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राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ आज से शुरू हुआ संसद का बजट सत्र जानिये पूरी जानकारी

राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ आज से शुरू हुआ संसद का बजट सत्र जानिये पूरी जानकारी
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 28, 2026 1:43 अपराह्न
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डेलीबार्ता,नई दिल्ली।संसद का बजट सत्र आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। यह सत्र राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान 1 फरवरी को केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेगी। बजट सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी विषयों पर चर्चा संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही होगी।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई सत्र की शुरुआत

परंपरा के अनुसार संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार के एजेंडे और प्राथमिकताओं को संसद और देश के सामने रखने का एक संवैधानिक माध्यम होता है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद दोनों सदनों में इस पर धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाएगा, जिस पर विस्तृत चर्चा होगी। इस दौरान विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और आलोचना करने का अवसर मिलता है, जबकि सरकार अपने फैसलों और योजनाओं का बचाव करती है।

1 फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट

बजट सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 1 फरवरी को आएगा, जब केंद्रीय वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट संसद में पेश करेंगे। यह बजट न केवल देश की आर्थिक दिशा तय करेगा, बल्कि आम जनता, उद्योग जगत, किसानों, कर्मचारियों और मध्यम वर्ग की उम्मीदों से भी जुड़ा होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बजट में सरकार का फोकस आर्थिक विकास को गति देने, रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर हो सकता है। इसके साथ ही सामाजिक कल्याण योजनाओं और राज्यों को मिलने वाले वित्तीय आवंटन पर भी सबकी नजरें रहेंगी।

बजट सत्र का पहला हिस्सा: वित्तीय कामकाज पर जोर

बजट सत्र का पहला हिस्सा मुख्य रूप से वित्तीय कार्यों के लिए समर्पित रहेगा। इसमें आम बजट, रेल बजट (यदि अलग से प्रस्तुत किया गया), आर्थिक सर्वेक्षण और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शामिल है।

सरकार के अनुसार, इस चरण में बजट से जुड़े जरूरी वित्तीय प्रस्तावों को पारित कराने पर प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं विपक्ष इन चर्चाओं के दौरान सरकार की आर्थिक नीतियों, टैक्स व्यवस्था, सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं पर सवाल उठा सकता है।

कब तक चलेगा बजट सत्र?

संसदीय कार्य मंत्रालय के मुताबिक, यह बजट सत्र कुल 65 दिनों की अवधि में लगभग 30 बैठकों तक चलेगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा। सत्र के दौरान 13 फरवरी को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा।

इसके बाद 9 मार्च से संसद का दूसरा चरण शुरू होगा। इस अंतराल में संसद की विभिन्न स्थायी समितियां अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों (डिमांड्स फॉर ग्रांट्स) की गहन जांच करेंगी। इन समितियों की रिपोर्ट के आधार पर संसद में आगे की चर्चा और मंजूरी दी जाएगी।

आर्थिक सर्वेक्षण: अर्थव्यवस्था की सेहत का आईना

बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण का प्रस्तुत किया जाना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह दस्तावेज वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया जाता है और इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में अंतिम रूप दिया जाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (अप्रैल से मार्च) के दौरान देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, निर्यात-आयात और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों की जानकारी देता है। इसके साथ ही यह आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक आउटलुक भी पेश करता है, जिससे बजट की दिशा और प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की मांगें

बजट सत्र से पहले सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसका उद्देश्य संसद के दोनों सदनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना था। इस बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की, ताकि सत्र बिना बाधा के चल सके। हालांकि विपक्षी दलों ने बैठक के दौरान कई मुद्दों को उठाया। विपक्ष ने ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे विषयों पर संसद में चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना था कि ये मुद्दे लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन पर विस्तृत बहस जरूरी है।

सरकार ने क्यों खारिज की कुछ मांगें?

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि कुछ मुद्दों पर चर्चा के लिए तय प्रक्रियाएं और सीमाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ एक बार कानून बन चुका है, और अब उसका पालन करना संवैधानिक दायित्व है।

रिजिजू ने कहा, “एक बार जब कोई कानून देश के सामने आ जाता है, तो हमें उसका पालन करना होता है। हम रिवर्स गियर में वापस नहीं जा सकते।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए कई मुद्दों पर राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट पर चर्चा के दौरान बात की जा सकती है।

कांग्रेस और वाम दलों का सरकार पर हमला

कांग्रेस पार्टी ने बजट सत्र को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने कहा है कि वह विदेश नीति, अमेरिकी टैरिफ, रुपये में गिरावट, मनरेगा और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार अक्सर आखिरी समय में बिना पूर्व सूचना के बिल पेश कर देती है, जिससे विपक्ष को उन पर चर्चा करने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

वहीं सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार “सस्पेंस और स्टन” की रणनीति अपना रही है। उनके अनुसार, इससे संसद में सार्थक बहस प्रभावित होती है।

विधायी एजेंडा को लेकर विवाद

कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी शिकायत की कि सरकार ने बजट सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा पहले से साझा नहीं किया। इस पर किरेन रिजिजू ने कहा कि यह साल का पहला सत्र है और आमतौर पर सरकारी कामकाज की सूची राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद साझा की जाती है।

उन्होंने कहा कि वह इस सूची को साझा करने के लिए तैयार हैं और अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। रिजिजू के मुताबिक, यह कोई बड़ा विवाद का विषय नहीं है और सभी दलों को सदन के सुचारू संचालन पर ध्यान देना चाहिए।

दूसरे हिस्से में होंगे अहम विधायी काम

बजट सत्र के दूसरे हिस्से में सरकार कई अहम विधायी और नीतिगत कार्यों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयक, संशोधन और नीतिगत प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।

सरकार का कहना है कि वह संसद के समय का अधिकतम उपयोग करना चाहती है, ताकि जरूरी कानूनों को पारित किया जा सके। वहीं विपक्ष का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार चर्चा के लिए कितना अवसर देती है।

बजट सत्र से जुड़ी देश की उम्मीदें

बजट सत्र सिर्फ सांसदों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अहम होता है। किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी और उद्योग जगत सभी को बजट से उम्मीदें होती हैं। महंगाई, रोजगार, टैक्स राहत, कृषि समर्थन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे आम जनता के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। हालांकि यह भी उम्मीद की जा रही है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए संसद में सार्थक और तथ्यपरक चर्चा होगी।

आर्थिक और जाननीतिक दिशा तय करनें वाला साबित हो सकता है बजट सत्र 

कुल मिलाकर संसद का बजट सत्र 2026 देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू हुआ यह सत्र बजट, आर्थिक सर्वेक्षण और अहम विधायी कार्यों के कारण चर्चा के केंद्र में रहेगा। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, वहीं सरकार विकास और स्थिरता के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली बहसें यह तय करेंगी कि बजट सत्र किस दिशा में आगे बढ़ता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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