डेलीबार्ता। यदि आप किसी बडे महानगर या शहर से ताल्लुक रखते हैं और ट्रैफिक जाम जैसी स्थितियों में फंसते है तो कानफोडू हार्न आपकी जिंदगी का एक हिस्सा जैसे है। कई बार आपको इससे तकलीफें भी होती है लेकिन आप चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर पाते। लेकिन क्या आपको यह पता है कि भारत का एक ऐसा शहर भी है जहां कानफोडू हार्न तो क्या लोग ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति में भी हार्न नहीं बजाते बल्कि उस वक्त का इंतजार करते हैं जिससे वह बाहर निकल सकें और उनका अंतिम तक यही प्रयास होता है कि उन्हें हार्न न बजाना पड़े। तो चलिये आपको बताते हैं इस अनोखे शहर और उस शहर के खुद ब खुद फॉलों करनें वाले नियम को जो इस वजह से इसे अनोखा बनाता है।
दरअसल, भारत के उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों में बसा यह शहर है जहां ट्रैफिक जाम जैसी स्थितियां तो सामनें आती है, लंबा जाम भी लगता है, लेकिन इस शहर में कोई भी आपको इन परिस्थितियों में बेवजह हॉर्न बजाता नजर नहीं आयेंगा। ऐसे में इस शहर का अनुशासन इसे बेहद खास बनाता है। और सही कारण भी है कि इस शहर को लोग ‘साइलेंट सिटी’ कहते है। तो आखिर इस शांति के पीछे की वजह क्या है और लोग क्यों इसे फॉलो करते हैं वह आपको बताते हैं।
पहाडियों में बसा आइजोल
जी हां वह शहर है आइजोल जो उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों में बसा है। यह एक जादुई शहर है। मिजोरम इस राजधानी को लोग प्यार से भारत की ‘साइलेंट सिटी’ यानी शांत शहर कहते हैं। खास बात यह है कि यहां की शांति किसी पाबंदी की वजह से नहीं है, बल्कि यहां के लोगों के उस व्यवहार की वजह से है, तो यह भी जानना जरुरी है कि इस अनोखी शांति और वहां के गजब के अनुशासन के पीछे का पूरा सच क्या है।
पहाडियों की चोटी पर बसा अनोखा शहर
आइजोल समुद्र तल से करीब 1,132 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ियों की चोटी पर बसा है। यहां से जब आप नीचे घाटियों को देखते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे पूरा शहर आसमान में तैर रहा हो, लेकिन आइजोल की खूबसूरती सिर्फ इसके नजारों में नहीं, बल्कि यहां की धीमी और शांत जीवनशैली में है। एकतरफ जहां भारत के अन्य शहरों और हिस्सों में जहां लोग भागम-भाग में रहते हैं, वहीं आइजोल के लोग सुकून और धैर्य के साथ अपनी जिंदगी जीना पसंद करते हैं।
लगता है ट्रैफिक जाम, लेकिन कानफोडूं हार्न नहीं
आइजोल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यहां का अनुशासित और व्यवस्थित यातायात है। अमूमन भारत के तमाम महानगरों और शहरों में रश ड्राइविंग और हॉर्न बजाना पहचान बन गई है, लेकिन आइजोल में इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां की सड़के घुमावदार है, साथ ही संकरी भी,लेकिन वाहनों को आप एक कतार पर ही चलता पायेंगे। ना ही भागमभाग नजर आता है और न ही लोग बे वजह ओवरटेक करनें की कोशिस करते नजर आयेंगे।
सबसे अहम पहलू यह भी है कि यहां बेवजह हॉर्न बजाना बहुत बुरा व्यवहार माना जाता है। यहां वाहन चालक हॉर्न का इस्तेमाल सिर्फ तब करते हैं जब किसी अंधे मोड़ पर अपनी मौजूदगी बताना बेहद आवश्यक हो।
यह परंपरा जीत लेती है दिल
इस अनुशासन के पीछे मिजो समुदाय की एक गहरी परंपरा है, जिसे ‘तलावमंगैहना’ कहा जाता है. इसका सरल अर्थ है, निस्वार्थ भाव, विनम्रता और अपने से पहले दूसरों के बारे में सोचना। बस यही वह सोच है जो यह बताता है कि यहां पैदल यात्रियों का बहुत सम्मान है। यहां के लोग जब किसी सड़क पार कर रहे व्यक्ति को देखते हैं तो अपनें वाहन खुद-ब-खुद धीमा कर लेते हैं। जब भी शहर पर कोई विपदा आती है, तो बिना किसी शोर-शराबे या अफरा-तफरी के, यहां के लोग एक-दूसरे की मदद के लिए खामोशी से कतार में खड़े हो जाते हैं।
जागरुक और साक्षर नागरिक निभाते है अपनी भूमिका
आइजोल की इस खामोशी के पीछे ऐसे तमाम कारण है जो यहां के लोगों को खास बनाते हैं। बात करें तो यहां के लोग साक्षरता के मामले में भी आगे हैं वहीं जागरूक भी है़।जो समाज में अपनें कर्तव्यों को निभाना जानते हैं। यहां के रहवासी अपने शहर को सिर्फ स्थान नहीं, बल्कि अपना घर मानते हैं।
स्वच्छता को लेकर भी इस शहर को लेकर बेहद संजीदा नजर आते हैं, यहां सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकना सिर्फ मना नहीं है बल्कि इसे एक बुरा व्यवहार माना जाता है, यहां का अनुशासन ऐसा है कि चाहे ऑफिसों की छुट्टी का समय हो या, स्कूलों की छुट्टी का वक्त, ट्रैफिक कंट्रोल के लिये पुलिस का इंतजार नहीं करते बल्कि पुलिस के काम का बोझ कम करनें खुद लोग सड़क पर आ जाते हैं और व्यवस्था को सामान्य करनें में अपनी भूमिका निभाते हैं। इस शहर में साझा जिम्मेदारी की यही खूबसूरत भावना इस शहर को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग पहचान दिलाती है।
ऐसे में जब देश दुनियां के किसी अन्य शहर से यहां पर्यटक यहां आते हैं तो उन्हें यहां की यह भावना किसी अजूबे कि तरह लगती है। और एक जिम्मेदार नागरिक होनें का बोध कराती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि आइजोल भारत ही नहीं दुनिया का एक ऐसा शहर है जो हमें यह सिखाता है कि बिना शोर मचाए, एक सभ्य और अनुशासित शहर लोग खुद बना सकते हैं और एक एक अच्छा वातावरण निर्मित कर खास बन सकते हैं।







