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युमनाम खेमचंद सिंह- मणिपुर के नए मुख्यमंत्री जिनसे शांति की उम्मी-राष्ट्रपति शासन हटते ही मणिपुर को मिला नया मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री जिनसे शांति की उम्मी-राष्ट्रपति शासन हटते ही मणिपुर को मिला नया मुख्यमंत्री
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 5, 2026 8:42 अपराह्न
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मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अनिश्चितता और राष्ट्रपति शासन के दौर के बाद आखिरकार राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार शाम मणिपुर के लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

उनके शपथ ग्रहण से कुछ ही घंटे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

बीजेपी विधायक दल का नेता चुने गए थे खेमचंद

62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह को मंगलवार को ही बीजेपी विधायक दल का निर्विरोध नेता चुना गया था। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मौजूदा हालात में सबसे संतुलित और स्वीकार्य चेहरा मानते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया।

बीजेपी मणिपुर इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उनके शपथ ग्रहण कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए लिखा“उनके अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में मणिपुर शांति, विकास और सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। राज्य में स्थिरता और प्रगति का एक नया अध्याय शुरू होगा।”

राज्यपाल को सौंपा समर्थन पत्र

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार गठन का समर्थन पत्र सौंपा। इस मौके पर बीजेपी महासचिव तरुण चुघ, पूर्वोत्तर राज्यों के समन्वयक संबित पात्रा समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह साफ संकेत था कि केंद्र नेतृत्व पूरी तरह खेमचंद सिंह के साथ खड़ा है।

कैसे मुख्यमंत्री पद तक पहुँचा खेमचंद सिंह का नाम, एक तस्वीर जिसने बदली राजनीतिक धारणा

युमनाम खेमचंद सिंह के नाम की चर्चा पिछले साल 8 दिसंबर को अचानक तेज हो गई थी, जब सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल हुई। यह तस्वीर मणिपुर के उखरूल जिले के एक कुकी गांव की थी, जहां खेमचंद सिंह एक राहत शिविर के बाहर एक कुकी बच्ची को गोद में लिए नजर आ रहे थे। तीन मई 2023 को राज्य में भड़की भीषण जातीय हिंसा के बाद यह पहला मौका था जब किसी मैतेई नेता ने विस्थापित कुकी समुदाय के बीच जाकर उनकी पीड़ा को समझने की कोशिश की थी।

21 महीनों में पहली ऐसी पहल

बीते करीब 21 महीनों में न तो किसी बड़े नेता ने ऐसा कदम उठाया था और न ही इस तरह का कोई दृश्य मणिपुर में देखा गया था। यही वजह थी कि यह तस्वीर केवल एक फोटो नहीं रही, बल्कि राजनीतिक संदेश बन गई। जब 3 फरवरी को नई दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व ने युमनाम खेमचंद को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया, तो यही तस्वीर फिर से चर्चा में आ गई।

कुकी-जो समुदाय में स्वीकार्यता की वजह,मैतेई नेता, लेकिन अलग पहचान

मणिपुर की मौजूदा परिस्थितियों में युमनाम खेमचंद सिंह ऐसे इकलौते मैतेई नेता माने जाते हैं जिनकी कुकी-जो समुदाय के कुछ वर्गों में आज भी सीमित लेकिन महत्वपूर्ण स्वीकार्यता है। हालांकि, सैकड़ों लोगों की मौत और व्यापक हिंसा के बाद दोनों समुदायों के बीच भरोसा लगभग खत्म हो चुका है, फिर भी बीजेपी को लगा कि कम से कम विरोध खेमचंद के नाम पर ही होगा।

आरएसएस और बीजेपी दोनों के भरोसेमंद

पार्टी के अंदर भी खेमचंद सिंह को लेकर आम सहमति थी।

इसके पीछे दो बड़ी वजहें रहीं पहली यह कि कुकी समुदाय की ओर से उनके नाम पर अपेक्षाकृत कम विरोध था,दूसरा 

बीजेपी और आरएसएस दोनों में उनकी मजबूत पकड़ और भरोसा था। बीजेपी नेतृत्व यह भी जानता था कि करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन में रहे राज्य को अब राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है।

उखरूल दौरे से मिले नए नेतृत्व के संकेत,कुकी राहत शिविर में पहुंचना बना बड़ा संदेश

पिछले दिसंबर में नगा बहुल उखरूल जिले में कुकी जनजाति के राहत शिविर का दौरा खेमचंद सिंह के नए राजनीतिक रुख का संकेत माना गया।

उस दौरान बच्ची के साथ तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने लिखा था कि “शांतिपूर्ण और प्रगतिशील मणिपुर के लिए एकता जरूरी है। हमें हिंसा छोड़कर आपसी समझ, सम्मान और स्थायी विकास की ओर बढ़ना होगा।”यह बयान उनके नेतृत्व की समावेशी सोच को दर्शाता है।

कुकी इनपी की प्रतिक्रिया- समर्थन नहीं, लेकिन संवाद की उम्मीद …‘लिबरल नेता, लेकिन सवाल बाकी’

कुकी आदिवासी समुदाय की प्रमुख संस्था कुकी इनपी ने खेमचंद सिंह को अपेक्षाकृत लिबरल नेता तो माना, लेकिन उनके पिछले रुख पर सवाल भी उठाए। संस्था के प्रवक्ता लुन किपगेन ने कहा “अगर खेमचंद सिंह इतने ही लिबरल थे, तो जब बीरेन सिंह सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब ये लोग चुप क्यों थे?” उनका कहना है कि मुख्यमंत्री कोई भी बने, कुकी-जो समुदाय के लिए स्थिति में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

सरकार गठन पर भी उठे सवाल

कुकी इनपी के अनुसार, केंद्र सरकार ने दोनों समुदायों के बीच भरोसे की कमी दूर किए बिना ही सरकार बहाल कर दी। हालांकि, यह भी अहम है कि बीजेपी विधायक दल की बैठक में 7 कुकी-जो विधायकों में से 5 मौजूद थे, जिससे यह संकेत मिला कि संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं।

नई सरकार में संतुलन की कोशिश, दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, नई सरकार में कुकी और नगा समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार किया गया। शपथ ग्रहण समारोह में कांगपोकपी से विधायक नेमचा किपगेन ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुकी हैं।

विवादों से जुड़ा पारिवारिक पहलू

नेमचा किपगेन के पति थांगबोई किपगेन, कुकी नेशनल फ्रंट के चेयरमैन हैं। यह संगठन 2008 से केंद्र सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौते के तहत है। इस कारण उनकी नियुक्ति को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।

यह रहा राजनीतिक सफर- बीरेन सिंह के साथ हुई शुरुआत 2002 से शुरू हुआ सफर

युमनाम खेमचंद सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2002 में एन. बीरेन सिंह के साथ की थी। दोनों ने मिलकर डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी बनाई थी।

यह वह दौर था जब केंद्र सरकार ने NSCN-IM के साथ सीजफायर को आगे बढ़ाया, जिसके विरोध में मैतेई संगठनों ने आंदोलन किया था।

बीजेपी में एंट्री और सत्ता में भूमिका

2013 में खेमचंद सिंह बीजेपी में शामिल हुए। 2017 में सिंगजामेई सीट से विधायक बने और राज्य की पहली बीजेपी सरकार में विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए। 2022 में दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनी तो उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

पहले भी सीएम की दौड़ में थे शामिल

बीरेन सिंह और विश्वजीत सिंह के बीच सत्ता संघर्ष के दौरान भी खेमचंद का नाम मुख्यमंत्री के विकल्प के तौर पर सामने आया था। उस समय भी उनके आरएसएस से मजबूत संबंध बड़ी वजह माने गए थे। ऐसे में उम्मीदों और चुनौतियों के बीच नया अध्याय है। जहां एक ओर उनसे शांति, संवाद और स्थिरता की उम्मीद की जा रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य में गहरी सामाजिक दरार, अविश्वास और हिंसा की विरासत अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब यह आने वाला समय बताएगा कि क्या खेमचंद सिंह केवल एक राजनीतिक समझौते का चेहरा बनकर रहेंगे या सचमुच मणिपुर को शांति और विश्वास के रास्ते पर ले जा पाएंगे।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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