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ठाकरे बनाम शिंदे की शिवसेना में टकराव तेज, 75,000 करोड़ की BMC सत्ता पर BJP की नजर

ठाकरे बनाम शिंदे की शिवसेना में टकराव तेज
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 25, 2025 10:22 पूर्वाह्न
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BMC: सिर्फ नगर निगम नहीं, सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र

बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाती है। करीब 75,000 करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली यह संस्था मुंबई की सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों, पानी, सफाई, झुग्गी पुनर्विकास और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नियंत्रित करती है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, ऐसे में BMC पर नियंत्रण का मतलब सिर्फ प्रशासनिक ताकत नहीं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी है।

ठाकरे बनाम शिंदे की शिवसेना में टकराव तेज

यही कारण है कि BMC की सत्ता महाराष्ट्र की राजनीति की धुरी रही है। दशकों तक शिवसेना ने इस नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। बालासाहेब ठाकरे के दौर से लेकर उद्धव ठाकरे तक, BMC को शिवसेना की राजनीतिक ताकत की रीढ़ माना जाता रहा। मुंबई में शिवसेना की जड़ें इतनी गहरी थीं कि BMC चुनाव को पार्टी की असली परीक्षा समझा जाता था।

लेकिन 2022 के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। शिवसेना दो फाड़ हो गई, और इसी के साथ BMC की सत्ता को लेकर भी सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया। अब मुकाबला सिर्फ दलों का नहीं, बल्कि पहचान, विरासत और भविष्य की राजनीति का बन चुका है।

ठाकरे बनाम शिंदे: विरासत की लड़ाई या अस्तित्व की जंग

उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच की लड़ाई को केवल राजनीतिक मतभेद कहना गलत होगा। यह लड़ाई शिवसेना के नाम, निशान और बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर अधिकार की है। ठाकरे बनाम शिंदे- उद्धव ठाकरे खुद को वैचारिक शिवसेना का उत्तराधिकारी मानते हैं, जिनकी राजनीति मराठी अस्मिता, मुंबई के स्थानीय मुद्दों और भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित रही है। वहीं एकनाथ शिंदे गुट कानूनी मान्यता, चुनाव आयोग के फैसले और सत्ता में भागीदारी के आधार पर खुद को असली शिवसेना बताता है।

BMC चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं। सत्ता से बाहर होने के बाद अगर उनकी शिवसेना BMC भी हार जाती है, तो यह उनके राजनीतिक कद को बड़ा झटका हो सकता है। मुंबई हमेशा से ठाकरे परिवार का गढ़ रही है और यहां हार का मतलब शिवसेना की पारंपरिक ताकत का कमजोर पड़ना होगा।

दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे के लिए BMC जीतना अपनी बगावत को सही साबित करने जैसा होगा। अगर शिंदे गुट BMC में मजबूत प्रदर्शन करता है, तो यह संदेश जाएगा कि जनता ने उन्हें स्वीकार कर लिया है। हालांकि, शिंदे गुट के सामने चुनौती यह है कि मुंबई में शिवसेना की जमीनी पकड़ अब भी काफी हद तक उद्धव ठाकरे के साथ जुड़ी मानी जाती है। यही वजह है कि यह मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है।

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BJP की एंट्री: सहयोगी से मुख्य दावेदार तक

इस पूरे संघर्ष में BJP खुद को केवल दर्शक या सहयोगी के रूप में नहीं देख रही है। पिछले कुछ वर्षों में BJP ने मुंबई में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की है। 2017 के BMC चुनाव में ही BJP ने शिवसेना को कड़ी टक्कर देकर यह संकेत दे दिया था कि वह महानगर की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है।

शिवसेना के दो हिस्सों में बंटने के बाद BJP के लिए मौका और बड़ा हो गया है। एक तरफ वह शिंदे गुट के साथ सत्ता में है, तो दूसरी तरफ वह खुद को एक स्थिर और मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रही है। BJP की रणनीति साफ दिखाई देती है—शहरी मध्यम वर्ग, व्यापारिक समुदाय और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखकर खुद को मुंबई की जरूरतों से जोड़ना।

अगर BJP सीधे तौर पर BMC की सत्ता हासिल कर लेती है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। इसका मतलब होगा कि दशकों से शिवसेना के कब्जे में रही मुंबई अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुकी है। यह जीत न केवल ठाकरे और शिंदे दोनों गुटों के लिए झटका होगी, बल्कि पूरे राज्य की सियासत का संतुलन बदल सकती है। हालांकि BJP के सामने भी चुनौतियां कम नहीं हैं। मुंबई की स्थानीय राजनीति में मराठी अस्मिता, क्षेत्रीय भावनाएं और शिवसेना की पुरानी पकड़ अब भी अहम भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि BJP पूरी ताकत के बावजूद सावधानी से कदम बढ़ा रही है।

BMC की लड़ाई, महाराष्ट्र का भविष्य

75,000 करोड़ की BMC सत्ता की यह जंग सिर्फ एक नगर निगम चुनाव नहीं है। यह तय करेगी कि मुंबई की राजनीति किस दिशा में जाएगी और महाराष्ट्र में भविष्य की सत्ता संरचना कैसी होगी। ठाकरे के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है, शिंदे के लिए वैधता की परीक्षा और BJP के लिए सत्ता विस्तार का सुनहरा मौका।

जो भी इस जंग में जीत हासिल करेगा, वह न सिर्फ मुंबई पर बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी गहरी छाप छोड़ेगा। इसलिए कहा जा सकता है कि BMC की यह लड़ाई आने वाले वर्षों की राजनीति की तस्वीर तय करने वाली है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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