भारत में क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित रिकॉर्ड्स में से एक सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों का रिकॉर्ड अब विराट कोहली की बढ़ रही फार्म के साथ फिर चर्चा में आ गया है। 2025 में हुए हालिया प्रदर्शन, दिग्गजों की भविष्यवाणियाँ और कोहली की निरंतरता के कारण यह माना जा रहा है कि सचिन का यह रिकॉर्ड अब खतरे में है।
विराट कोहली ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक और ODI शतकीय पारी खेलकर अपनी दमदार बल्लेबाज़ी जारी रखी है। इस पारी के साथ उन्होंने ODI फॉर्मेट में सर्वाधिक शतकों का रिकॉर्ड अपने नाम किया। पुरुष क्रिकेट में किसी एक फॉर्मेट में सबसे ज्यादा सेंचुरी रखने वाले बल्लेबाज़ बन गए।

Also check:
- 2026 में IPL की तैयारियाँ तेज, साल के अंत में होगा मिनी ऑक्शन
- नये अध्यक्ष से शुरु हुआ नया अध्याय, वेंकटेश प्रसाद
क्या कहा सुनील गावस्कर ने
इस प्रदर्शन के बाद दिग्गज क्रिकेटर सुनील गास्वकर ने साफ कहा कि कोहली के पास 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों तक पहुँचने का यथार्थवादी मौका है। उन्होंने कहा कि विराट अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं, और यदि उन्होंने अगले कुछ साल खेल जारी रखा, तो यह “असंभव” रिकॉर्ड भी टूट सकता है।
पूर्व सलामी बल्लेबाज़ वसीम जाफर ने यह कहना ठीक है कि अगर कोहली अगले 3–4 साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहें, तो सचिन के 100 शतकों का रिकॉर्ड उनके लिए चुनौती बन सकता है। जाफर का मानना है कि कोहली की फिटनेस, जुनून और ताज़ा फॉर्म उन्हें इस मुकाम तक ले जा सकते हैं।
अब सवाल यह उठता है: क्या आंकड़े और समय कोहली के पक्ष में हैं? कोहली के सबसे हालिया शतक के साथ उनकी कुल अंतरराष्ट्रीय शतकों की संख्या 80 के पार है। इसके लिए उन्हें करीब 20 और शतक चाहिए होंगे — यह लक्ष्य जितना शानदार है, उतना ही कठिन भी। क्योंकि अब क्रिकेट कैलेंडर पहले जैसा घना नहीं रहा। टेस्ट से संन्यास और टी-20 पर कम फोकस ने कोहली को वनडे तक सीमित कर दिया है।
फिर भी, 2027 तक भारतीय टीम के वनडे शेड्यूल और विश्व-कप संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, कोहली के लिए यह लक्ष्य असंभव नहीं दिखता। यदि हम मान लें कि वे नियमित रूप से खेलते रहेंगे, वे फिट रहेंगे और फॉर्म बरकरार रहेगी, तो 100 अंतरराष्ट्रीय शतक तक पहुँचना दूर की बात नहीं लगती।
हालाँकि, बदलती क्रिकेट परिस्थितियाँ, टीम चयन, युवा खिलाड़ियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गेंदबाज़ी की तकनीक जैसे कारक इस प्रयास को चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। कुछ पूर्व विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ट और टी-20 से संन्यास ने कोहली की संभावनाओं को सीमित कर दिया है, क्योंकि हर फॉर्मेट में शतक बनाना आसान नहीं।
लेकिन क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। वह जुनून, कड़ी मेहनत, समय, और आत्म-विश्वास का खेल है। और इन सब में फिलहाल कोहली पीछे नहीं दिख रहे। उन्होंने नई तकनीक, नए दौर और बदलती गेंदबाज़ी के बीच भी अपनी बल्लेबाज़ी शैली को नई ऊर्जा और मजबूती दी है। उनकी निरंतरता, मैदान पर आत्म-विश्वास और टीम के लिए उनकी अहमियत — ये सब मिलकर उन्हें उस राह पर रख रहे हैं, जहाँ से सचिन का 100-शतक रिकॉर्ड टूट सकता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले सालों में कोहली की फार्म, टीम का भरोसा, और क्रिकेट की रणनीतियाँ उन्हें उस मुकाम तक ले जा पाएंगी या नहीं — जहाँ केवल रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक नई विरासत जुड़ी होगी।






