मेलबर्न। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 के तीसरे दौर में दुनिया के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच एक बड़े विवाद का हिस्सा बनते-बनते रह गए। मैच के दौरान गुस्से में कोर्ट की ओर तेज़ी से फेंकी गई गेंद एक बॉल-गर्ल के बेहद करीब से निकल गई। यदि गेंद उसे लग जाती तो जोकोविच को टूर्नामेंट से तत्काल बाहर किया जा सकता था। हालांकि सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ और अंपायरों ने उन्हें चेतावनी तक नहीं दी।
इस घटना के बावजूद जोकोविच ने डच खिलाड़ी बोटिक वान डे जैंडशुल्प को सीधे सेटों में 6-3, 6-4, 7-6 से हराकर अगले दौर में प्रवेश कर लिया। यह जीत उनके करियर के लिए भी ऐतिहासिक रही क्योंकि उन्होंने ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों में 400 मैच जीतने का अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया।
मैच के दौरान क्या हुआ था
घटना मैच के दूसरे सेट के दौरान घटी, जब एक लंबी रैली के बाद जोकोविच ने एक आसान अंक गंवा दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने गेंद को पूरी ताकत से कोर्ट के बाहर की ओर मार दिया। गेंद इतनी तेज थी कि वह कोर्ट के पास खड़ी एक बॉल-गर्ल के चेहरे के पास से गुजर गई।
स्टेडियम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। दर्शकों को तुरंत 2020 के यूएस ओपन की याद आ गई, जब इसी तरह की हरकत के कारण जोकोविच को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था। हालांकि इस बार गेंद किसी को लगी नहीं, इसलिए अंपायरों ने उन्हें कोई सज़ा नहीं दी।
टेनिस नियमों के मुताबिक यदि कोई खिलाड़ी गुस्से में गेंद मारकर किसी अधिकारी या बॉल-गर्ल को चोट पहुंचाता है तो उसे सीधे तौर पर अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यही वजह है कि यह घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है।
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पुरानी घटना की याद दिलाता विवाद
जोकोविच का यह व्यवहार कोई नया नहीं है। वर्ष 2020 के यूएस ओपन में उन्होंने निराशा में गेंद पीछे की ओर मारी थी, जो सीधे एक लाइन जज की गर्दन पर जा लगी थी। उस समय उन्हें तुरंत टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था, जबकि वे खिताब के प्रबल दावेदार थे।
उस घटना ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी थी कि चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियम सबके लिए समान हैं। अब ऑस्ट्रेलियन ओपन में हुई यह ताज़ा घटना फिर से वही सवाल खड़े कर रही है।
मैच के बाद जोकोविच की प्रतिक्रिया
मैच समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोकोविच ने अपने व्यवहार पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा,
“मैं उस पल खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाया। यह बिल्कुल जरूरी नहीं था। मैं खुश हूं कि किसी को चोट नहीं लगी।”
एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि वे अपने युवा रूप को क्या सलाह देना चाहेंगे, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा,
“मैं खुद से कहूंगा – शांत रहो, मूर्ख।”
उनका कहना था कि वर्षों के अनुभव के बाद उन्होंने समझा है कि बड़े मुकाबलों में मानसिक संतुलन सबसे अहम होता है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे गुस्से और दबाव को संभालना सीखें।
टेनिस जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस घटना पर खेल जगत से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च दबाव वाले मुकाबलों में भावनाएं भड़कना स्वाभाविक है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ी से इस तरह की गलती की उम्मीद नहीं की जाती।
पूर्व खिलाड़ियों और कमेंटेटरों ने कहा कि जोकोविच जैसे महान खिलाड़ी को दूसरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि चूंकि कोई घायल नहीं हुआ, इसलिए इस बात को ज़्यादा तूल नहीं देना चाहिए।
हालांकि अधिकांश विश्लेषकों की राय है कि जोकोविच को इस तरह के व्यवहार से बचना चाहिए, क्योंकि पहले भी वे इसी वजह से भारी कीमत चुका चुके हैं।
इतिहास रचने वाली जीत पर भी पड़ा विवाद का साया
इस मुकाबले में जीत के साथ जोकोविच ने ग्रैंड स्लैम इतिहास में 400 मैच जीतने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि उन्हें रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों से भी आगे ले जाती है।
ऑस्ट्रेलियन ओपन में यह उनकी 102वीं जीत थी, जिससे वे टूर्नामेंट के सबसे सफल खिलाड़ियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर चुके हैं।लेकिन दुर्भाग्यवश इस ऐतिहासिक पल पर चर्चा उनकी शानदार जीत से ज्यादा इस विवाद को लेकर हो रही है।
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प्री- क्वार्टर फाइनल में पहुंचे जोकोविच
जोकोविच अब टूर्नामेंट के प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं और उनकी निगाहें अपने 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब पर टिकी हैं। यदि वे यह ट्रॉफी जीतते हैं तो वे टेनिस इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ी बन जाएंगे।
हालांकि इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि तकनीकी कौशल के साथ-साथ मानसिक अनुशासन भी उतना ही जरूरी है। बड़े टूर्नामेंटों में छोटी-सी चूक भी खिलाड़ी के वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकती है।







