तमिलनाडु की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके इस त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया है। कई दिनों से चल रहे कयासों और राजनीतिक सस्पेंस पर इस फैसले के बाद पूरी तरह से विराम लग गया है।
अन्नामलाई के इस कदम को तमिलनाडु और दक्षिण भारत की राजनीति में भाजपा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अपने आक्रामक तेवरों और जमीन पर की गई कड़ी मेहनत के दम पर राज्य में भाजपा को स्थापित करने वाले चेहरे का अचानक इस तरह अलग होना कई नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
कैसे सामने आया पूरा घटनाक्रम?
यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ बल्कि पिछले कुछ दिनों से परदे के पीछे इसकी पटकथा लिखी जा रही थी। मंगलवार (2 जून 2026) को के. अन्नामलाई दिल्ली पहुंचे थे। वहां उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना 5 पन्नों का विस्तृत इस्तीफा सौंपा।
इसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश की। इसी सिलसिले में अन्नामलाई ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष के साथ लंबी बैठकें कीं। अमित शाह ने उन्हें केंद्रीय संगठन की ओर से हर संभव सहयोग और राज्य इकाई के नेताओं को स्पष्ट निर्देश देने का भरोसा भी दिलाया था।
पार्टी के भीतर यह उम्मीद जताई जा रही थी कि केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद अन्नामलाई शायद मान जाएंगे लेकिन वे अपने फैसले पर अड़े रहे। आखिरकार 5 जून 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके इस्तीफे को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया जिसके बाद दोनों के रास्ते पूरी तरह अलग हो गए।
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इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजहें
अन्नामलाई का भाजपा से अलग होना कई आंतरिक और बाहरी राजनीतिक कारणों का नतीजा माना जा रहा है
- गठबंधन को लेकर मतभेद-तमिलनाडु में साल 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ गठबंधन में एक जूनियर पार्टनर (छोटे भाई) की भूमिका निभाई थी। अन्नामलाई हमेशा से राज्य में स्वतंत्र रूप से पार्टी का विस्तार करने और द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में उभरने के पक्षधर थे।
- अध्यक्ष पद से हटाया जाना-साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर बढ़ने के बावजूद पार्टी राज्य में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। खुद अन्नामलाई कोयंबटूर सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को कमान सौंप दी थी। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ संबंधों को सुधारना था जिससे अन्नामलाई सहज महसूस नहीं कर रहे थे।
- विधानसभा चुनाव 2026 के निराशाजनक परिणाम-हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। पार्टी का वोट बैंक 2024 के 11.2 प्रतिशत से गिरकर महज 3 प्रतिशत के आसपास सिमट गया। सीटों के इस बंटवारे और चुनावी रणनीति से अन्नामलाई काफी नाखुश थे।
- अभिनेता विजय का राजनीतिक उदय-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में लोकप्रिय अभिनेता विजय के राजनीतिक उदय (तमिलगा वेत्री कड़गम पार्टी) के बाद राज्य का पूरा परिदृश्य बदल गया है। अन्नामलाई का मानना है कि अब पुरानी राजनीति और केवल भाषाई मुद्दों पर केंद्रित रहने का दौर खत्म हो चुका है इसलिए एक नए राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है।
’सुपर कॉप’ से लेकर ‘भाजपा के फायरब्रांड नेता’ तक का सफर
के. अन्नामलाई की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा पास की। साल 2011 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने पुलिस बल में अपनी पहचान बनाई। कर्नाटक में उन्हें ‘सिंघम’ और ‘सुपर कॉप’ जैसे नामों से जाना जाता था।
साल 2019 में उन्होंने जनता की सेवा और व्यवस्था में सुधार करने की इच्छा जताते हुए पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अगस्त 2020 में वे आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हुए। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए पार्टी ने महज एक साल के भीतर यानी 16 जुलाई 2021 को उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘द्रमुक फाइल्स’ (DMK Files) जारी कर सत्ताधारी दल डीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जिससे वे राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गए। उन्होंने ‘एन मण एन मक्कल’ (मेरी भूमि मेरे लोग) पदयात्रा के जरिए पूरे तमिलनाडु का दौरा किया और भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूती दी। उनके नेतृत्व में ही 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर करीब 11 प्रतिशत तक पहुंचा था जो पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
अब आगे क्या? अन्नामलाई की अगली रणनीति
भाजपा से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब सभी की निगाहें अन्नामलाई के अगले कदम पर टिकी हैं। चेन्नई की सड़कों पर उनके समर्थकों ने ‘हमारे नेता आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए’ जैसे नारों वाले पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं।
सूत्रों और राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अन्नामलाई तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक ‘आंदोलन’ (Movement) शुरू करने की तैयारी में हैं। इस आंदोलन को भविष्य में एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल का रूप दिया जा सकता है। उनका लक्ष्य राज्य के युवाओं और द्रविड़ राजनीति से इतर विकल्प तलाश रहे मतदाताओं को अपने पाले में लाना होगा।
निश्चित रूप से के. अन्नामलाई का भाजपा से जाना तमिलनाडु में भगवा दल के लिए एक बड़ा सेटबैक है जबकि राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में इससे एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में वे अपनी नई राजनीतिक पारी का ऐलान किस तरह करते हैं।







