व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन, एक युग का अंत

कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन, एक युग का अंत
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 6, 2026 12:47 अपराह्न
Follow Us:

कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन, एक युग का अंत-पुणे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन आज सुबह पुणे में हो गया। 82 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, जिससे राजनीतिक और खेल जगत में गहरा शोक फैल गया है। कलमाड़ी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अंततः पुणे के एक अस्पताल में उनका देहांत हुआ, जहाँ उन्हें इलाज चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर पुणे के वैकुंठधाम श्मशान घाट में किया जाएगा। 

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को मद्रास (अब चेन्नई), तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर शंकर राव कलमाड़ी एक प्रतिष्ठित चिकित्सक थे। कलमाड़ी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पुणे में प्राप्त की और फिर नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। भारतीय वायुसेना में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1965 और 1971 के Indo-Pakistan युद्धों में सेवा की और बाद में एनडीए में प्रशिक्षक के रूप में भी कार्य किया। यह सैन्य पृष्ठभूमि ने उनके जीवन में अनुशासन और नेतृत्व की नींव रखी, जो आगे उनके राजनीतिक जीवन में भी देखने को मिली। 

राजनीतिक सफर की शुरुआत

कलमाड़ी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970-80 के दशक में युवा कांग्रेस और कांग्रेस (सोशलिस्ट) से की। शुरुआत में वे महाराष्ट्र में प्रशांत युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने और जल्दी ही पार्टी के संगठनात्मिक ढांचे में एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे। 

उनका पहला संसदीय अनुभव

राज्यसभा (संसद के उच्च सदन) में 1982 में हुआ, जहाँ वे कांग्रेस के समर्थन से एक प्रतिनिधि के रूप में चुने गए। इसके बाद वे 1996, 2004 और 2009 में लोकसभा के लिए पुणे संसदीय क्षेत्र से विजय हासिल कर चुके थे, जहाँ से उन्होंने जनता की उम्मीदों को संसद तक पहुंचाया। 

केंद्र में मंत्री और राष्ट्रीय राजनीति

सुरेश कलमाड़ी ने भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री (रेल मंत्रालय) के रूप में भी सेवा दी। वर्ष 1995–96 में वे रेल मंत्रालय के राज्य मंत्री रहे और इसी दौरान उन्होंने रेलवे बजट प्रस्तुत किया था। उनकी नियुक्ति ने कांग्रेस के भीतर और संसदीय राजनीति में उनकी साख को और मजबूत किया। 

वह कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख संगठनकर्ता और पुणे में पार्टी की स्थानीय मशीनरी के प्रभावशाली नेता के रूप में देखे जाते थे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने कई चुनावों में पुणे और आसपास के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन किया। 

खेल प्रशासन में योगदान

कलमाड़ी को केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि खेल प्रशासक के रूप में भी जाना जाता था। उन्होंने 1996 से 2012 तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक सेवा की। इस दौरान भारतीय खेलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित पहचान दिलाने के लिए उन्होंने कई पहल कीं। उनकी भूमिका के तहत एशियाई एथलेटिक्स संघ (AAA) के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया गया, जहाँ उन्होंने एशियाई खेलों और युवा प्रतिभाओं के विकास हेतु कई कार्यक्रमों का समर्थन किया। 

कलमाड़ी ने ओलंपिक आंदोलन के तहत माराथन आयोजन, राष्ट्रीय खेल मेलों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खेल कार्यक्रमों के लिए भी भारत को मंच प्रदान किया। उनके समय में खेल प्रशासन में कुछ नई संरचनात्मक पहल भी देखी गईं और खेल बजट तथा युवा खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए संसाधन बढ़ाए गए। 

2010 कॉमनवेल्थ गेम्स, उज्जवल शुरुआत और विवाद

उनकी पहचान का सबसे चर्चित अध्याय रहा 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन। कलमाड़ी ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे। हालांकि यह आयोजन विश्व स्तर का मंच प्रदान करने वाला था, लेकिन इसके दौरान भारी विवाद भी सामने आए। कार्यक्रम में सुविधाओं, समय प्रबंधन, बजट और अनुशासन से जुड़ी समस्याओं के कारण आम जनता और मीडिया में आलोचना हुई। बाद में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और अन्य एजेंसियों ने आरोप लगाया कि कुछ अनुचित अनुबंध और वित्तीय अनियमितताएँ हुई थीं। 

2011 का वह दिन जब हुये गिरफ्तार

2011 में CBI द्वारा उन्हें समय-स्कोरिंग-परिणाम (TSR) सिस्टम अनुबंध मामले में गिरफ्तार किया गया, और वे लगभग दस महीने जेल में रहे। हालांकि ऐसी जटिल कानूनी प्रक्रिया के बावजूद उन्होंने स्वयं को बेगुनाह बताया और अंततः अदालत ने कुछ मामलों में उन्हें जमानत दी।  इन विवादों के चलते कांग्रेस ने उनकी पार्टी सदस्यता को कुछ समय के लिए निलंबित भी किया था, जिससे उनके राजनीतिक जीवन का एक भावुक और चुनौतिपूर्ण दौर शुरू हुआ। लेकिन उनकी समर्थकों का कहना था कि उन्होंने खेलों के लिए अत्यधिक प्रयास किए और विवाद को उसकी पूरी तस्वीर के बिना नहीं देखने दिया गया। 

लोकप्रियता और पुणे से गहरा नाता

पुणे शहर के लिए कलमाड़ी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक पहचान, एक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने शहर के नागरिक जीवन, खेल सुविधाओं, शिक्षा, और सामाजिक आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके द्वारा स्थापित पुणे इंटरनेशनल मैराथन और पुणे फेस्टिवल जैसे कार्यक्रम शहर में आज भी स्मरणीय हैं। 

उनका नेटवर्क और स्थानीय राजनीति में प्रभाव

उन्हें अक्सर “पुणे का खिलाड़ी-नेता” कहा जाता था। उन्होंने स्थानीय युवाओं के लिए खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को समर्थन दिया, जिसका प्रभाव उनके समर्थकों द्वारा आज भी याद किया जाता है। 

व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक विरासत

कलमाड़ी का जीवन सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ पारिवारिक बंधनों से भी जुड़ा रहा। उनके परिवार ने राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र में सहयोग दिया और उनकी पत्नी मीरा कलमाड़ी भी अक्सर सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहतीं थीं। उनके निधन के साथ ही पुणे और देश के राजनीतिक, खेल और सार्वजनिक जीवन में एक युग समाप्त हो गया है। कई लोगों के विचार में वे न केवल सांसद और मंत्री रहे, बल्कि एक प्रेरणादायी नेता थे जिन्होंने खेल और राजनीति को जोड़ने का प्रयास किया। 

शोक की लहर और प्रतिक्रियाएँ

उनके निधन पर महाराष्ट्र और राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं, खेल संगठनों और समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस पार्टी, खेल संघ और स्थानीय प्रशासन ने उनके योगदान को याद किया और कहा कि भारतीय खेल प्रशासन और राजनीति को एक अनुभवी नेतृत्व खो दिया है। 

राजनीतिक विश्लेषकों और सहयोगियों के अनुसार, उनके नेतृत्व में राजनीति, खेल और स्थानीय विकास के क्षेत्र में कई सकारात्मक पहल हुईं और उनके अनुभव ने कई नौजवान नेताओं को मार्गदर्शन दिया।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment