TMC राज्यसभा सांसद मौसम बेनज़ीर नूर अब कांग्रेस में शामिल-नए साल (2026) के आगाज़ के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर का कांग्रेस में वापस लौटना न केवल ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह बंगाल की भावी राजनीति के समीकरणों को भी बदलने वाला संकेत है।
नीचे मौसम बेनजीर नूर के दलबदल, उनके पारिवारिक इतिहास और राजनीतिक प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है:
कांग्रेस में वापसी: कब और कैसे
मौसम बेनजीर नूर ने जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। उनकी घर वापसी की अटकलें पिछले कुछ महीनों से तेज थीं, लेकिन नए साल के मौके पर उन्होंने इसे आधिकारिक रूप दिया।
- किसके माध्यम से हुई वापसी-उनकी वापसी में सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के कद्दावर चेहरे अधीर रंजन चौधरी की मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व (मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी) के साथ उनकी लंबी बातचीत के बाद ही यह रास्ता साफ हुआ।
- किसने की पुष्टि-उनके कांग्रेस में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि खुद अधीर रंजन चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की। उन्होंने कहा कि “ममता बनर्जी के शासन में घुटन महसूस कर रहे समर्पित नेता अब अपने पुराने घर (कांग्रेस) लौट रहे हैं।”
राजधानी दिल्ली मे 2026 के शुरुआत में संस्कृति साहित्य और विचार का शब्दोत्सव आयोजन
दल बदलने के मुख्य कारण
मौसम बेनजीर नूर का TMC छोड़ना रातों-रात लिया गया फैसला नहीं था। इसके पीछे कई गहरे राजनीतिक कारण रहे हैं-
अस्तित्व की लड़ाई- मालदा क्षेत्र, जो कभी गनी खान चौधरी का गढ़ था, वहां TMC के भीतर नए चेहरों के आने से मौसम नूर का प्रभाव कम हो रहा था।
संगठनात्मक उपेक्षा- सूत्रों के अनुसार, मौसम पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर लिए जा रहे निर्णयों से संतुष्ट नहीं थीं। उन्हें लग रहा था कि राज्यसभा भेजने के बाद उन्हें मुख्यधारा की बंगाल राजनीति से दूर रखा जा रहा है।
पारिवारिक विरासत का दबाव– उनका परिवार पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। मालदा की जनता आज भी गनी खान चौधरी को कांग्रेस के प्रतीक के रूप में देखती है। मौसम को लगा कि उनकी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए ‘हाथ’ का साथ जरूरी है।
पारिवारिक बैकग्राउंड और सामाजिक वर्ग
मौसम बेनजीर नूर बंगाल के एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रतिष्ठित राजनीतिक घराने से आती हैं।
सामाजिक वर्ग- वह मुस्लिम समुदाय (अल्पसंख्यक वर्ग) से संबंध रखती हैं। बंगाल की राजनीति में, विशेषकर मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में, मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण जीत-हार तय करता है।
खान चौधरी परिवार की विरासत- वह दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री स्वर्गीय ए.बी.ए. गनी खान चौधरी की भांजी हैं। गनी खान चौधरी को ‘मालदा का आधुनिक निर्माता’ कहा जाता है।
शिक्षा- उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से कानून (LL.B) की पढ़ाई की है, जिससे वह राजनीति के साथ-साथ कानूनी दांव-पेंचों की भी अच्छी समझ रखती हैं।
TMC में योगदान और सफर
मौसम नूर ने साल 2019 में कांग्रेस छोड़कर TMC का दामन थामा था। ममता बनर्जी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए पार्टी का चेहरा बनाया था।
- TMC ने मौसम नूर का इस्तेमाल मालदा जिले में कांग्रेस के किलों को ढहाने के लिए किया था। उनके आने से TMC को उत्तर बंगाल में एक शिक्षित और युवा महिला चेहरा मिला।
- ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर संसदीय राजनीति में सक्रिय रखा। उन्होंने संसद में बंगाल के मुद्दों और महिला सशक्तिकरण पर कई बार प्रखरता से बात रखी।
- उन्हें मालदा जिला टीएमसी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई थी, ताकि वे अपने पारिवारिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सकें।
बंगाल की राजनीति पर प्रभाव
मौसम बेनजीर नूर का कांग्रेस में जाना ममता बनर्जी के लिए “प्रतिष्ठा की हानि” जैसा है।
| प्रभाव का क्षेत्र | विवरण |
| मालदा का गणित | मालदा में कांग्रेस फिर से पुनर्जीवित हो सकती है, जो TMC के लिए चिंता का विषय है। |
| अल्पसंख्यक वोट | मौसम की घर वापसी से मुस्लिम मतदाताओं के बीच यह संदेश जा सकता है कि कांग्रेस अभी भी एक मजबूत विकल्प है। | |
| TMC के लिए चेतावनी | यह अन्य असंतुष्ट नेताओं के लिए एक रास्ता खोल सकता है जो भाजपा के बजाय कांग्रेस को प्राथमिकता देते हैं। | |
मौसम बेनजीर नूर का कांग्रेस में शामिल होना केवल एक व्यक्ति का दल बदलना नहीं है, बल्कि यह बंगाल में ‘पुरानी कांग्रेस’ के फिर से एकजुट होने की आहट हो सकती है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे अपने कुनबे को बिखरने से कैसे बचाती हैं।







