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MP Two Child Policy Removed(मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला)-दो बच्चे की सीमा खत्म, लाखों कर्मचारियों को राहत

MP Two Child Policy Removed
नवजोत कौर सिद्धू
On: नवम्बर 28, 2025 2:35 अपराह्न
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मध्यप्रदेश में सत्ता संभालने के बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार लगातार नए फैसले लेकर अपनी प्रशासनिक सक्रियता और राजनीतिक साख दोनों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कई पुरानी योजनाओं की समीक्षा, कुछ योजनाओं का समापन और नई नीतियों की शुरुआत – इन कदमों ने सरकार को एक सक्रिय और निर्णयवादी छवि दी है, हालांकि साथ ही राज्य की बढ़ती वित्तीय देनदारियों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में अब सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है, जिसने लाखों कर्मचारियों को राहत की उम्मीद दे दी है।

24 साल पुराना नियम खत्म करने की तैयारी

राज्य सरकार ने साल 2001 में लागू दो बच्चे की सीमा को समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने संशोधन प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। जैसे ही कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, यह नियम तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएगा।

two kids riding with the mother

दो बच्चे की सीमा समाप्त होने से अब सरकारी कर्मचारी तीसरे या उससे अधिक बच्चों के जन्म पर नौकरी, पदोन्नति या नियुक्ति के खतरे से मुक्त हो जाएंगे। यह प्रतिबंध दो दशक से अधिक समय तक लागू रहा और कई कर्मचारियों को नियुक्ति या प्रमोशन में परेशानी भी उठानी पड़ी।

क्या यह विचारधारा का असर या राजनीतिक रणनीति?

इस निर्णय ने एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है कि क्या यह कदम केवल प्रशासनिक सुधार है या इसके पीछे व्यापक वैचारिक संकेत हैं।

पिछले वर्ष RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा था कि—

“हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए, अन्यथा समाज धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।”

Dr. Muhan Bhagabat

भागवत के इस बयान के बाद ही प्रदेश राजनीति में दो बच्चे की सीमा हटाने पर बहस तेज हुई थी। अब उसी चर्चा के लगभग एक वर्ष बाद सरकार का यह फैसला कई राजनीतिक संदेश भी देता दिख रहा है।

कुछ विश्लेषक इसे भाजपा सरकार का “परिवार विस्तार की स्वतंत्रता” के पक्ष में झुकाव मानते हैं, तो कुछ इसे सामाजिक-जनसांख्यिकीय संतुलन के संदर्भ में देख रहे हैं।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही हटा चुके हैं नियम

मध्यप्रदेश इस दिशा में कदम उठाने वाला पहला राज्य नहीं है। इसके पूर्व भी राजस्थान ने यह प्रतिबंध 2016 में, छत्तीसगढ़ ने 2017 में यह नियम पूरी तरह समाप्त कर दिया था।

उन राज्यों में तर्क दिया गया था कि दो बच्चे की सीमा का कठोर अनुपालन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के परिवार-कल्याण कार्यक्रमों में बाधा बन रहा था और कई मामलों में सामाजिक तनाव पैदा कर रहा था।

अब मध्यप्रदेश भी उन राज्यों की तर्ज पर अपनी नीति बदलने जा रहा है।

सरकार के लिए राहत या नया दबाव..?

फैसले के समर्थकों का तर्क है—

  • कर्मचारी अब मानसिक दवाब से मुक्त होंगे
  • परिवार नियोजन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है
  • यह नियम कई प्रतिभावान अभ्यर्थियों के लिए बाधा बन चुका था

वहीं आलोचकों का कहना है—

  • राज्य पहले से ही बढ़ते कर्ज और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है
  • जनसंख्या बढ़ने से भविष्य में सरकारी सेवाओं पर भार बढ़ेगा
  • नीति में बदलाव की टाइमिंग राजनीतिक संदिग्ध संदेश देती है।
  • हालाँकि सरकार का मानना है कि परिवार नियोजन को अब “नियम-आधारित नियंत्रण” की बजाय “स्वैच्छिक जागरूकता” पर आधारित होना चाहिए।

कर्मचारियों में राहत और उत्साह

जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, कर्मचारियों के बीच राहत और संतोष की लहर दौड़ गई। पिछले दो दशक से अधिक समय तक यह नियम नौकरी के दौरान एक स्थायी तनाव की तरह मौजूद रहा। अब लाखों कर्मचारियों के लिए यह स्थिति बदलने जा रही है।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा—

“कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह नियम समाप्त हो जाएगा। सरकार इसे प्रतिबंध नहीं बल्कि पुराने ढाँचे की समीक्षा मान रही है।”

जनसंख्या नीति पर नई बहस

इस निर्णय के बाद अब राज्य स्तर पर जनसंख्या नीति और परिवार कल्याण कार्यक्रमों पर नई बहस शुरू होना तय है।

  • क्या राज्य परिवार आकार पर हस्तक्षेप कम करके जिम्मेदार पेरेंटिंग पर अधिक बल देगा?
  • क्या ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन कार्यक्रमों का पुनर्गठन होगा?
  • क्या यह सरकार की दीर्घकालिक जनसंख्या-रणनीति का हिस्सा है?

इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ महीनों में स्पष्ट होंगे।

मध्यप्रदेश सरकार का दो बच्चे का नियम समाप्त करने का फैसला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक संकेत भी है।

जहाँ यह लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, वहीं इस कदम ने प्रदेश की जनसंख्या नीति, आर्थिक दबाव और राजनीतिक विचारधारा पर नई चर्चाओं के द्वार खोल दिए हैं।

कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह निर्णय राज्य में लागू हो जाएगा और 24 साल पुराना एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो जाएगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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