मई का महीना भारत में पारंपरिक रूप से प्रचंड गर्मी और ‘लू’ (Heatwave) के लिए जाना जाता है। हालांकि वर्ष 2026 का यह समय अपनी मौसमी विविधता के कारण विशेष चर्चा में है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन और उपग्रह चित्रों के विश्लेषण के अनुसार 5 मई 2026 मंगलवार को भारत के विभिन्न हिस्सों में विरोधाभासी मौसम देखने को मिलेगा जहाँ एक तरफ उत्तर-पूर्व में भारी वर्षा का तांडव होगा वहीं पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सूर्य की तपिश अपने चरम पर होगी।
राष्ट्रीय सारांश – एक नज़र में 5 मई का मौसम
5 मई 2026 को भारत का मौसम मुख्य रूप से तीन बड़े कारकों से प्रभावित रहेगा
- बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी – जो उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत में भारी वर्षा का कारण बनेगी।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) – जो उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालयी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा और ओलावृष्टि लाएगा।
- स्थानीय तापीय विषमता – जिसके कारण मध्य और दक्षिण भारत के कुछ आंतरिक क्षेत्रों में छिटपुट गरज-चमक की गतिविधियाँ (Pre-monsoon showers) होंगी।
कुल मिलाकर भारत के 60% से अधिक हिस्सों में तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम रहने की संभावना है जो मई के लिहाज से एक राहत की बात है।
क्षेत्रवार विस्तृत पूर्वानुमान
उत्तर-पूर्वी भारत – भारी वर्षा और भूस्खलन की चेतावनी
5 मई को सबसे अधिक मौसमी सक्रियता उत्तर-पूर्वी राज्यों में देखी जाएगी।
- राज्य – असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।
- पूर्वानुमान – इन राज्यों में ‘व्यापक’ (Widespread) वर्षा होने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के कुछ हिस्सों में ‘अत्यधिक भारी वर्षा’ (Heavy to Very Heavy Rain) का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
- प्रभाव – बिजली गिरने (Lightning) और 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslides) की प्रबल संभावना है।
पूर्वी भारत – उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
- पूर्वानुमान – सिक्किम और उत्तरी बंगाल (दार्जीलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी) में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। दक्षिण बंगाल के जिलों में शाम के समय गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं जिसे स्थानीय स्तर पर ‘काल बैसाखी’ के रूप में देखा जा सकता है।
- ओडिशा और बिहार – बिहार के उत्तरी हिस्सों में बादलों की आवाजाही रहेगी जबकि दक्षिणी बिहार और ओडिशा में उमस भरी गर्मी का अनुभव होगा।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत – पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
- राज्य – जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान।
- पूर्वानुमान – एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण 5 मई को पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश जारी रहेगी। मैदानी इलाकों (दिल्ली-NCR, राजस्थान) में दोपहर बाद धूल भरी आंधी (Dust storm) और गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा होने के आसार हैं।
- तापमान – राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर को छोड़कर शेष उत्तर भारत में पारा 40°C के नीचे रहने की उम्मीद है।
दक्षिण भारत – गर्म और आर्द्र मौसम
- राज्य – तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना।
- पूर्वानुमान – केरल और तटीय कर्नाटक में मानसून पूर्व की वर्षा (Pre-monsoon rain) जारी रहेगी। हालांकि तमिलनाडु और रायलसीमा क्षेत्र में गर्मी और उमस (Hot and Humid) बनी रहेगी। रात के तापमान में सामान्य से 2-3 डिग्री की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
पश्चिम भारत – लू (Heatwave) का खतरा
- राज्य – गुजरात और महाराष्ट्र (विदर्भ, मराठवाड़ा)।
- पूर्वानुमान – गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र और महाराष्ट्र के विदर्भ में 5 मई को लू की स्थिति बनी रह सकती है। यहाँ तापमान 42°C से 44°C के बीच रहने का अनुमान है।
कृषि और किसानों के लिए विशेष परामर्श
IMD के अनुसार 5 मई की मौसम स्थितियों को देखते हुए किसानों के लिए निम्नलिखित सुझाव महत्वपूर्ण हैं
- कटी हुई फसलों का भंडारण – उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम भारत के किसान कटी हुई फसलों (विशेषकर गेहूं और सरसों) को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें क्योंकि अचानक होने वाली वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है।
- कीटनाशकों का छिड़काव – जिन क्षेत्रों में वर्षा का पूर्वानुमान है वहां कीटनाशकों या उर्वरकों के छिड़काव से बचें।
- बागवानी – आम और लीची के बागों में तेज हवाओं से फलों के गिरने का खतरा है। यदि संभव हो तो सुरक्षात्मक जाल का प्रयोग करें।
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आम जनता के लिए सुरक्षा सुझाव और सावधानियां
5 मई को संभावित मौसमी खतरों को देखते हुए संक्षिप्त सुरक्षा गाइड
भारी वर्षा और आंधी के समय (उत्तर-पूर्व और उत्तर भारत)
- आकाशीय बिजली से बचाव – गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। बिजली के खंभों और धातु की वस्तुओं से दूर रहें। अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।
- यात्रा सावधानी – उत्तर-पूर्वी राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों में यदि आवश्यक न हो तो यात्रा टाल दें। जलभराव वाले क्षेत्रों में वाहन चलाने से बचें।
गर्मी और लू के समय (पश्चिम और मध्य भारत)
- हाइड्रेशन – पर्याप्त पानी पिएं भले ही प्यास न लगी हो। ओआरएस (ORS), लस्सी, नींबू पानी और फलों के रस का सेवन करें।
- बाहर निकलने का समय – दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो सिर को सफेद सूती कपड़े, टोपी या छतरी से ढकें।
- पहनावा – हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
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पर्यावरणीय और जल संसाधन प्रभाव
मई 2026 में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान भारत के जल संसाधनों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 5 मई की बारिश से कई जलाशयों और नदियों के जल स्तर में सुधार होगा जो आगामी खरीफ सीजन के लिए मिट्टी की नमी (Soil Moisture) को बनाए रखने में मदद करेगा। हालांकि शहरी क्षेत्रों में खराब जल निकासी (Drainage) के कारण ‘अर्बन फ्लडिंग’ का खतरा भी बना रहेगा जिसके लिए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
5 मई 2026 का दिन भारत के लिए ‘विविधतापूर्ण मौसम’ का दिन होगा। जहाँ एक ओर उत्तर-पूर्वी राज्यों को ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट के साथ जल-प्रलय जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है वहीं उत्तर और मध्य भारत को धूल भरी आंधियों के बाद मिलने वाली ठंडी हवाओं से राहत मिलेगी। केवल गुजरात और विदर्भ के कुछ हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे।
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे IMD के ‘सचेत’ (Sachet) ऐप और स्थानीय मौसम केंद्रों की सूचनाओं पर निरंतर नजर रखें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।नोट – यह रिपोर्ट उपलब्ध IMD के आंकड़ों और प्रवृत्तियों के आधार पर तैयार की गई है। वास्तविक मौसम में स्थानीय कारकों के कारण मामूली बदलाव संभव है।







