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President Draupadi Murmu’s meteoric flight- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज LCH प्रचंड में भरी उड़ान बनी देश की बतौर को-पायलट उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज LCH प्रचंड में भरी उड़ान बनी देश की बतौर को-पायलट उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 27, 2026 6:49 अपराह्न
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यह एक ऐतिहासिक क्षण है जब भारत की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने जैसलमेर में स्वदेशी शक्ति (indigenous power) का अनुभव किया। 

भारतीय शौर्य का नया अध्याय – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रचंड उड़ान

27 फरवरी 2026 को भारतीय रक्षा इतिहास में एक सुनहरा पन्ना (golden emerald) तब जुड़ा जब देश की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर (supreme commander) द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान के जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन (Jaisalmer Air Force Station) से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) प्रचंड  में उड़ान भरी। इस उड़ान के साथ ही वे प्रचंड हेलिकॉप्टर (fierce helicopter) में बतौर को-पायलट उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति (first female president) बन गई हैं।

यह केवल एक प्रतीकात्मक उड़ान नहीं थी बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती स्वदेशी ताकत का एक वैश्विक संदेश भी था।

  • स्थान – जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन (Jaisalmer Air Force Station)
  • विमान –  LCH प्रचंड  (स्वदेशी निर्मित)।
  • उपलब्धि –  प्रचंड (prachand) में उड़ान भरने वाली पहली महिला राष्ट्रपति।
  • संदेश – रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (self-reliance) और महिला सशक्तिकरण।

उड़ान का विवरण और ऐतिहासिक महत्व

राष्ट्रपति मुर्मू ने जैसलमेर के रेतीले धोरों के ऊपर लगभग 20 से 25 मिनट तक उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने हेलिकॉप्टर की युद्धक क्षमताओं (combat capabilities), उसकी फुर्ती (maneuverability) और अत्याधुनिक एवियोनिक्स की बारीकी से निरीक्षण किया।

  • को-पायलट की भूमिका – राष्ट्रपति ने हेलिकॉप्टर के फ्रंट कॉकपिट में बैठकर एक को-पायलट के रूप में उड़ान का अनुभव लिया।
  • हवाई प्रदर्शन –  उड़ान के दौरान पायलटों ने प्रचंड की कुछ खास युद्धक कलाबाजियों का प्रदर्शन किया जिससे इसकी मारक क्षमता और बचाव प्रणाली का पता चलता है।
  • पिछला अनुभव-  यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ने लड़ाकू विमानों में रुचि दिखाई है। इससे पहले वे सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे अत्याधुनिक जेट्स में भी उड़ान भर चुकी हैं जो उनकी सैन्य तैयारियों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

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 LCH प्रचंड – भारत का स्वदेशी शिकारी

प्रचंड  का अर्थ है अत्यधिक शक्तिशाली या भीषण  इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विशेष रूप से भारतीय सेना (Indian Army) और वायुसेना (Air Force) की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

विशेषताविवरण 
प्रकार लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) |
वजनलगभग 5.8 टन (दो इंजन वाला)
अधिकतम गति268 किमी/घंटा
रेंज550 किलोमीटर
हथियार 20mm गन, रॉकेट सिस्टम, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें

दुनिया में क्यों सबसे खास है?

LCH दुनिया का एकमात्र ऐसा हमलावर हेलिकॉप्टर (Fighter helicopter) है जो 5,000 मीटर/16,400 फीट की ऊंचाई पर उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है। यह क्षमता इसे सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier) और लद्दाख जैसे ऊंचे युद्ध क्षेत्रों के लिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टर (Best chopper) बनाती है।

मेक इन इंडिया और रक्षा आत्मनिर्भरता

राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत अभियान को समर्पित है। दशकों तक भारत अपने लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के लिए रूस या अमेरिका पर निर्भर रहा है। लेकिन प्रचंड के आने से यह निर्भरता कम हुई है।

  • स्वदेशी तकनीक –  इसका ग्लास कॉकपिट हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और रडार चेतावनी प्रणाली पूरी तरह से आधुनिक है।
  • स्टील्थ फीचर्स –  इसमें रडार सिग्नेचर कम करने की तकनीक है जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते।
  • क्रैश रेजिस्टेंस – इसके लैंडिंग गियर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपातकालीन लैंडिंग के समय यह झटकों को सोख सके और पायलट सुरक्षित रहे।

 राष्ट्रपति मुर्मू और सशक्त नारी शक्ति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एक आदिवासी पृष्ठभूमि (tribal background) से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचना और फिर लड़ाकू विमानों (fighter planes) की कमान संभालना देश की करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • प्रेरणा – यह उड़ान संदेश देती है कि भारतीय महिलाएं अब केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रहीं बल्कि रक्षा तकनीक के शिखर पर भी मौजूद हैं।
  • नेतृत्व – एक सर्वोच्च कमांडर के रूप में सैनिकों के बीच उनकी उपस्थिति सेना के मनोबल को सातवें आसमान पर ले जाती है।

राफेल से प्रचंड तक का सफर

अक्टूबर माह में राष्ट्रपति ने राफेल विमान में उड़ान भरी थी जो एक मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Multi-Role Combat Aircraft) है। राफेल जहाँ लंबी दूरी की मारक क्षमता और सुपरसोनिक गति के लिए जाना जाता है वहीं प्रचंड अपनी फुर्ती और पहाड़ों की चोटियों पर छिपे दुश्मनों को खत्म करने के लिए प्रसिद्ध है। इन दोनों विमानों में राष्ट्रपति की उड़ान (presidential flight) यह दर्शाती है कि भारत की वायु शक्ति अब पूर्ण रूप से संतुलित और किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।

भविष्य की राह

जैसलमेर की आकाश में गूंजती प्रचंड की गड़गड़ाहट (the thunder of the fierce) और उसमें बैठी भारत की राष्ट्रपति बदलते भारत की तस्वीर है। भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं  बल्कि एक निर्माता (Exporter) बनने की राह पर है। प्रचंड के सफल परीक्षण और वायुसेना में इसके शामिल होने के बाद अब कई अन्य देश भी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

यह उड़ान स्वदेशी तकनीक, सामरिक कौशल , नारी शक्ति  का एक अद्भुत संगम थी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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