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कर्नाटक में खत्म हुआ ‘अर्दली सिस्टम’ अब सीनियर अफसरों की निजी सेवा नहीं करेंगे पुलिस कॉन्स्टेबल

कर्नाटक में खत्म हुआ ‘अर्दली सिस्टम’ अब सीनियर अफसरों की निजी सेवा नहीं करेंगे पुलिस कॉन्स्टेबल
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 6, 2026 11:56 पूर्वाह्न
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डेलीबार्ता।

कर्नाटक पुलिस विभाग में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) एम ए सलीम ने अंग्रेजों के समय से चली आ रही ‘अर्दली सिस्टम’ को खत्म करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद अब पुलिस कांस्टेबलों को वरिष्ठ अधिकारियों के घरों में निजी काम करने के लिए नहीं लगाया जाएगा।

लंबे समय से यह व्यवस्था चल रही थी कि पुलिस कांस्टेबलों को सीनियर अफसरों के घरों पर तैनात कर दिया जाता था, जहां उनसे खाना बनाने, घर की सफाई करने, बच्चों को स्कूल छोड़ने और घरेलू कामकाज कराने जैसे निजी कार्य करवाए जाते थे। इस व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं कि पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल उनके मूल काम के बजाय निजी सेवाओं के लिए किया जा रहा है। डीजीपी एम ए सलीम के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था में बड़े सुधार और पुलिसकर्मियों की गरिमा से जुड़ा कदम माना जा रहा है।

अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था थी ‘अर्दली सिस्टम’

दरअसल, अर्दली सिस्टम की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कुछ कर्मचारियों को निजी सेवक के तौर पर तैनात किया जाता था। स्वतंत्रता के बाद भी कई विभागों में यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही।

पुलिस विभाग में भी कई जगह यह परंपरा बनी रही, जहां कांस्टेबलों को अधिकारियों के घरों में निजी सहायक की तरह रखा जाता था। वे सुरक्षा ड्यूटी के अलावा घरेलू कामों में भी लगे रहते थे।

समय-समय पर इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग उठती रही, क्योंकि इससे पुलिसकर्मियों की पेशेवर भूमिका प्रभावित होती थी और उनकी कार्यक्षमता भी कम हो जाती थी।

अब कांस्टेबल करेंगे असली पुलिसिंग ड्यूटी

डीजीपी के इस नए आदेश के बाद अब उन पुलिस कांस्टेबलों को वापस पुलिस विभाग की कोर पुलिसिंग ड्यूटी में लगाया जाएगा, जो अब तक अर्दली के रूप में तैनात थे।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाना और उपलब्ध मानव संसाधनों का सही उपयोग करना है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जब हजारों पुलिसकर्मी घरेलू कामों में लगे रहते हैं तो इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बल की उपलब्धता कम हो जाती है। अब इन पुलिसकर्मियों को थानों, जांच कार्यों, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जा सकेगा।

373 अर्दली पद बनाने का प्रस्ताव

नई व्यवस्था लागू करने के लिए पुलिस विभाग ने सरकार को 373 अर्दली पद बनाने का प्रस्ताव भेजा है। इन पदों पर नियुक्त कर्मचारी पुलिस बल के नियमित सदस्य नहीं होंगे, बल्कि वे सिर्फ सहायक कर्मचारियों के रूप में काम करेंगे। इससे पुलिसकर्मियों को घरेलू कामों में लगाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

इस संबंध में विभाग ने आधिकारिक पत्राचार के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भेजा है, ताकि अर्दली व्यवस्था को नई संरचना के साथ लागू किया जा सके।

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3,320 पुलिसकर्मी होंगे मुक्त

नए आदेश के तहत वर्तमान में अर्दली के तौर पर काम कर रहे करीब 3,320 पुलिस कर्मचारियों को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाएगा।

इन सभी कर्मचारियों को वापस पुलिसिंग ड्यूटी में लगाया जाएगा। इससे पुलिस विभाग को बड़ी संख्या में अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

रीस्ट्रक्चरिंग में 2,447 पद शामिल

पुलिस विभाग की इस नई व्यवस्था में कुल 2,447 पदों को शामिल किया गया है। इसमें पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ पदों के अधिकारी शामिल हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-

  • डायरेक्टर जनरल और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस
  • डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस
  • एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADGP)
  • इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP)
  • डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG)
  • सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP)
  • कमांडेंट
  • असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP)
  • डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP)
  • पुलिस इंस्पेक्टर

इन सभी रैंक के अधिकारियों को पहले अर्दली के रूप में पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए जाते थे।

अब अधिकारियों को मिलेगा मासिक अलाउंस

नई व्यवस्था के तहत अर्दली की जगह अब अधिकारियों को उनके पद के अनुसार मासिक अलाउंस दिया जाएगा। इस अलाउंस का उद्देश्य यह है कि अधिकारी यदि चाहें तो निजी स्तर पर सहायक कर्मचारी रख सकें।

प्रस्तावित अलाउंस संरचना इस प्रकार है-

  • डीजी रैंक के अधिकारी: 8,000 रुपये प्रति माह
  • एडीजीपी: 6,000 रुपये प्रति माह
  • आईजीपी: 5,000 रुपये प्रति माह
  • डीआईजी / एसपी / कमांडेंट: 3,000 रुपये प्रति माह
  • एएसपी / DySP / असिस्टेंट कमांडेंट / पुलिस इंस्पेक्टर: 2,000 रुपये प्रति माह

इस व्यवस्था के तहत अधिकारियों को दोहरा लाभ नहीं मिलेगा। यानी यदि किसी अधिकारी को सरकारी नियमों के अनुसार पहले से कुक, अटेंडेंट या ड्राइवर की सुविधा मिल रही है, तो उसके साथ अतिरिक्त अलाउंस नहीं दिया जाएगा।

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सीमित स्टाफ सपोर्ट की रहेगी व्यवस्था

हालांकि नई व्यवस्था में अर्दली सिस्टम खत्म कर दिया गया है, लेकिन कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मौजूदा नियमों के तहत सीमित स्टाफ सपोर्ट दिया जा सकता है। इनमें कुक, अटेंडेंट या ड्राइवर जैसे कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। लेकिन यह सुविधा सिर्फ आधिकारिक जरूरतों तक सीमित रहेगी और इसका दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।

पुलिस सुधार की दिशा में बड़ा कदम

कर्नाटक सरकार और पुलिस विभाग के इस फैसले को पुलिस सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पुलिस बल की पेशेवर क्षमता बढ़ेगी और हजारों पुलिसकर्मियों को उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों में लगाया जा सकेगा।

इसके साथ ही यह निर्णय पुलिसकर्मियों के सम्मान और कार्य संस्कृति को भी मजबूत करेगा।

अन्य राज्यों के लिए भी बन सकता है उदाहरण

कर्नाटक में अर्दली सिस्टम खत्म करने का यह फैसला देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

कई राज्यों में अभी भी पुलिसकर्मियों को वरिष्ठ अधिकारियों के निजी कामों में लगाया जाता है। ऐसे में कर्नाटक का यह कदम प्रशासनिक सुधार और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

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Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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