व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

कुमार विश्वास ने दिखाई ‘केवी कुटीर’ की अनोखी झलक..वैदिक प्लास्टर कांच की नक्काशी और वारली आर्ट से सजा देसी अंदाज का सपना घर

कुमार विश्वास ने दिखाई ‘केवी कुटीर’ की अनोखी झलक
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 12, 2026 1:48 अपराह्न
Follow Us:

डेलीबार्ता,विशेष-मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने अपने पैतृक गांव में बने घर ‘केवी कुटीर’ की नई तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिनमें इस घर की अनूठी बनावट और भारतीय कला का सुंदर समागम देखने को मिलता है। बसंत उत्सव के अवसर पर यहां आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान सामने आई झलकियों ने लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचा। जहां एक ओर देश के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी कविताओं से समां बांधा, वहीं दूसरी ओर ‘केवी कुटीर’ की वास्तुकला और साज-सज्जा चर्चा का केंद्र बन गई।

सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में यह कुटीर भारतीय परंपरा, प्रकृति और आध्यात्मिकता का जीवंत उदाहरण नजर आती है। घर की दीवारों से लेकर आंगन और गार्डन तक हर कोना सादगी, कला और संस्कृति का संदेश देता दिखाई देता है।

भारतीय संस्कृति की झलक देता प्रवेश द्वार…फूलों की प्राकृतिक सजावट ने बढ़ाई बसंत की रंगत

‘केवी कुटीर’ का मुख्य प्रवेश द्वार अपनी सादगी और पारंपरिक प्रतीकों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। बसंत उत्सव के मौके पर गेट और प्रवेश मार्ग को सफेद और पीले फूलों की लड़ियों से सजाया गया था। फूलों के ऊंचे स्टैंड और सफेद फूलों से बना आर्च मेहमानों का स्वागत शाही अंदाज में करता नजर आया।

गेट पर बने ‘ॐ’ और स्वास्तिक के मांगलिक चिह्न भारतीय संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं। यह सजावट केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था के सम्मान का भी संकेत देती है। पूरे प्रवेश क्षेत्र में प्राकृतिक और देसी साज-सज्जा का ऐसा संतुलन देखने को मिला, जो आधुनिकता के बीच भारतीय मूल्यों को जीवित रखता है।

वैदिक प्लास्टर से बनी दीवारें…मिट्टी का एहसास और प्राकृतिक ठंडक

इस कुटीर की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारों पर किया गया वैदिक प्लास्टर है। वैदिक प्लास्टर पारंपरिक भारतीय निर्माण पद्धति से जुड़ा हुआ है, जिसमें प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। इससे दीवारों को मिट्टी जैसा प्राकृतिक लुक मिलता है और घर के अंदर का तापमान संतुलित बना रहता है।

दीवारों की यह बनावट आधुनिक सीमेंट-प्लास्टर से अलग है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि घर को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में अपेक्षाकृत संतुलित बनाए रखने में सहायक माना जाता है। केवी कुटीर की दीवारों को देखकर ऐसा महसूस होता है मानो घर प्रकृति के बेहद करीब हो।

कांच की नक्काशी ने बढ़ाई शाही चमक…रोशनी पड़ते ही जगमगा उठती हैं दीवारें

वैदिक प्लास्टर की सादगी के बीच कांच की नक्काशी घर को विशेष पहचान देती है। दीवारों पर छोटे-छोटे रंगीन कांच के टुकड़ों से सुंदर डिजाइन बनाए गए हैं। जब सूरज की किरणें या दीयों की रोशनी इन शीशों पर पड़ती है, तो पूरी दीवार चमक उठती है।

दरवाजों और प्रवेश मार्ग के आसपास की गई यह कारीगरी पारंपरिक शिल्प और सौंदर्यबोध का उदाहरण है। कांच का काम घर को शाही अंदाज देता है, लेकिन इसकी प्रस्तुति इतनी संतुलित है कि यह भड़कीला नहीं लगता। यह पारंपरिक कला को आधुनिक अभिव्यक्ति देने का सुंदर प्रयास प्रतीत होता है।

वारली आर्ट से सजी दीवारें..लोक कला का जीवंत प्रदर्शन

केवी कुटीर के अंदर प्रवेश करते ही वारली आर्ट की झलक नजर आती है। प्रवेश द्वार के दोनों ओर गहरे हरे रंग के खंभों‌  पर सफेद रंग से वारली पेंटिंग उकेरी गई है। वारली कला महाराष्ट्र की पारंपरिक जनजातीय कला है, जो सरल आकृतियों के माध्यम से जीवन, प्रकृति और उत्सवों को दर्शाती है। इन खंभों के शीर्ष पर छोटे कलश जैसे ढांचे बने हैं, जिन पर ‘ॐ’ और स्वास्तिक के चिह्न अंकित हैं। यह संयोजन लोक कला और आध्यात्मिक प्रतीकों का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है। वारली आर्ट की सादगी और भावनात्मक गहराई घर के वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करती है।

पारंपरिक और आधुनिकता का संतुलन…नेमप्लेट से मूर्तियों तक आध्यात्मिक स्पर्श

कुटीर की दीवार पर ‘वानप्रस्थ’ लिखी हुई नेमप्लेट विशेष ध्यान आकर्षित करती है। यह शब्द भारतीय जीवन दर्शन के एक महत्वपूर्ण आश्रम की ओर संकेत करता है। साथ ही राधा-कृष्ण की मूर्तियां घर को आध्यात्मिक स्वर देती हैं।

हस्तशिल्प डिजाइनों, मिट्टी की बनावट और पारंपरिक प्रतीकों के बीच आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और संस्कृति की अभिव्यक्ति जैसा प्रतीत होता है।

आंगन और बाहरी परिसर की शांति…बुद्ध और सरस्वती की मूर्तियों से आध्यात्मिक माहौल

केवी कुटीर का बाहरी क्षेत्र भी उतना ही आकर्षक है जितना इसका आंतरिक भाग। आंगन में भगवान बुद्ध और मां सरस्वती की सफेद मूर्तियां स्थापित हैं, जो शांति और ज्ञान का संदेश देती हैं। खुले आकाश के नीचे सजे फूल और हरियाली इस स्थान को सुकूनभरा बनाते हैं।

बसंत के अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान यहां का माहौल विशेष रूप से जीवंत नजर आया। कवियों की उपस्थिति और प्राकृतिक वातावरण ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

गार्डन एरिया – प्रकृति की गोद में सुकून…गजीबो, तालाब और हरी घास का मनमोहक दृश्य

केवी कुटीर का गार्डन एरिया प्रकृति प्रेम का सुंदर उदाहरण है। मखमली हरी घास के बीच पत्थरों से बने पैदल रास्ते इसे आकर्षक बनाते हैं। यहां एक लकड़ी का गजीबो भी बनाया गया है, जहां बैठकर शांति और सुकून का अनुभव किया जा सकता है।

गार्डन में एक छोटा तालाब भी है, जो वातावरण को ठंडा और संतुलित बनाए रखता है। चारों ओर लगे पेड़-पौधे और ताजे फूल इस जगह को ध्यान और विश्राम के लिए उपयुक्त बनाते हैं। भगवान बुद्ध की मूर्ति के पास बैठकर ध्यान करना यहां आने वाले लोगों के लिए विशेष अनुभव हो सकता है।

बसंत उत्सव में काव्य और संस्कृति का संगम…साहित्य और वास्तुकला का अनूठा मेल

बसंत के अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी ने ‘केवी कुटीर’ को और भी खास बना दिया। देश के कई जाने-माने कवियों ने यहां अपनी प्रस्तुतियां दीं। पीले और सफेद फूलों की सजावट, देसी वास्तुकला और कविताओं की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

यह आयोजन केवल साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और प्रकृति के संगम का प्रतीक भी था। कुटीर की सजावट और बनावट ने इस कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

देसी लुक में आधुनिक सोच का घर…‘केवी कुटीर’ 

अपनी सादगी, भारतीयता और प्राकृतिक निर्माण शैली के कारण अलग पहचान बनाता है। वैदिक प्लास्टर, कांच की नक्काशी और वारली आर्ट जैसे तत्व इसे विशिष्ट बनाते हैं। यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक मूल्यों का संतुलन दिखाई देता है।

कुमार विश्वास द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो से स्पष्ट है कि यह घर केवल एक आवास नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कला के प्रति उनके जुड़ाव का प्रतीक है। प्रकृति की गोद में बसा यह कुटीर अपने देसी अंदाज, आध्यात्मिक माहौल और कलात्मक साज-सज्जा के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

‘केवी कुटीर’ उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो आधुनिक जीवनशैली के बीच भारतीय परंपराओं और प्राकृतिक निर्माण शैली को अपनाना चाहते हैं। यह घर दर्शाता है कि सादगी और संस्कृति के साथ भी भव्यता हासिल की जा सकती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment