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गाना गाने से क्यों मिलता है सुकून, क्या कहता है विज्ञान

गाना गाने
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 10, 2025 12:39 पूर्वाह्न
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गाना गाना सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक ऐसी गतिविधि है जो हमारे दिमाग और शरीर – दोनों पर सकारात्मक असर डालती है। जब भी हम कोई पसंदीदा गीत गुनगुनाते हैं, हमें एक तरह की शांति, हल्कापन और मानसिक सुकून महसूस होता है। यह सिर्फ भावनात्मक अनुभव नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आधुनिक शोध बताते हैं कि गाना गाने से मस्तिष्क, नर्वस सिस्टम, हार्मोन, और यहां तक कि फेफड़ों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए समझते हैं कि विज्ञान इस गाना गाने के सुकून के पीछे क्या तर्क देता है।

सिंगिंग मेडिटेशन

क्यों मिलता है सुकून, गाना गाने से

  • गाना गाने से ‘फील-गुड’ हार्मोन निकलते हैं.

जब हम गाना गाते हैं, तो हमारे दिमाग में डोपामिन, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज होते हैं। ये वही केमिकल हैं जो खुशी, संतोष और रिलैक्सेशन के लिए जिम्मेदार होते हैं। डोपामिन प्रेरणा और आनंद का हार्मोन,एंडोर्फिन – प्राकृतिक दर्द निवारक, सेरोटोनिन – मूड को स्थिर और शांत रखने वाला हार्मोन,इसीलिए गाना गाते वक्त मन हल्का होता है और हम तनाव से दूर महसूस करते हैं।

  • सांस लेने की तकनीक शरीर को शांत करती है

गाना गाने के लिए हमें लंबी, गहरी और नियंत्रित सांस लेनी पड़ती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे योग में “प्राणायाम” किया जाता है।

विज्ञान कहता है कि गहरी सांसें:
दिल की धड़कन को सामान्य करती हैं,ब्लड प्रेशर घटाती हैं,पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती हैं (जो शरीर को शांत करता है) यही वजह है कि गाना गाने के बाद शरीर एक हल्की सी शांति में चला जाता है।

  • वाइब्रेशन (कंपन) शरीर को रिलैक्स करते हैं।

जब हम गाते हैं, तो गले, छाती और सिर में हल्का कंपन पैदा होता है। यह कंपन शरीर पर वैसा ही प्रभाव डालता है जैसा ध्यान (मेडिटेशन) के दौरान ‘ओम्’ का उच्चारण करने पर होता है।ये वाइब्रेशन: नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं,शरीर में टेंशन कम करते हैं,दिमाग को वर्तमान क्षण में लाते हैं,इससे तनाव कम होता है और भावनात्मक संतुलन बनता है।

  • गाना दिमाग के दोनों हिस्सों को सक्रिय करता है

    गायन एक ऐसी गतिविधि है जो दिमाग के लेफ्ट ब्रेन (तर्क, शब्द) और राइट ब्रेन (भावना, रचनात्मकता) दोनों को एक साथ सक्रिय करती है। यह मल्टी-एरिया एक्टिवेशन दिमाग में न्यूरल कनेक्शन मजबूत करता है, जिससे मानसिक संतुलन और खुशहाली बढ़ती है।

    • गाने से तनाव हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ कम होता है

      कई वैज्ञानिक स्टडीज़ में पाया गया है कि 10 से 15 मिनट गायन करने से शरीर में कोर्टिसोल (Stress Hormone) का स्तर काफी कम हो जाता है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि चिंता घटती है,दिमाग हल्का महसूस करता है,नींद बेहतर होती है,शरीर में थकान कम होती है,इसीलिए तनाव भरे दिनों में लोग गुनगुनाना शुरू कर देते हैं।

      • संगीत और आवाज़ का भावनाओं से सीधा संबंध

        हमारा मस्तिष्क संगीत और आवाज़ को सीधे लिम्बिक सिस्टम से जोड़ता है, जो भावनाओं को नियंत्रित करता है। जब हम गाना गाते हैं, तो दिमाग भावनाओं को बेहतर तरीके से प्रोसेस करता है।इसी कारण उदासी में गाना मन हल्का करता है,खुशी में गाना उत्साह बढ़ाता है,गुस्से में गाना तनाव निकालने का तरीका बन जाता है,संगीत और मन का रिश्ता वैज्ञानिक रूप से भी बेहद गहरा माना जाता है।

        • गाना गाने से आत्मविश्वास बढ़ता है

          जब हम अपनी आवाज़ बाहर निकालते हैं, तो यह एक तरह की भावनात्मक रिलीज़ होती है।
          इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, झिझक कम होती है,माइंडफुलनेस बढ़ती है,गाना गाना मनोवैज्ञानिक रूप से व्यक्ति को भीतर से मजबूत करता है।

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          • समूह में गाना और भी ज्यादा सुकून देता है ।

            कई शोध बताते हैं कि दूसरों के साथ मिलकर गाना (जैसे भजन, कोरस, समूह गायन) ऑक्सिटोसिन (Bonding Hormone) बढ़ाता है।

            सामाजिक जुड़ाव बढ़ाता है,अकेलापन कम करता है, भावनात्मक सुरक्षा देता है,यही कारण है कि धार्मिक स्थलों या समूहों में गाना गाने से बेहद गहरा सुकून मिलता है।

            • फेफड़े और दिल को भी मिलता है लाभ

            गाना गाना सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक फायदे भी देता है—फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है,खून में ऑक्सीजन का प्रवाह सुधरता है,दिल की धड़कन का रिदम स्थिर होता है,यह शरीर को अधिक ऊर्जावान और रिलैक्स दोनों बनाता है।

            • यह एक प्राकृतिक मेडिटेशन जैसा अनुभव है

              गाना गाते समय मन एक जगह केंद्रित हो जाता है।आवाज़, बोल और सुर पर ध्यान लगाने से यह प्रक्रिया ध्यान (Meditation) जैसी हो जाती है। इसीलिए वैज्ञानिक इसे “सिंगिंग मेडिटेशन” भी कहते हैं।

              वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि गाना गाने से— तनाव घटता है,खुशी बढ़ती है,भावनाएं स्थिर होती हैं,दिमाग सक्रिय रहता है,शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। इसलिए गाना केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि प्राकृतिक थेरेपी है, जो हमें अंदर से शांत, खुश और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती है।

              Pradeep Pandey

              A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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