नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को लोकसभा ने VB-G RAM G बिल को बहुमत से पारित कर दिया। सरकार का दावा है कि यह विधेयक महात्मा गांधी के विचारों और ग्राम स्वराज की भावना से प्रेरित है और ग्रामीण भारत को “काम के अधिकार से आगे बढ़ाकर कौशल, स्वावलंबन और टिकाऊ आजीविका” की ओर ले जाएगा। वहीं विपक्ष ने इसे मनरेगा (MGNREGA) को खत्म करने की साजिश बताते हुए संसद के भीतर और बाहर तीखा विरोध दर्ज कराया। सदन में नारेबाजी, वॉकआउट और विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच यह बिल पारित हुआ।

सरकार का तर्क: गांधी के विचारों को आधुनिक रूप
ग्रामीण विकास मंत्री ने बिल पेश करते हुए कहा कि सरकार “महात्मा गांधी के चरणों में नमन” करते हुए ग्रामीण रोजगार की परिभाषा को नए युग के अनुरूप बदल रही है। उनके अनुसार VB-G RAM G (Village-Based Growth & Rural Asset Mission for Growth) का उद्देश्य केवल मजदूरी आधारित अस्थायी काम नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, कौशल विकास, स्थानीय उद्यमिता और डिजिटल सशक्तिकरण है।
मंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में मनरेगा ने संकट के समय सुरक्षा जाल का काम किया, लेकिन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अगले चरण में ले जाने की जरूरत है। “हम मजदूरी से आगे बढ़कर गांव-केंद्रित विकास मॉडल लाना चाहते हैं, जहां युवाओं को कौशल, महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए उद्यम और पंचायतों को ज्यादा अधिकार मिलें,” उन्होंने कहा।
Also read – चीन के 25 साल के युवक को मिला ऑर्डर किंग का खिताब 5 साल में 1.12 मिलियन युआन बचाएं
VB-G RAM G बिल की प्रमुख विशेषताएं
VB-G RAM G बिल के तहत सरकार ने कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं—
- कार्य की प्रकृति में बदलाव: अस्थायी मजदूरी कार्यों के बजाय दीर्घकालिक परिसंपत्तियों—जैसे जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, ग्रामीण गोदाम, डिजिटल सेवा केंद्र—पर जोर।
- कौशल-आधारित रोजगार: गांवों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और प्रमाणन, ताकि श्रमिकों को बेहतर पारिश्रमिक मिल सके।
- महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमों को प्राथमिकता, विशेष फंडिंग और बाज़ार से जोड़ने की व्यवस्था।
- डिजिटल निगरानी: पारदर्शिता के लिए डिजिटल उपस्थिति, भुगतान और सोशल ऑडिट की अनिवार्यता।
- पंचायती राज की भूमिका: ग्राम पंचायतों को योजना चयन और क्रियान्वयन में अधिक अधिकार।
सरकार का कहना है कि इस मॉडल से “काम मांगने” की मजबूरी खत्म होगी और गांवों में सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खुलेगा।
विपक्ष का आरोप: गरीबों से रोजगार छीना जा रहा
विपक्षी दलों ने बिल को गरीब-विरोधी करार दिया। उनका कहना है कि मनरेगा ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए न्यूनतम आय की गारंटी रहा है, खासकर सूखा, बाढ़ और महामारी जैसे संकटों में। विपक्ष का आरोप है कि नए बिल में काम की गारंटी स्पष्ट नहीं है और यह योजना लाभार्थियों को चयनात्मक बना देगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “सरकार गांधी का नाम ले रही है, लेकिन गांधी के मूल सिद्धांत—गरीब की आजीविका की सुरक्षा—को कमजोर कर रही है। मनरेगा खत्म कर देना करोड़ों ग्रामीणों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।” विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि डिजिटल शर्तें और कौशल आधारित मानदंड सबसे कमजोर तबके को बाहर कर सकते हैं।
सदन में हंगामा और वॉकआउट
बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में बार-बार व्यवधान हुआ। विपक्षी सांसदों ने पोस्टर लहराए, नारे लगाए और अंततः वॉकआउट किया। सरकार ने इसे “संवाद से भागना” बताया, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों को सुना नहीं गया। स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
विशेषज्ञों की राय: अवसर भी, जोखिम भी
नीतिगत विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण रोजगार को कौशल और परिसंपत्ति निर्माण से जोड़ना सिद्धांततः सकारात्मक हो सकता है, लेकिन संक्रमण काल में जोखिम भी हैं। “अगर काम की न्यूनतम गारंटी और समयबद्ध भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था नहीं हुई, तो गरीब परिवार असुरक्षित हो सकते हैं,” एक अर्थशास्त्री ने कहा। वहीं कुछ विशेषज्ञों ने पंचायतों को अधिक अधिकार देने और सोशल ऑडिट को मजबूत करने की सराहना की।
राज्यों की चिंता और संघीय प्रश्न
कई राज्यों ने केंद्र से स्पष्ट दिशानिर्देश और पर्याप्त वित्तीय आवंटन की मांग की है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त बजट और लचीलेपन के नई योजना जमीन पर प्रभावी नहीं होगी। संघीय ढांचे में केंद्र-राज्य समन्वय का प्रश्न भी चर्चा में है।
राज्यसभा में भी हंगामे के आसार
लोकसभा से पारित होने के बाद बिल राज्यसभा में जाएगा, जहां विपक्ष के तेवर और तीखे होने की संभावना है। यदि कानून बनता है, तो सरकार ने चरणबद्ध तरीके से मनरेगा से VB-G RAM G की ओर संक्रमण की बात कही है। हालांकि, जमीन पर इसका असर क्रियान्वयन, बजट और पारदर्शिता पर निर्भर करेगा।
VB-G RAM G बिल सरकार के विकास दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव पेश करता है—मजदूरी से कौशल, राहत से आत्मनिर्भरता की ओर। लेकिन गांधी के नाम पर लाए गए इस बदलाव पर सवाल भी उतने ही बड़े हैं। क्या यह ग्रामीण भारत को स्थायी समृद्धि देगा या सुरक्षा जाल कमजोर करेगा—इसका जवाब आने वाले महीनों में नीति के अमल और ग्रामीण जीवन की हकीकत से मिलेगा।






