मैकल पर्वत की तराई क्षेत्र में मध्यप्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर बुढ़ार तहसील के दक्षिण में ग्राम लखबरिया है।
जहां प्राचीन लखबरिया गुफाएं हैं,इस क्षेत्र में लाल बलुआ पत्थर की विस्तृत चट्टान है। पूर्व से पश्चिम करीब 300 से 400 मीटर और उत्तर से दक्षिण करीब 200 से 300 मीटर क्षेत्र में प्राचीन गुफा विद्यमान है, जो लखबरिया की गुफाएं या लखबरिया केव्स के नाम से प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में मान्यता अनुसार द्वापर युग के शिवलिंग विराजमान हैं।

“नमस्ते भगवान रुद्र भास्करामित तेजसे।
नमो भवाय देवाय रसायाम्बुमयात्मने।।”
मैकल पर्वत की तराई क्षेत्र में हैं गुफाएं
जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर बुढ़ार तहसील के दक्षिण में ग्राम लखबरिया है. जहां पांडवों की ऐतिहासिक और प्राचीन गुफाएं हैं. यह मैकल पर्वत की तराई क्षेत्र में है, जहां लाल बलुआ पत्थर की विस्तृत चट्टान है. पूर्व से पश्चिम करीब 300 मीटर और उत्तर से दक्षिण करीब 200 मीटर क्षेत्र में प्राचीन गुफा विद्यमान है, जो लखबरिया की गुफाएं या लखबरिया केव्स के नाम से मशहूर हैं।
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पांडवों ने कराया था इन 1 लाख गुफाओं का निर्माण
इन गुफाओं के बारे में कहा जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे, तो उन्होंने ही इन ऐतिहासिक गुफाओं का निर्माण किया था, और अज्ञातवास का कुछ समय भी यहां गुजारा था। पूर्व पुरातत्वविद रामनाथ सिंह परमार ने बताया कि लखबरिया की गुफाएं ऐतिहासिकता के साथ-साथ प्रसिद्धता भी लिए हुए है. महाभारत में पांडवों के अज्ञातवास को भी इससे जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे तो उन्होंने राजा विराट के क्षेत्र में अज्ञातवास के लिए शरण ली थी. उसी अंतराल में उन्होंने लखबरिया में एक लाख गुफाओं का निर्माण किया था.
बलुआ पत्थर से किया गया है गुफाओं का निर्माण
करीब 300 मीटर लंबी और 200 मीटर चौड़ी इन गुफाओं में जो बड़ी भारी ठोस चट्टानें हैं. वह लाल बलुआ पत्थर की है, जिनसे इन गुफाओं को निर्मित किया गया है. पांडु वंशी राजाओं ने दूसरी सदी में इसका निर्माण कार्य शुरू किया. और छठवीं सदी तक निर्माण कार्य निरंतर चलता रहा. उत्तर की ओर तीन गुफाएं हैं. पश्चिम की ओर भी लगभग सात गुफाएं हैं. जिनमें मंदिर है. वहां एक आश्रम भी है जहां बैठकर गुरु प्रवचन करते थे. और शिष्यों को पढ़ाते थे. दक्षिण की ओर भी तीन गुफाएं हैं, और पूर्व की ओर भी कुछ गुफाएं हैं जो आज भी अधूरी है. इन गुफाओं के पास एक तालाब भी है.
लखबरिया में दैवीय स्थल और द्वापर युगीन शिवलिंग
लखबरिया की गुफाओं में कई दैवीय स्थल भी है. यहां अर्धनारेश्वर शिवलिंग है. ये शिवलिंग गुफा के अंदर खुदाई के दौरान निकली है. इसके अलावा यहां रामलला का दर्शन भी होत है. क्योंकि एक रामलला मंदिर भी है, जहां भगवान राम और जानकी विराजमान है. इनके बारे में भी ऐसी कहा जाता है कि जब भगवान राम वनवास में थे तो उस दौरान उन्होंने यहां कुछ समय गुजारा था. इसके अलावा यहां सीता माता की रसोई भी देखने को मिलती है. साथ ही राधा-कृष्ण मंदिर, शनिदेव समेत कई मंदिर हैं.

पुरातत्व विभाग से संरक्षित है लखवरिया की गुफाएं
कई सदी पुरानी लखबरिया की गुफाएं जिसकी ख्याति भारत में दूर-दूर तक फैली हुई है. आज वही गुफाएं संरक्षण के अभाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी। लखबरिया की गुफाएं जो लाल बलुआ पत्थर से चट्टान से जो गुफाएं बनी है. वह भी झड़ रही हैं थी परंतु अब मध्यप्रदेश पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उनका संरक्षण कर रहा है, पुरातत्वविदों और जानकारी का भिन्यः कहना है कि कहना है कि अगर उसकी खुदाई कराई जाएगी तो वहां पर आसपास के क्षेत्र में तो कई और गुफाएं निकलेगी और कई शिवलिंग खुदाई के दौरान मिल सकते हैं।
लखबरिया में पर्यटन की अपार संभावनाएं
लखबरिया में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. क्योंकि यहां पर ऐतिहासिक, धार्मिक, पौराणिक और पुरातात्विक हर तरह की चीजें मौजूद है. यहां एक ही जगह पर पर्यटकों को कई चीजों के दर्शन लाभ मिल जाएंगे, और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है. लखबरिया की गुफाएं तो ऐतिहासिक हैं ही साथ ही कई मंदिरों की कई कथाएं भी जुड़ी हुई है. अगर इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाए तो निश्चित तौर पर लखबरिया की वजह से शहडोल का नाम भारत में दूर-दूर तक जाना जाएगा।






