नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच मैदान पर होने वाली जंग को लेकर सरकार ने एक बार फिर अपनी मंशा साफ कर दी है। केंद्र सरकार ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंधों को बहाल करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। यानी क्रिकेट हो या कोई और खेल, दोनों देशों के बीच अलग से कोई सीरीज नहीं खेली जाएगी। हालांकि, खेल मंत्रालय ने एक कूटनीतिक रास्ता खुला रखा है— ओलंपिक, वर्ल्ड कप और एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों टीमें पहले की तरह ही एक-दूसरे के सामने होंगी।सरकार का यह फैसला बताता है कि वह सीमा पार के तनाव को देखते हुए किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि खेल और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह खेल भावना और ओलंपिक चार्टर के नियमों का सम्मान करता रहेगा।
द्विपक्षीय सीरीज पर पाबंदी का मुख्य कारण
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा राजनीतिक तनाव और सीमा पार की परिस्थितियों को देखते हुए खेल मंत्रालय ने द्विपक्षीय संबंधों को बहाल न करने का निर्णय लिया है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि जब तक विश्वास का माहौल नहीं बनता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं दूर नहीं होतीं, तब तक भारतीय टीमें पाकिस्तान नहीं जाएंगी। साथ ही, पाकिस्तानी टीमों को भी भारत में अलग से किसी सीरीज या टूर्नामेंट के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, द्विपक्षीय सीरीज दो देशों के आपसी रिश्तों पर निर्भर करती है, जो फिलहाल सामान्य नहीं हैं।
also read :
- PCL 2026 रावलपिंडीज़ Vs इस्लामाबाद यूनाइटेड- सीरीज
- दक्षिण अफ्रीका VS न्यूजीलैंड – 5वें और अंतिम T20 मैच
- तीसरे महिला T20 मैच
बहुराष्ट्रीय आयोजनों में खेलने की रणनीति
द्विपक्षीय सीरीज पर रोक के बावजूद भारत विश्व कप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर पाकिस्तान के साथ खेलता रहेगा। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के कड़े नियम हैं। यदि भारत इन वैश्विक टूर्नामेंटों में किसी देश विशेष के खिलाफ खेलने से इनकार करता है, तो भारतीय खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लग सकता है या टीम को अंक गंवाने पड़ सकते हैं। सरकार का मानना है कि पाकिस्तान के कारण भारतीय खिलाड़ियों के हितों और उनकी कड़ी मेहनत को दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
भारत का वैश्विक मेजबानी का लक्ष्य
भारत सरकार आने वाले वर्षों में देश को दुनिया के बड़े खेल केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। भारत को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली है और साथ ही 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने के लिए भी पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति जैसी संस्थाओं की शर्त होती है कि मेजबान देश को सभी प्रतिभागी देशों को प्रवेश और सुरक्षा की गारंटी देनी होगी। ऐसे में भारत अपनी छवि एक ऐसे देश की नहीं बनाना चाहता जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करे। यही कारण है कि बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए पाकिस्तान को छूट दी गई है।
क्रिकेट संबंधों पर सबसे गहरा असर
भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंधों की बात होते ही सबसे पहले क्रिकेट का जिक्र आता है। साल 2012 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई भी द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं हुई है। वर्तमान में दोनों टीमें केवल आईसीसी और एशियाई क्रिकेट परिषद के टूर्नामेंटों में ही आमने-सामने आती हैं। हालांकि भारत-पाकिस्तान के मुकाबले पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं और इनसे करोड़ों का राजस्व भी प्राप्त होता है, लेकिन सरकार ने सुरक्षा और जनभावनाओं को आर्थिक मुनाफे से ऊपर रखा है। हालिया रुख से यह साफ है कि क्रिकेट फैंस को अभी लंबे समय तक दोनों देशों के बीच किसी टेस्ट या वनडे सीरीज की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
विदेशी खिलाड़ियों के लिए वीजा और सुरक्षा
सरकार ने भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए संकेत दिए हैं कि भारत आने वाले विदेशी खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों को वीजा प्रक्रिया में पूरी सहूलियत दी जाएगी। खेल मंत्रालय चाहता है कि भारत को एक आधुनिक और सुरक्षित मेजबान देश के रूप में पहचाना जाए। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ तालमेल बढ़ाने और खेल के बुनियादी ढांचे को विश्व स्तरीय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि जब भारत किसी बड़े आयोजन की मेजबानी करे, तो दुनिया का कोई भी देश सुरक्षा या लॉजिस्टिक्स को लेकर सवाल न उठा सके।
कूटनीति और खेल का भविष्य
सरकार के इस ताजा फैसले पर खेल जगत और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ जानकारों का मानना है कि यह नीति व्यावहारिक है, क्योंकि इससे भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को भी दुनिया के सामने रख रहा है और वैश्विक नियमों का पालन भी कर रहा है। वहीं, कुछ लोग इसे खेलों के जरिए रिश्तों को सुधारने का एक खोया हुआ अवसर मान रहे हैं। हालांकि, सरकारी रुख से यह संदेश साफ है कि फिलहाल प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा है। निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी निजी सीरीज की गुंजाइश न के बराबर है।







