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दुनिया को चौंकाने की तैयारी तो नहीं हो रही है, अमेरिका बनाने जा रहा नया ग्रुप, दुश्मनों के साथ बैठेंगे ट्रंप!

अमेरिका बनाने जा रहा नया ग्रुप
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 17, 2025 3:12 अपराह्न
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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर गठबंधनों के बदलते समीकरण दुनिया को नई दिशा देते हैं। लेकिन इस बार जो खबर अमेरिका से निकलकर सामने आ रही है, वह पूरी वैश्विक व्यवस्था को झकझोर देने की क्षमता रखती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसे नए ग्रुप की तैयारी में जुटे हुए दिख रहे हैं, जो न केवल पुराने वैश्विक ढांचे को चुनौती देगा बल्कि दुनिया के बड़े प्रतिद्वंद्वी देशों को एक ही टेबल पर बैठा सकता है। इस नए ग्रुप को लेकर वैश्विक मीडिया में चर्चा तेज है और इसे ट्रंप की “न्यू वर्ल्ड स्ट्रैटेजी” कहा जा रहा है।

अमेरिका बनाने जा रहा नया ग्रुप

नया ग्रुप: पारंपरिक गठबंधनों से बिल्कुल अलग सोच

अमेरिका जिस नए समूह की रणनीति पर काम कर रहा है, उसका मॉडल बिल्कुल अलग बताया जा रहा है। अब तक वैश्विक गठबंधन लोकतंत्र, आर्थिक सहयोग या सुरक्षा साझेदारी के आधार पर बनते रहे हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन जिस दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है, उसमें दुनिया की बड़ी शक्तियों को एक मंच पर लाने का प्रयास शामिल है, चाहे वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी ही क्यों न हों।सूत्रों के अनुसार यह नया ग्रुप अमेरिका, भारत, चीन, रूस और जापान जैसे देशों को एक साथ जोड़ सकता है। इसे फिलहाल अनौपचारिक रूप से “कोर-5” या C-5 कहा जा रहा है। यह विचार अपने आप में ही दुनिया को चौंकाने के लिए काफी है क्योंकि इसमें अमेरिका के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी—चीन और रूस—दोनों शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप का बदला हुआ कूटनीतिक दृष्टिकोण

ट्रंप की विदेश नीति हमेशा पारंपरिक अमेरिकी राजनीति से अलग रही है। वे साफ कह चुके हैं कि अमेरिका अब केवल पुराने गठबंधनों पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहेगा। उनकी रणनीति का मूल उद्देश्य यह है कि अमेरिका अपनी शर्तों पर एक नई वैश्विक शक्ति-संरचना खड़ी करे, जिसमें उसकी मध्यस्थता और नेतृत्व दोनों मजबूत रहें। इस नए ग्रुप की चर्चा इसलिए भी जोर पकड़ रही है क्योंकि ट्रंप ने पहले ही यूरोप और नाटो देशों से दूरी बनाने वाले कई बयान दिए हैं। वे मानते हैं कि पुरानी व्यवस्थाओं के सहारे दुनिया को संभालना अब संभव नहीं है। उनकी टीम अब ऐसे गठबंधन की तलाश में है जो भविष्य की वास्तविक शक्ति-समीकरण को दर्शाए, न कि 20वीं सदी वाले ढांचे को।

दुश्मनों को साथ बैठाने की रणनीति क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका अपने दुश्मन देशों—विशेषकर चीन और रूस—को एक ही मंच पर क्यों लाना चाहता है।

इसके पीछे कई भू-राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं।

पहला कारण यह है कि अमेरिका वैश्विक टकराव को कम करके सीधे बातचीत की राह खोलना चाहता है। खासकर रूस-यूक्रेन संघर्ष और चीन-ताइवान विवाद जैसी चुनौतियाँ अब दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं। इन मसलों पर किसी भी बड़े युद्ध को रोकने के लिए ऐसे मंच की जरूरत महसूस हो रही है जहाँ बड़े देश सीधे बातचीत कर सकें।दूसरा कारण यह है कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन और रूस मिलकर एक अलग ब्लॉक बना लें। दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं और यह अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। यदि ट्रंप उन्हें अपने ही बनाए समूह में शामिल कर लेते हैं, तो उनकी रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।तीसरा कारण यह है कि यह ग्रुप वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए एक नया नेतृत्व मॉडल तैयार कर सकता है, जिसमें मतभेद होने के बावजूद संवाद जारी रहे।

भारत और जापान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण

इस नए ग्रुप में भारत और जापान का शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती शक्तियों में से एक है। उसकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक स्थिति उसे वैश्विक मंच पर खास बनाती है।

भारत पश्चिम और पूर्व दोनों से संवाद रखने वाले देशों में सबसे संतुलित देश है। चीन और रूस के करीब भी है और अमेरिका के साथ भी मजबूत साझेदार है। ऐसे में भारत का C-5 में शामिल होना किसी भी विवाद की स्थिति में मध्यस्थता का संतुलन बना सकता है।जापान अमेरिका का विश्वसनीय साझेदार है और एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए यह नया समूह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बहुत सूझबूझ भरा कदम माना जा रहा है।

यूरोप और नाटो की चिंता बढ़ी

ट्रंप की यह योजना सामने आने के साथ ही यूरोप और नाटो देशों की चिंता काफी बढ़ गई है। दशकों से अमेरिका और यूरोपीय शक्तियाँ एक-दूसरे के सुरक्षा साथी रहे हैं। लेकिन यदि अमेरिका अपनी ऊर्जा इस नए ग्रुप में लगाने लगता है, तो नाटो को भारी नुकसान हो सकता है।

यूरोप पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीतिक दवाब झेल रहा है। ऐसे समय में अमेरिका का पुराने गठबंधनों से दूरी बनाना यूरोप को नई रणनीतिक चुनौतियों का सामना करा सकता है। कई यूरोपीय विश्लेषकों ने इस नई अमेरिकी नीति को “ग्लोबल बैलेंस का बड़ा खतरा” बताया है। उनका मानना है कि चीन और रूस को एक मंच पर बैठाना दुनिया में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।

ट्रंप दुश्मनों के साथ कब बैठेंगे?

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस नए समूह की पहली बैठक कब होगी। यह भी संभव है कि आने वाले महीनों में अमेरिका कुछ अनौपचारिक द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय वार्ताओं से इसकी शुरुआत करे। हालाँकि ट्रंप प्रशासन के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे 2026 से पहले इस ग्रुप का “पहला ड्राफ्ट” तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

सवाल यह भी है कि क्या चीन और रूस इस मंच पर बैठने के लिए तैयार होंगे। दोनों देश अपने-अपने हितों को लेकर बेहद सख्त रुख रखते हैं, और अमेरिकी प्रभुत्व वाली किसी भी व्यवस्था का हिस्सा बनने में उन्हें झिझक हो सकती है। लेकिन यह भी सच है कि भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में संवाद की जरूरत बढ़ती जा रही है।

इस ग्रुप से दुनिया में क्या बदलेगा?

यदि C-5 वास्तव में बनता है, तो यह दुनिया के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव होगा।

इसका असर इन बिंदुओं पर सबसे ज्यादा दिखाई देगा— पहला, वैश्विक निर्णय-निर्माण अब G7 या G20 जैसे मंचों तक सीमित नहीं रहेगा। दूसरा, दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच सीधे संवाद से युद्ध की आशंकाएँ कम हो सकती हैं।

तीसरा, नई आर्थिक व्यवस्थाएँ, व्यापारिक नियम और सुरक्षा ढांचे इसी ग्रुप के इर्द-गिर्द तैयार हो सकते हैं।

इसकी वजह यह है कि इन पाँच देशों में दुनिया की करीब आधी जनसंख्या, लगभग 60% आर्थिक शक्ति और सबसे मजबूत सैन्य क्षमता शामिल हो जाएगी।

 क्या दुनिया नए युग की ओर बढ़ रही है?

ट्रंप की यह योजना चाहे अभी शुरुआती चरण में हो, लेकिन इसमें दुनिया को एक नए युग में ले जाने की क्षमता है। यदि दुश्मन देश भी एक ही टेबल पर बैठते हैं, तो यह 21वीं सदी की सबसे साहसिक कूटनीतिक पहल होगी। हालाँकि यह विचार जोखिमों से भरा हुआ है—मतभेद बहुत गहरे हैं, विश्वास बहुत कमजोर है और वैश्विक राजनीति बेहद संवेदनशील दौर में है। फिर भी, ट्रंप जैसे नेता अक्सर असंभव को संभव बनाने के लिए जाने जाते हैं।

दुनिया को अब इंतजार है कि क्या आने वाले महीनों में यह नया ग्रुप वाकई आकार लेता है, या यह सिर्फ कूटनीतिक चर्चा तक सीमित रह जाएगा। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप की यह रणनीति वैश्विक राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर चुकी है—और शायद दुनिया वाकई किसी बड़ी चौंकाने वाली घटना के करीब खड़ी है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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