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संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: कहा—भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल

संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन
नवजोत कौर सिद्धू
On: नवम्बर 27, 2025 6:52 अपराह्न
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आज ही के दिन भारत ने 1949 में अपना संविधान अंगीकार किया था। इस विशेष समारोह का नेतृत्व आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया।

26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस मनाया जाता है। आज ही के दिन भारत ने 1949 में अपना संविधान अंगीकार किया था। इस विशेष समारोह का नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। पुराने संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व भर में उदाहरण है। भारत जल्दी ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन

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नौ भाषाओं में संविधान का अनुवाद: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया सहित नौ भाषाओं में संविधान का अनुवाद जारी किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “संविधान दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।” भारत के संविधान का प्रारूप बनाने का काम आज ही के दिन 26 नवंबर, 1949 को संविधान भवन के इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा के सदस्यों ने पूरा किया था। उसी वर्ष हमारे देश ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा भारत की अंतरिम संसद भी थी। हमारे संविधान का एक महत्वपूर्ण निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर था, जो प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

राष्ट्रपति GST, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर बोलीं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “संसद ने हमारी बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए, तीन तलाक से जुड़ी सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाकर। GST, स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार, देश की अर्थव्यवस्था को एकजुट करने के लिए लागू किया गया। अनुच्छेद 370 को हटाने से एक ऐसी चुनौती दूर हुई जो देश की पूरी तरह से राजनीतिक एकता को बाधित कर रही थी। महिला शक्ति वंदन अधिनियम से विकास का एक नया युग शुरू होगा जिसमें महिलाओं का नेतृत्व होगा..। हमारे राष्ट्रगान वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 7 नवंबर से देश भर में एक स्मरणोत्सव मनाया जाएगा।”

भारत एक है और हमेशा रहेगा: उपराष्ट्रपति का पद

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा, “हमारे संविधान का प्रारूपण, उस पर बहस और उसे संविधान सभा में भारत माता के हमारे महान नेताओं द्वारा किया गया।” यह हमारे लाखों लोगों के एकजुट ज्ञान, त्याग और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है। संविधान सभा, प्रारूप समिति और महान विद्वानों ने करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए व्यापक विचार दिए। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है क्योंकि यह उनका निस्वार्थ योगदान था। हमारा संविधान विवेक, त्याग, आशा और आकांक्षाओं से बना है। हमारे संविधान की आत्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत एक है और सदा एक रहेगा…।”

प्रमुख लोगों की उपस्थिति

इस राष्ट्रीय समारोह में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन गणमान्य लोग उपस्थित हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन कार्यक्रम में उपस्थित रहें।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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