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44 की उम्र और हाथ में वही पुराना रैकेट- कोर्ट पर फिर दहाड़ेंगी सेरेना विलियम्स

44 की उम्र और हाथ में वही पुराना रैकेट- कोर्ट पर फिर दहाड़ेंगी सेरेना विलियम्स
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 2, 2026 1:23 अपराह्न
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लंदन। महिला टेनिस के इतिहास को अपने दम पर बदलने वाली सेरेना विलियम्स एक बार फिर पेशेवर टेनिस कोर्ट पर लौटने को तैयार हैं।  करीब चार साल तक खेल की दुनिया से दूर रहने के बाद उनका यह फैसला इस वक्त खेल जगत की सबसे बड़ी सनसनी बन चुका है। टेनिस फैंस के लिए तो यह किसी लॉटरी लगने जैसा है, क्योंकि अब तक उनकी वापसी को लेकर सिर्फ हवा-हवाई बातें ही हो रही थीं।

महिला टेनिस संघ  ने भी इस खबर पर पक्की मुहर लगा दी है। सेरेना लंदन के मशहूर क्वीन्स क्लब टूर्नामेंट से अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। हालांकि, वह सीधे सिंगल्स में नहीं उतरेंगी; वह कनाडा की 19 साल की उभरती हुई खिलाड़ी विक्टोरिया म्बोको के साथ महिला युगल में जोड़ी बनाएंगी। मुकाबला ग्रास कोर्ट पर होना है, और यह तो हर कोई जानता है कि ग्रास कोर्ट पर सेरेना का सिक्का किस कदर चलता है।

2022 का वो भावुक मैच: जब लगा कि ‘द एंड’ हो गया

फ्लैशबैक में चलें तो साल 2022 का यूएस ओपन याद आता है। वही आखिरी मौका था जब दुनिया ने सेरेना को कोर्ट पर पसीना बहाते देखा था। उस मैच के बाद जब वो रोते हुए इंटरव्यू दे रही थीं, तो पूरी दुनिया की आंखें नम थीं। लगा कि कहानी खत्म, टेनिस को उन्होंने हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

लेकिन सेरेना ने उस वक्त भी पूरे विदाई भाषण में कभी भी ‘रिटायरमेंट’ या ‘संन्यास’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल खुलकर किया ही नहीं था। वो बस एक लंबा ब्रेक था। 

अंदर ही अंदर पक रही थी खिचड़ी, फिर खुद ही ले लिए मजे

देखा जाए तो यह वापसी इतनी अचानक भी नहीं है। पिछले तीन-चार महीनों से टेनिस के गलियारों में कुछ सुगबुगाहट चल रही थी। कुछ लोगों ने सेरेना को गुपचुप तरीके से कोर्ट पर कड़ी ट्रेनिंग करते और पसीना बहाते देख लिया था। बात तब और पक्की हो गई जब उन्होंने एंटी-डोपिंग प्रोग्राम में चुपचाप अपना नाम दोबारा दर्ज करवा दिया। अब ज़ाहिर सी बात है, कोई खिलाड़ी बिना वजह तो डोपिंग टेस्ट के झंझटों को गले नहीं लगाएगा। 

खेल के पंडित तभी समझ गए थे कि सेरेना के दिमाग में कोई बड़ा तूफान चल रहा है। और अब, वो सस्पेंस खत्म हो चुका है।जैसे ही यह खबर आधिकारिक हुई, सेरेना ने भी अपने ही अंदाज में सोशल मीडिया पर फैंस की चुटकी ली। उन्होंने एक मजेदार वीडियो शेयर किया जिसमें उनका फोन लगातार बज रहा है—मानो मैसेजेस और कॉल्स का सैलाब आ गया हो। वीडियो के अंत में वो कैमरे की तरफ देखकर अपनी वही जानी-पहचानी मुस्कान के साथ कहती हैं, “अब तो मुझे सच में अपना नंबर बदलना पड़ेगा, क्योंकि हर कोई बस एक ही सवाल पूछ रहा है!” यह वीडियो आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया।

क्वीन्स क्लब तो बस झांकी है, असली निशाना तो विंबलडन है!

टेनिस के जानकारों का मानना है कि सेरेना का क्वीन्स क्लब को चुनना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। ग्रास कोर्ट पर सेरेना का जो रिकॉर्ड है, उसके आगे इतिहास के बड़े-बड़े धुरंधर पानी भरते नजर आते हैं। अकेले विंबलडन में उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे सात बार सिंगल्स का खिताब अपने नाम किया है।इसीलिए एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि सेरेना की ये ‘घर वापसी’ सिर्फ किसी एक छोटे टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहने वाली। भले ही उन्होंने सिंगल्स खेलने पर अभी अपने पत्ते न खोले हों, लेकिन क्वीन्स क्लब के जरिए वो ग्रास कोर्ट पर अपनी फिटनेस और टाइमिंग को परखना चाहती हैं। उनका असली टारगेट तो इसके ठीक बाद होने वाला विंबलडन ही है। अगर वहां सब कुछ उनकी प्लानिंग के मुताबिक रहा, तो वो सिंगल्स में भी तहलका मचाने से पीछे नहीं हटेंगी।

जूनियर खिलाड़ियों की तो निकल पड़ी!

44 साल की इस लीजेंड का कोर्ट पर उतरना सिर्फ फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि आज की नई जनरेशन की खिलाड़ियों के लिए भी किसी सपने जैसा है। आज जो लड़कियां डब्ल्यूटीए सर्किट में खेल रही हैं, वो सेरेना के मैच देख-देखकर ही बड़ी हुई हैं। उनके लिए सेरेना के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करना या नेट के दूसरी तरफ खड़े होना ही लाइफ-चेंजिंग एक्सपीरियंस है।

विशेषकर कनाडा की युवा विक्टोरिया म्बोको की तो जैसे किस्मत का ताला ही खुल गया है। ज़रा सोचिए, जिस खिलाड़ी के नाम 23 ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब दर्ज हों, जो टेनिस की जीती-जागती यूनिवर्सिटी हो, उसके साथ जोड़ी बनाकर कोर्ट पर उतरना किसी भी युवा खिलाड़ी के करियर को रॉकेट की रफ्तार दे सकता है। विक्टोरिया के लिए यह प्रेशर से कहीं ज्यादा जिंदगी का सबसे बड़ा सबक होने वाला है।

उम्र तो बस एक नंबर है, सेरेना ने फिर सच कर दिखाया

सच तो ये है कि 44 साल की उम्र में, जब शरीर साथ छोड़ना शुरू कर देता है और लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं। लेकिन नें हमेशा नामुमकिन को मुमकिन किया है।यही वजह है कि दुनिया इस वक्त इसे सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी के तौर पर नहीं देख रही, बल्कि इसे इंसानी जज्बे और कभी न टूटने वाले हौसले की मिसाल मान रही है। अब सबकी नजरें क्वीन्स क्लब टूर्नामेंट पर टिकी हैं, जहां यह ‘सुपरमॉम’ एक बार फिर हाथ में रैकेट थामकर अपनी सल्तनत वापस पाने के लिए कोर्ट पर दहाड़ती नजर आएगी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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