इतिहास के पन्नों में 29 नवंबर का दिन कई अहम घटनाओं के लिए जाना जाता है। इस दिन ने दुनिया भर में कई बदलावों और उपलब्धियों को जन्म दिया। जिनमें भारत की राजनीतिक घटना भी शामिल है, जिसे शायद कम ही लोग जानते है। दरअसल आज ही के दिन ठीक 32 साल पहले देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी नें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, और इस इस्तीफे के बाद कांग्रेस लंबे समय बाद सत्ता से बाहर हुई थी। उनका इस्तीफा भारतीय राजनीति का एक बड़ा राजनीतिक मोड़ था।

29 नवंबर 1989 की यह घटना आज भी राजनीतिक गलियारों का अहम मूवमेंट माना जाता है। हलांकि इसके पीछे तमाम कारण थे लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि लोकसभा में 404 सीटों से सीधे घटकर कांग्रेस आधी से कम कुल 193 में सीमित रह गई थी। तो चलिये बताते हैं इसके पीछे की और भी वजह क्या थी-
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार
दरअसल राजीव गांधी का इस्तीफा देने का सबसे बड़ा कारण 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार थी। कांग्रेस पार्टी को जनता दल और बीजेपी के गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा। यह चुनावी नतीजे कांग्रेस के लिए काफी चौंकाने वाले थे, क्योंकि इससे पहले 1984 में राजीव गांधी की सरकार को भारी बहुमत मिला था। और 404 सीटों वाली कांग्रेस 1989 में 193 में ही सिमट कर रह गई थी। जिसके बाद पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया।
राजीव गांधी ने युवाओं के बीच मजबूत छवि पर बोफोर्स घोटाले नें गिराई साख
1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, राजीव गांधी ने युवाओं को प्रेरित करने और देश में कई आधुनिक बदलाव लाने की कोशिश की। हालांकि, उनकी सरकार के कुछ फैसलों पर आलोचना हुई। खासकर बोफोर्स घोटाले के कारण उनकी छवि पर असर पड़ा। इस घोटाले में यह आरोप था कि कुछ रक्षा अधिकारियों और नेताओं ने बिचौलियों के माध्यम से मिलकर हथियारों की खरीद में घोटाला किया।
राजीव गांधी पर यह आरोप लगा कि उनके समय में घोटाला हुआ, हालांकि उन्हें कभी कानूनी रूप से दोषी नहीं ठहराया गया। फिर भी, इस घोटाले ने उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया। जिसका नतीजा उन्हें लोकसभा चुनाव में देखनें को मिला और कांग्रेस को कई सीटों में हार का सामना करना पड़ा।
राज्यों में विरोध, आंतरिक और कई चुनौतियों का सामना
राजीव गांधी को आंतरिक राजनीति में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनकी सरकार को राज्यों में मजबूत विरोध का सामना करना पड़ा, और कई फैसलों के कारण देश में असंतोष बढ़ा। इसके अलावा, राजीव गांधी के नेतृत्व में कई विदेशी मुद्दे भी जटिल हो गए थे, जैसे श्रीलंका में भारतीय शांति सैनिकों की तैनाती (IPKF) और अफगानिस्तान में पाकिस्तान के प्रभाव के साथ रिश्ते। इन घटनाओं ने उनकी सरकार की छवि पर असर डाला।
पार्टी में भी असंतोष और नेताओं का विरोध
कांग्रेस पार्टी के भीतर राजीव गांधी के नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। कई कांग्रेसी नेता उनके नेतृत्व से खुश नहीं थे, और उन्हें लगता था कि पार्टी के भीतर एक नया नेतृत्व आना चाहिए। इसके अलावा, पार्टी के भीतर कई भ्रष्टाचार के आरोप भी थे, जो उस दौर में उनके इस्तीफे की वजह बने।
मजबूत विपक्षी गठबंधन, राजनीतिक माहौल
1989 में राजनीतिक माहौल में बदलाव आ रहा था। बीजेपी और जनता दल ने मिलकर एक मजबूत विपक्षी गठबंधन बनाया था, जिससे राजीव गांधी की सरकार के लिए चुनौती पैदा हुई। इसी समय, सिविल सोसाइटी और मीडिया में भी सरकार के खिलाफ आवाजें उठने लगीं।
यह घटना आज भी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है, जहां सत्ता में रहते हुए किसी नेता को हार के बाद इस्तीफा देना पड़ा।






