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अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब नहीं लगेगा प्रीमियम टोल 15 फरवरी 2026 से लागू होगा नया नियम सामान्य हाईवे के बराबर ही देना होगा शुल्क

अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब नहीं लगेगा प्रीमियम टोल 15 फरवरी 2026 से लागू होगा नया नियम
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 13, 2026 2:23 अपराह्न
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डेलीबार्ता,एनएच न्यूज-अगर आप अक्सर एक्सप्रेसवे से सफर करते हैं, तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है। केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी अधूरे एक्सप्रेसवे के खुले हिस्से पर प्रीमियम टोल नहीं वसूला जाएगा। यानी जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक छोर से दूसरे छोर तक चालू नहीं हो जाता, तब तक वहां सामान्य नेशनल हाईवे की दरों के बराबर ही टोल लिया जाएगा।

यह संशोधन 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा और इसका लाभ देशभर के लाखों वाहन चालकों को मिलेगा, जो निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के आंशिक हिस्सों का उपयोग करते हैं।

क्या था पहले का नियम?

अधूरे हिस्से पर भी वसूली जाती थी 25% तक अधिक दर अब तक व्यवस्था यह थी कि एक्सप्रेसवे पर सफर करने के लिए सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत तक अधिक टोल देना पड़ता था। नियमों के अनुसार एक्सप्रेसवे को बेहतर और तेज रफ्तार मार्ग माना जाता है, इसलिए उसकी टोल दरें भी प्रीमियम श्रेणी में रखी गई थीं।

लेकिन व्यवहार में कई बार ऐसा होता था कि एक्सप्रेसवे का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही चालू होता था, जबकि पूरा प्रोजेक्ट अभी निर्माणाधीन रहता था। इसके बावजूद वाहन चालकों से पूरे एक्सप्रेसवे की प्रीमियम दरों के हिसाब से टोल वसूला जाता था। सरकार ने इसे एक प्रकार की व्यावहारिक विसंगति माना और अब इसमें सुधार किया गया है।

किस नियम में हुआ बदलाव?..2008 के टोल नियमों में किया गया संशोधन

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने “नेशनल हाईवे फीस (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008” में संशोधन किया है। इस संशोधन का उद्देश्य टोल वसूली को ज्यादा पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है।

नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई एक्सप्रेसवे ‘एंड-टू-एंड’ यानी पूरी तरह से एक छोर से दूसरे छोर तक चालू नहीं हुआ है, तो उसके चालू हिस्से पर सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की दरों से ही टोल वसूला जाएगा। इसका मतलब साफ है अधूरे प्रोजेक्ट पर पूरा प्रीमियम नहीं।

कितने समय तक मिलेगी राहत?…अधिकतम एक वर्ष या पूर्ण संचालन तक

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह रियायती व्यवस्था स्थायी नहीं होगी। यह तब तक लागू रहेगी जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह से चालू नहीं हो जाता।

हालांकि इसके लिए अधिकतम एक वर्ष की समय सीमा तय की गई है। यानी यदि एक्सप्रेसवे एक साल के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो उसी दिन से प्रीमियम टोल लागू हो जाएगा।

यदि एक साल तक भी प्रोजेक्ट अधूरा रहता है, तो यह विशेष राहत अधिकतम एक वर्ष तक ही लागू रहेगी। इन दोनों में जो भी स्थिति पहले आएगी, उसी के अनुसार प्रीमियम दरें लागू होंगी।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? 

यातायात प्रबंधन और जनता को राहत, दोनों उद्देश्य, इस फैसले के पीछे सरकार के कई व्यावहारिक कारण हैं।

  • पहला, यात्रियों को अधूरी सुविधाओं के बदले पूरा शुल्क देना न्यायसंगत नहीं माना गया। जब सड़क पूरी तरह विकसित, चौड़ी और निर्बाध नहीं है, तो प्रीमियम टोल वसूलना तर्कसंगत नहीं ठहरता।
  • दूसरा, महंगे टोल के कारण कई वाहन चालक निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने नेशनल हाईवे का उपयोग करना पसंद करते थे। इससे पुराने मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता था, ट्रैफिक जाम की समस्या खड़ी होती थी और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती थी।
  • तीसरा, नए मार्गों के उपयोग को बढ़ावा देना भी सरकार का उद्देश्य है। कम टोल होने से लोग नए और आधुनिक मार्गों को अपनाएंगे, जिससे यातायात का बेहतर वितरण संभव होगा।

ट्रैफिक और पर्यावरण पर क्या होगा असर?

कम भीड़, कम ईंधन खपत, कम प्रदूषण| जब वाहन चालक नए खुले हिस्सों का अधिक उपयोग करेंगे, तो पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

इससे-

  • ट्रैफिक जाम की समस्या घटेगी
  • यात्रा समय कम होगा
  • ईंधन की बचत होगी
  • वाहनों के रुक-रुककर चलने की स्थिति कम होगी
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी

इस प्रकार यह निर्णय न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक परिणाम ला सकता है।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?…फास्टैग से कटेगी कम राशि

15 फरवरी 2026 के बाद जब भी कोई वाहन चालक किसी निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के चालू हिस्से से गुजरेगा, तो उसके फास्टैग (FASTag) से कटने वाली राशि सामान्य नेशनल हाईवे के बराबर होगी।

यह बदलाव पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के जरिए लागू किया जाएगा, इसलिए वाहन चालकों को अलग से कोई आवेदन या प्रक्रिया नहीं करनी होगी। टोल प्लाजा पर स्वचालित रूप से नई दरें लागू होंगी।

जो लोग नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं, खासकर बड़े एक्सप्रेसवे के छोटे-छोटे हिस्सों का उपयोग करते हैं, उन्हें प्रतिदिन या मासिक आधार पर अच्छी-खासी बचत हो सकती है।

किन मार्गों पर मिल सकता है लाभ?

देश में कई बड़े एक्सप्रेसवे परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से खोली जाती हैं। ऐसे में जब पूरा मार्ग तैयार नहीं होता, तब केवल कुछ हिस्से ही आम जनता के लिए खोले जाते हैं।

ऐसी स्थिति में इस नए नियम का लाभ उन सभी मार्गों पर मिलेगा जो अभी पूर्ण रूप से संचालित नहीं हुए हैं।

विशेष रूप से लंबी दूरी वाले एक्सप्रेसवे, जिनका निर्माण कई चरणों में हो रहा है, वहां यात्रियों को इस राहत का सीधा फायदा मिलेगा।

पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का यह निर्णय टोल वसूली प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि जब सुविधाएं अधूरी हों तो प्रीमियम शुल्क क्यों लिया जाए।

अब नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि यात्रियों से वही शुल्क लिया जाए जो उपलब्ध सुविधाओं के अनुपात में उचित हो। यह कदम नीति निर्माण में व्यावहारिकता और नागरिक हितों को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।

आर्थिक दृष्टि से क्या मायने?

टोल में थोड़ी सी कटौती भी बड़े स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। रोजाना हजारों वाहन एक्सप्रेसवे से गुजरते हैं। यदि प्रत्येक वाहन से 20 से 50 रुपये तक कम वसूले जाते हैं, तो यह राशि यात्रियों के लिए उल्लेखनीय बचत बन सकती है।

लंबी दूरी के ट्रक और व्यावसायिक वाहन संचालकों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिससे परिवहन लागत में कमी आ सकती है। अप्रत्यक्ष रूप से इसका असर वस्तुओं की ढुलाई लागत पर भी पड़ सकता है।

भविष्य में क्या रहेगा फोकस?

सरकार का स्पष्ट संकेत है कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू होते ही प्रीमियम दरें फिर से लागू कर दी जाएंगी। यानी यह स्थायी रियायत नहीं है, बल्कि निर्माण अवधि के लिए अस्थायी राहत है।

आने वाले समय में यदि परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो यात्रियों को पूरी सुविधाओं के साथ प्रीमियम दरें देनी होंगी। लेकिन जब तक काम अधूरा है, तब तक अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

अधूरे एक्सप्रेसवे पर प्रीमियम टोल खत्म करने का फैसला आम यात्रियों के हित में उठाया गया एक व्यावहारिक और राहतभरा कदम है। 15 फरवरी 2026 से लागू होने वाला यह नियम टोल वसूली प्रणाली को अधिक संतुलित और न्यायसंगत बनाएगा।

इससे जहां एक ओर वाहन चालकों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर यातायात प्रबंधन, ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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