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Vaibhav Suryavanshi ने U19 Final में 29 Balls पर 94 Runs ठोककर मचाया धमाल

Vaibhav Suryavanshi ने U19 Final में 29 Balls पर 94 Runs ठोककर मचाया धमाल
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 22, 2026 12:01 अपराह्न
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भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने दांबुला में खेले गए अंडर-19 ए टीम ट्राई सीरीज के फाइनल में ऐसी पारी खेली, जिसने उनकी बल्लेबाजी शैली को लेकर चल रही चर्चाओं का जवाब दे दिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 29 गेंदों में 94 रन बनाकर साबित किया कि उनका स्वाभाविक आक्रामक खेल ही उनकी सबसे बड़ी पहचान और ताकत है।

फाइनल में शुरुआत से ही दिखा आक्रामक तेवर

मेजबान श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने पहली ही गेंदों से आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने केवल 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और कुल 29 गेंदों में 94 रन की तूफानी पारी खेली।

इस दौरान श्रीलंकाई गेंदबाजों पर लगातार दबाव बना रहा और मुकाबला एकतरफा होता दिखाई दिया।

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सिर्फ बाउंड्री से पूरी की फिफ्टी

वैभव की पारी की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अपना अर्धशतक बिना कोई सिंगल लिए पूरा किया। पहले 50 रन केवल पांच चौकों और पांच छक्कों की मदद से आए, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का बेहतरीन उदाहरण रहे।

वनडे क्रिकेट में संयम की सलाह के बीच दिया जवाब

आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाने के बाद वैभव जब 50 ओवर के क्रिकेट में उतरे, तब उन्हें लगातार सलाह दी जा रही थी कि वनडे प्रारूप में अधिक धैर्य के साथ बल्लेबाजी करनी चाहिए और जोखिम कम लेना चाहिए।

सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में ऐसा भी लगा कि वह अपने स्वाभाविक खेल और टीम की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बल्ले से रन तो निकले, लेकिन वह आक्रामक अंदाज देखने को नहीं मिला, जिसने उन्हें कम उम्र में चर्चा का केंद्र बनाया।

श्रीलंका के खिलाफ विवाद के बाद बल्ले से दिया जवाब

फाइनल से कुछ दिन पहले श्रीलंका के खिलाड़ियों के साथ मैदान पर हुई तनातनी भी चर्चा का विषय बनी थी। विरोधी खिलाड़ियों की छींटाकशी और उकसावे के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया था।

हालांकि फाइनल में वैभव ने किसी विवाद की बजाय अपने प्रदर्शन से जवाब दिया और शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर हावी रहे।

बाउंसर की रणनीति भी नहीं आई काम

श्रीलंका ने उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को रोकने के लिए छोटी गेंदों का सहारा लिया, लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं पड़ा।

कुगाथास मथुलन की एक बाउंसर पर वैभव झुकने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि गेंद उम्मीद से कम उछली। बल्ला सीधा रहा और गेंद उसके बीचों-बीच लगकर विकेटकीपर के ऊपर से चौके के लिए निकल गई। यह शॉट भले ही योजनाबद्ध नहीं था, लेकिन उस समय उनकी लय का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था।

Vaibhav Suryavanshi

शतक और रिकॉर्ड दोनों से छह रन दूर रह गए

जब वैभव 50 से 70 और फिर 90 रन के करीब पहुंचे, तब सबसे तेज लिस्ट-ए शतक का रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गया। मौजूदा रिकॉर्ड 29 गेंदों का था और उनकी बल्लेबाजी उसी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी।

हालांकि 29 गेंदों पर 94 रन बनाकर वह आउट हो गए। इस तरह वह शतक से केवल छह रन दूर रह गए और रिकॉर्ड भी अपने नाम नहीं कर सके।

फिर भी उनकी पारी में 10 चौके, 8 छक्के और 324.13 का स्ट्राइक रेट दर्ज हुआ, जिसने मैच पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

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आक्रामक बल्लेबाजी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान

इस पारी ने एक बार फिर यह साबित किया कि वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत उनका स्वाभाविक आक्रामक खेल है। उनकी बल्लेबाजी की खासियत केवल तेजी से रन बनाना नहीं, बल्कि कुछ ही मिनटों में पूरे मुकाबले की दिशा बदल देना है।

उनकी बल्लेबाजी विरोधी कप्तान की रणनीति को प्रभावित करती है, गेंदबाजों का आत्मविश्वास कम करती है और मैच का संतुलन पलभर में बदल सकती है।

Conclusion

दांबुला में खेली गई 94 रन की यह पारी केवल एक शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि वैभव सूर्यवंशी अपने स्वाभाविक अंदाज में ही सबसे प्रभावी बल्लेबाज हैं। वनडे हो या कोई अन्य प्रारूप, उनकी निडर और आक्रामक बल्लेबाजी ही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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