नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। इन नए नियमों का उद्देश्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (National Sports Bodies/NSBs) के कामकाज में सुधार लाना, खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुशासन (Good Governance) सुनिश्चित करना है।
खेल प्रशासन में सुधार की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों से खेल संघों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, पदाधिकारियों के लंबे कार्यकाल, हितों के टकराव, वित्तीय अनियमितताओं और खिलाड़ियों की सीमित भागीदारी जैसे मुद्दों पर सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी समय-समय पर खेल संघों में सुधार की जरूरत पर टिप्पणी की है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने व्यापक परामर्श के बाद यह नया नियम ढांचा तैयार किया है।
राष्ट्रीय खेल निकायों के लिए स्पष्ट ढांचा
नए नियमों के तहत राष्ट्रीय खेल निकायों की मान्यता, संरचना, कार्यप्रणाली और जवाबदेही को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। अब किसी भी खेल महासंघ को सरकार से मान्यता पाने और उसे बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
मान्यता प्राप्त निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका संविधान लोकतांत्रिक हो, चुनाव समयबद्ध तरीके से हों और सभी हितधारकों—विशेषकर खिलाड़ियों—की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
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कार्यकाल और आयु सीमा पर प्रावधान
नियम, 2026 में पदाधिकारियों के कार्यकाल और आयु सीमा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। किसी भी पदाधिकारी का कार्यकाल सीमित अवधि का होगा और लगातार लंबे समय तक पद पर बने रहने पर रोक लगेगी। इसके अलावा आयु सीमा तय कर दी गई है, ताकि खेल संघों में नई सोच और युवा नेतृत्व को अवसर मिल सके।
सरकार का मानना है कि इससे एक ही व्यक्ति या समूह के लंबे समय तक नियंत्रण की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
खिलाड़ियों की भागीदारी और अधिकार
इन नियमों की सबसे अहम विशेषताओं में से एक है खिलाड़ियों की भागीदारी को मजबूत करना। राष्ट्रीय खेल निकायों के निर्णय लेने वाले निकायों में खिलाड़ियों के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
इसके साथ ही खिलाड़ियों की शिकायतों के निवारण के लिए स्वतंत्र और प्रभावी तंत्र बनाने का भी प्रावधान है, ताकि चयन, प्रशिक्षण, सुविधाओं और अनुशासन से जुड़े मामलों में खिलाड़ियों को न्याय मिल सके।
वित्तीय पारदर्शिता और ऑडिट
नए नियमों में वित्तीय पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय खेल निकायों को अपने खातों का नियमित ऑडिट कराना होगा और वार्षिक वित्तीय विवरण सार्वजनिक करना होगा।
सरकारी अनुदान और प्रायोजन राशि के उपयोग पर निगरानी बढ़ाई जाएगी, जिससे धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और किसी भी तरह की अनियमितता पर समय रहते कार्रवाई हो।
नैतिकता, हितों का टकराव और अनुशासन
नियम, 2026 में नैतिकता संहिता (Code of Ethics) और हितों के टकराव (Conflict of Interest) से जुड़े प्रावधानों को भी सख्ती से लागू किया गया है।
किसी भी पदाधिकारी या सदस्य को ऐसी स्थिति में निर्णय लेने से अलग होना होगा, जहां उसका व्यक्तिगत या व्यावसायिक हित प्रभावित हो सकता है। इसके उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों से सामंजस्य
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए नियम अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और संबंधित अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के सुशासन मानकों के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय खेल संघ वैश्विक मंच पर विश्वसनीय और पेशेवर संस्थाओं के रूप में पहचाने जाएं।
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अनुपालन न करने पर कार्रवाई
यदि कोई राष्ट्रीय खेल निकाय इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो सरकार के पास उसकी मान्यता निलंबित या रद्द करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही सरकारी सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए नामांकन पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि यह प्रावधान दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक है, ताकि सभी निकाय समय रहते नियमों का पालन करें।
‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026’ भारतीय खेल व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखे जा रहे हैं। यदि इनका प्रभावी और निष्पक्ष तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो यह न केवल खेल संघों की कार्यशैली को बदलेगा, बल्कि खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनने की दिशा में भी मजबूत आधार प्रदान करेगा।







