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Shahid Afridi statement about Gautam Gambhir – शाहिद अफ़रीदी ने अब गौतम गंभीर के कोचिंग करियर को लेकर क्या कह दिया..?

गौतम गंभीर
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 12, 2025 5:27 अपराह्न
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भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट रिश्तों की तरह ही दोनों देशों के खिलाड़ियों के बयान भी अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। शाहिद अफ़रीदी—जो मैदान के बाहर भी बेबाक बयान देने के लिए जाने जाते हैं—ने एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। इस बार मामला किसी मैच, विवाद या पुरानी रंजिश का नहीं, बल्कि भारत के स्टार खिलाड़ी और टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर के कोचिंग करियर से जुड़ा है। अफ़रीदी ने गंभीर के कोचिंग रोल को लेकर जो टिप्पणी की है, उसने क्रिकेट जगत में नई बहस को जन्म दिया है। भारत में जहां गंभीर को एक आक्रामक, साफ-साफ बोलने वाले और रणनीति-कुशल कोच के रूप में देखा जा रहा है, वहीं पाकिस्तान में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

शाहिद अफ़रीदी ने अब गौतम गंभीर

गंभीर के कोचिंग कार्यकाल की शुरुआत और बढ़ती उम्मीदें

गौतम गंभीर ने भारतीय टीम के हेड कोच के रूप में जब अपना कार्यभार संभाला, तो देशभर में उनके नेतृत्व को लेकर काफी उम्मीदें जागीं। IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ उनकी रणनीतिक सफलता ने उन्हें एक सफल थिंक-टैंक के रूप में पेश किया। उनके कोचिंग में खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी, खेल की बारीकियों पर ध्यान और विरोधियों की रणनीति को पढ़ने की क्षमता की काफी तारीफ होती रही है। गंभीर के हेड कोच बनने के बाद भारत ने टेस्ट, वनडे और T20 तीनों फॉर्मेट में आक्रामक क्रिकेट की दिशा दिखाई है। युवा खिलाड़ियों को मौका देने और टीम में फिटनेस-डिसिप्लिन बढ़ाने के लिए गंभीर की नीति भी चर्चा में रही।

अफ़रीदी ने क्या कहा—”गंभीर को अब असली चुनौती मिल रही है”

एक टीवी इंटरव्यू में शाहिद अफ़रीदी ने गंभीर के कोचिंग करियर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि IPL और इंटरनेशनल क्रिकेट का दबाव बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसी बड़ी टीम का कोच होना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान काम नहीं होता।अफ़रीदी का बयान था- गौतम गंभीर एक आक्रामक खिलाड़ी थे, अब उनके सामने असली चुनौती है कि टीम को कैसे साथ लेकर चलें। IPL में रणनीति अलग होती है, वहां आप सीमित खिलाड़ियों और विदेशी कोचों के साथ काम करते हैं। लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में खिलाड़ियों की मानसिकता, उनका व्यवहार और टूर्नामेंट का दबाव—ये सब बहुत अलग है।” अफ़रीदी का कहना था कि गंभीर सफल हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी छवि और व्यवहार में भी कुछ बदलाव करने होंगे।

“गंभीर को खिलाड़ियों के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे”

अफ़रीदी ने आगे कहा कि भारत की ड्रेसिंग रूम हमेशा से शांत और अनुशासित माहौल पसंद करती है। उन्होंने यह टिप्पणी गंभीर की मैदान पर आक्रामक छवि की ओर इशारा करते हुए की।

उन्होंने कहा—
“गौतम गंभीर बहुत पैशनेट इंसान हैं, लेकिन इंडियन टीम के कोच के रूप में उन्हें एक और भूमिका निभानी है—खिलाड़ियों के साथ रिश्ते सौम्य रखने की। अगर उन्हें खिलाड़ी सपोर्ट करेंगे, तो भारत अगले कुछ सालों में बहुत खतरनाक टीम बनेगी।” अफ़रीदी ने हालांकि यह भी माना कि गंभीर खेल को गहराई से समझते हैं और अगर वे अपनी रणनीति को सही तरह लागू करते हैं, तो भारत बहुत बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है।

गंभीर और अफ़रीदी—पुरानी तकरार की छाया?

क्रिकेट फैन्स यह बात भूल नहीं पाए हैं कि गंभीर और अफ़रीदी का रिश्ता मैदान पर कई बार तनावपूर्ण रहा है। IPL हो या भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत, दोनों के बीच नोकझोंक और तीखी बहसें कैमरों में कैद होती रही हैं।

लेकिन इस बार अफ़रीदी का बयान ज्यादा संतुलित और विश्लेषणपरक था। उन्होंने गंभीर की आलोचना करने के बजाय उन्हें एक कठिन भूमिका में सफल होने की शुभकामना भी दी। कई फैंस ने इस बयान को यह कहकर रिएक्ट किया कि शायद अफ़रीदी भी गंभीर की कोचिंग में भारत की मजबूती को समझ रहे हैं और इसी कारण उन्होंने एक “सॉफ्ट टोन” अपनाई है।

भारत के पूर्व खिलाड़ी गंभीर के समर्थन में

अफ़रीदी के बयान के बाद भारत के कई पूर्व क्रिकेटरों ने गंभीर का समर्थन किया है। कुछ ने कहा कि गंभीर जिस तरह की रणनीतिक सोच रखते हैं, वह आधुनिक क्रिकेट की जरूरत है।एक पूर्व खिलाड़ी ने कहा
“गंभीर के बारे में अफ़रीदी जो कह रहे हैं, उसमें कुछ हद तक सही है। लेकिन गंभीर ने IPL में जो सफलताएँ पाई हैं, वे साबित करती हैं कि वह एक मजबूत नेतृत्वकर्ता हैं। टीम इंडिया में वे अपनी आक्रामकता का सही उपयोग करेंगे।”

क्रिकेट विशेषज्ञों की राय—“दबाव दोनों तरफ है”

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि अफ़रीदी का बयान पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, बल्कि यह एक क्रिकेटिंग दृष्टिकोण से दिया गया है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी बड़े देश की टीम को कोच करना आसान नहीं होता—चाहे वह भारत हो या पाकिस्तान।

विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी । युवा और सीनियर खिलाड़ियों का संतुलन,वर्ल्ड कप की तैयारी,टीम की मानसिक मजबूती,टूरिंग शेड्यूल के बीच रणनीति का भी असर है। प्रबंधन गंभीर के कोचिंग करियर में यह शुरुआती समय है, इसलिए उनके निर्णय और टीम की परफॉर्मेंस पर दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

पाकिस्तान में क्यों बढ़ी गंभीर की चर्चा?

अफ़रीदी के बयान के बाद पाकिस्तान के खेल चैनलों पर भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कुछ पैनलिस्टों ने कहा कि गंभीर के नेतृत्व में भारतीय टीम और भी आक्रामक हो सकती है, जो पाकिस्तान के लिए चुनौती बनेगा।

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि गंभीर, राहुल द्रविड़ की तरह शांत माहौल नहीं बना पाएंगे, इसलिए उनका सफर कठिन हो सकता है,लेकिन फैन्स का मानना है कि यह सब तभी स्पष्ट होगा जब टीम इंडिया किसी बड़े टूर्नामेंट में गंभीर की रणनीति के साथ मैदान पर उतरेगी।

गंभीर ने क्या प्रतिक्रिया दी?

गौतम गंभीर की ओर से अफ़रीदी के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। गंभीर आमतौर पर अनावश्यक विवादों में प्रतिक्रिया नहीं देते। वह अपने काम और खिलाड़ियों पर ध्यान देना पसंद करते हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि गंभीर टीम की फिटनेस, मानसिक स्थिरता और तेज-तर्रार क्रिकेट पर जोर दे रहे हैं। उनके अनुसार, उनकी प्राथमिकता खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारना है, न कि किसी बयानबाजी में उलझना।

आने वाले समय में क्या होगा?

भारत को आने वाले महीनों में कई बड़े दौरे और टूर्नामेंट खेलने हैं। इन मैचों के प्रदर्शन से गंभीर की कोचिंग का असली परीक्षण होगा।अफ़रीदी का बयान चाहे विवाद के एंगल से देखा जाए या विश्लेषण के, इतना तो साफ है कि गंभीर की कोचिंग पर पड़ोसी देश भी बारीकी से नजर रख रहे हैं।

क्रिकेट से जुड़े हर प्रशंसक के मन में एक ही सवाल है— क्या गंभीर टीम इंडिया को एक नई ऊंचाई तक ले जाएंगे? अफ़रीदी का बयान सिर्फ इस बहस को और दिलचस्प बना गया है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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