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • सूर्य देव की पूजा – तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
  • खिचड़ी का सेवन – इस दिन चावल और दाल की खिचड़ी खाना पाचन और स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
  • तिल-गुड़ का प्रयोग – सर्दियों में तिल और गुड़ शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं।

क्या न करें (Don’ts)

  • तामसिक भोजन – मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज के सेवन से बचना चाहिए।
  • क्रोध और वाद-विवाद –  इस दिन मन को शांत रखना चाहिए और किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए।
  • देर तक सोना – चूंकि यह सूर्य का पर्व है, इसलिए सूर्योदय से पहले उठना शुभ होता है।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से, इस दिन सूर्य मकर रेखा (Tropic of Capricorn) से गुजरते हुए उत्तर की ओर बढ़ना शुरू करता है। इस घटना को ‘उत्तरायण’ कहते हैं। इसके बाद से दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी। यह बदलाव किसानों के लिए फसल की कटाई और नई बुआई का संकेत होता है।

स्वास्थ्य के लिए महत्व

आयुर्वेद के अनुसार, मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने का विशेष महत्व है। तिल में तेल और गर्मी होती है, जबकि गुड़ ऊर्जा का स्रोत है। कड़ाके की ठंड में यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और वात-कफ दोषों को संतुलित करता है।

मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। यह हमें सिखाता है कि जिस तरह सूर्य अंधकार को मिटाकर प्रकाश लाता है, हमें भी अपने जीवन से बुराइयों को त्यागकर प्रेम और मिठास (जैसे तिल-गुड़) को अपनाना चाहिए।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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