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SIR Process Controversy — Election Commission of India (ECI) की SIR प्रक्रिया पर Supreme Court of India में सुनवाई

SIR Process Controversy
नवजोत कौर सिद्धू
On: नवम्बर 27, 2025 2:06 पूर्वाह्न
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भारत में इस वक्त मतदाता सूची (voter-list) से जुड़े विवादों की तेज़ सुनामी है। 2025 में लागू की गई Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया — यानी मतदाता रॉल (voter rolls) का विशेष गहन पुनरीक्षण — विवादों में फँस चुकी है। आज (26 नवंबर 2025) सुप्रीम कोर्ट ने इस SIR प्रक्रिया के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई की और कई राज्यों में इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग को जवाब देने का आदेश दिया।

इस लेख में हम विस्तार से देखेंगे कि SIR क्या है, क्या शिकायतें हैं, कोर्ट ने क्या कहा, और आगे संभावित क्या हो सकता है।

ECI
SIR Process Controversy — Election Commission of India (ECI) की SIR प्रक्रिया पर Supreme Court of India में सुनवाई 5

SIR — क्या है और क्यों शुरू?

SIR (Special Intensive Revision) एक ऐसा अभियान है जिसे ECI ने मतदाता सूची — जिनमें वोटर ID, नाम, पते आदि शामिल होते हैं — को अपडेट, क्लीन और सत्यापित करने के लिए शुरू किया है। मत है कि फर्जी वोट, डुप्लीकेट एंट्रीज, मृत लोगों का नाम, या ऐसे मतदाता जो अब उस क्षेत्र में नहीं रहते — इन सबको हटाया जाएं और सूची को विश्वसनीय बनाया जाए। 

ECI का कहना है कि देश में लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए पुरानी व धुंधली मतदाता सूचियों को समय-समय पर साफ किया जाना चाहिए। SIR के जरिए घर-घर जाकर बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) वेरिफिकेशन करेंगे और मतदाता सूची को अपडेट करेंगे। 

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विवाद — SIR क्यों हो रही है चुनौती?

Election Commission of India
SIR Process Controversy — Election Commission of India (ECI) की SIR प्रक्रिया पर Supreme Court of India में सुनवाई 6

हालाँकि SIR का उद्देश्य साफ-सुथरी मतदाता सूची बताई जाती है, लेकिन कई राजनीतिक दलों, नागरिक समूहों और विपक्ष ने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक, जल्दबाज़ी भरी और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। 

मुख्य शिकायतें निम्न हैं:

  • समय और तरीके पर सवाल: कई राज्यों में SIR को चुनाव से पहले लागू किया गया है — जिससे आरोप है कि इसे जनता को वोटर सूची से बाहर करने या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • वोटर बहिष्करण का डर: यह भय है कि कई जायज मतदाता — खासकर गरीब, अल्पसंख्यक, गाँव-छोटी आबादी वाले क्षेत्र — बिना सही दस्तावेज या सूचना के मतदाता सूची से बंद हो सकते हैं।
  • प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल: कुछ आवाज़ें कह रही हैं कि मत हटाने व जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है, और राजनीतिक दबाव या पक्षपात की संभावना है।
  • स्थानीय चुनाव या मौसमी वजह से असुविधा: उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में मानसून के दौरान SIR कराने को समय अनुकूल न मानते हुए, कई दलों ने कहा कि इसे आगे टाला जाना चाहिए।

इन कारणों से कई राज्य — जैसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार आदि — SIR के विरोध में सुप्रीम कोर्ट गए।

आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ — सुनवाई का फोकस

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26 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार जैसे राज्यों में चल रहे SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने ECI से 1 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। 

अदालत की बेंच — जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची शामिल थे — ने सुझाव दिया है कि अगर उन्हें SIR प्रक्रिया में अवैधता, पक्षपात या असंवैधानिकता मिले, तो वह पूरी प्रक्रिया को रद्द कर सकती है। 

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल SIR को स्थगित नहीं किया है — क्योंकि ECI को करना है कि वह साबित करे कि यह प्रक्रिया संवैधानिक है और लोकतंत्र के हित में है। उन्होंने कहा कि अदालत को यह मानना चाहिए कि निर्वाचन आयोग “संवैधानिक अधिकार” के दायरे में काम कर रहा है। 

ECI का पक्ष — क्यों SIR आवश्यक है?

ECI का कहना है कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना ज़रूरी है ताकि हर नागरिक को सही-सही मतदान का अधिकार मिले। उन्होंने न्यायालय को बताया कि लगभग 99% मतदाताओं को SIR फॉर्म भेज दिए गए हैं और 50% फॉर्म पहले से डिजिटाइज भी हो चुके हैं — इस तरह प्रक्रिया अभी तक सुचारू है। 

ECI का यह भी कहना है कि SIR का उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीतिक गणना नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। अन्य संस्थाओं या सरकारों द्वारा रोक लगाने संबंधी दलीलों को उन्होंने असंगत बताया है। 

उनका कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धिकरण प्रक्रिया (roll revision) करने का अधिकार सिर्फ ECI को है — अदालत द्वारा इसमें टोकताकी करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। 

अब आगे क्या हो सकता है — संभावित परिदृश्य

  • अगर 1 दिसंबर तक ECI का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो सुप्रीम कोर्ट SIR को अस्थायी या स्थायी रूप से रद्द कर सकती है।
  • यदि SIR जारी रहा, लेकिन कोर्ट अधिनियम लागू होने पर आने वाली याचिकाओं को स्वीकार करती है — तो वोटर सूची में किए गए संशोधन ज़रूरत पड़ने पर फिर रिव्यू हो सकते हैं।
  • राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों व चुनाव आयोग के बीच बातचीत या समझौते की भी गुंजाइश बन सकती है — ताकि भविष्य में मतदाता सूची सुधार और विवाद दूर दोनों लिए संतुलन बनाया जा सके।
  • देश की चुनाव-स्वच्छता, मतदाता-पहचान, मतदान अधिकार जैसी संवेदनशील बातें सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं — और वोटर जागरूकता भी बढ़ सकती है।

निष्कर्ष — लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा

SIR प्रक्रिया का विवाद केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं — यह लोकतंत्र, नागरिक अधिकार और वोटर भागीदारी का मामला बन चुका है।

एक ओर है ECI, जो कह रही है कि सूची में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और फर्जी वोटरों को हटाना लोकतंत्र के हित में है।
दूसरी ओर — कई राजनीतिक दल, नागरिकों और सामाजिक समूहों का आरोप है कि SIR का समय, तरीका और उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के खिलाफ हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इसीलिए महत्वपूर्ण है — क्योंकि वह तय करेगी कि SIR प्रक्रिया संवैधानिक है या नहीं, और अगर है, तो कितनी पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित होनी चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई और फैसला आने वाले समय में देश की राजनीतिक और संवैधानिक दिशा तय कर सकते हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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