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एक और योजना का नाम बदलने की तैयारी में मोदी सरकार ,  बड़ी घोषणा जल्द संभव

MGNREGA
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 17, 2025 3:47 अपराह्न
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नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जल्द ही एक और  योजना का नाम बदलने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार 2005 में यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने जा रही है । हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि नाम परिवर्तन का उद्देश्य इस योजना को अधिक प्रभावी ब्रांडिंग देना और सरकार के ‘न्यू इंडिया’ विज़न के अनुरूप पहचान बनाना है। ऐसा माना जा रहा है कि पुराने नाम के कारण योजना की पहचान सीमित हो रही थी। नए नाम के साथ सरकार इसे अधिक व्यापक रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।

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 पूज्य बापू ग्रामीण योजना होगा नाम 

जानकारी के मुताबिक, मनरेगा का नया नाम “पूज्य बापू ग्रामीण योजना” हो सकता है। ये योजना दुनिया की सबसे बड़े काम की गारंटी देने वाले कार्यक्रमों में से एक है। 2005 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस योजना को शुरू किया था। पहले इसका नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, बाद में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA) कर दिया गया।नाम परिवर्तन का उद्देश्य महात्मा गांधी के आदर्शों से और अधिक गहराई से जोड़ना तथा ग्रामीण भारत में श्रम की गरिमा को नई पहचान देना है। 

पहले भी हो चुके है योजनाओं के नाम में बदलाव 

गौरतलब है कि पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने कई योजनाओं—जैसे स्वच्छ भारत मिशन, इंदिरा  आवास योजना,एकीकृत जलग्रहण विकास कार्यक्रम,  इत्यादि—को नए नाम और नई संरचना के साथ लागू किया है। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नाम बदलने से लाभार्थियों में जागरूकता बढ़ती है, लेकिन विपक्ष अक्सर इसे “पुरानी योजनाओं को रीब्रांड करना” करार देता है।

 हो सकते हैं बड़े बदलाव 

सूत्रों का कहना है कि नई पहचान मिलने के बाद इस योजना के दायरे और बजट में भी कुछ बदलाव संभव हैं साथ ही साथ रोजगार दिवसों को बढ़ाकर 125 दिन करने जैसी बात कही जा रही है ,मजदूरी दरों में भी वृद्धि हो सकती है, यदि यह सुधार व्यवहार में उतरे , तो ग्रामीण मजदूरों के लिए यह निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम होगा । 

बदलाव केवल बाहरी रूप तक सीमित न रह जाए 

प्रश्न यह उठता है कि क्या केवल नाम बदलने से योजना की जमीनी चुनौतियां समाप्त हो जाएंगी ?वर्षों से मनरेगा के भुगतान की देरी , अपर्याप्त कार्य उपलब्धता और प्रशासनिक बाधाएं बनी रहीं है । इन मुद्दों पर ठोस कार्यवाही के आभाव में नाम परिवर्तन केवल एक प्रतीकात्मक कदम भर रह सकता है । 

राजनीतिक और सामाजिक असर 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय देश में राजनीतिक बहस को और तेज करेगा , ग्रामीण मतदाताओं पर इसका प्रभाव योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा , यदि मजदूरी दरों में वृद्धि और काम बढ़ा तो सरकार के लिए इसका असर सकारात्मक हो सकता है । 

लॉक-डाउन में असरदार साबित हुई थी मनरेगा 

कोविड के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए सबसे बड़ा सहारा बना था , लाखों मजदूर जो शहरों से अपने गांवों की ओर लौटे थे इस योजना के तहत अपनी आजीविका चला सके , सरकार ने भी इस दौरान मनरेगा का बजट बढ़ाया और अतिरिक्त कार्यों को मंजूरी दी थी । 

विपक्ष का आरोप: नाम बदलो, काम नहीं 

इस फैसले की भनक लगते ही विपक्षी दलों ने तीखी प्रक्रिया देनी शुरू कर दी है , कांग्रेस समेत कई दलों ने आरोप लगाया कि सरकार नाम बदलने की राजनीति कर रही है , नाम बदलने का खेल  मजदूरी दर और काम देने जैसे असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कवायद है ।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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