मध्यप्रदेश का पन्ना पूरी दुनियां में अपनें बेशकीमती हीरों के लिये जाना जाता है। कई बार पन्ना से ऐसी खबरें आती है जब यहां की धरती फकीर की झोली को भी हीरा देकर कुछ ही पलों में अमीर बना देती है। लेकिन मध्यप्रदेश का पन्ना इस बार किसी हीरे के लिये नहीं, बल्कि “अनारकली” की वजह से चर्चाओं में है।
जीं हां यह अनारकली कोई महिला या युवती नहीं बल्कि प्रसिद्ध पन्ना टाईगर रिजर्व की मादा हथिनी है। जिसनें जुड़वा बच्चों को जन्म देकर न सिर्फ हैरत में डाल दिया है, बल्कि पन्ना टाईगर रिजर्व के इतिहास में एक अलग तरह की घटना जोड़ दी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माता हाथी, अनारकली, ने दो प्यारी जुड़वां बेटियों को जन्म दिया है। यह एक अद्वितीय और संगीतमय घटना है। अब रिजर्व में हाथियों की कुल संख्या वृद्धि होकर 21 हो गई है। अनारकली को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है ताकि वह अपनी बेटियों का अच्छे से ध्यान रख सके।
57 वर्ष की है “अनारकली”
पन्ना टाइगर रिजर्व की 57 वर्षीया हथिनी अनारकली ने दो मादा जुड़वां शावकों को जन्म दिया है, वन्यजीवों के साथ ही वन्यप्राणी प्रेमियों के लिए एक दुर्लभ घटना है। पन्ना टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार है जब किसी हथिनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है।
जानकारी सामनें आई है कि अनारकली नें शनिवार को दोनों मादा शावकों को जन्म दिया जिनके बीच लगभग तीन घंटे का अंतराल है। यह खबर जैसे पार्क प्रबंधन को लगी सभी नें आश्चर्य जताते हुये अनारकली और शावकों की देखरेख के इंतजाम में जुट गये। वहीं जुड़वा शावको के इस जन्म की घटना को वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने ‘प्रकृति का चमत्कार’ और एक दुर्लभ घटना’ बताया।

वन्यजीव चिकित्सक नें इस घटना के बाद यह भी कहा कि एक संरक्षित वातावरण में हथिनी द्वारा जुड़वा बच्चों को जन्म दिया जाना असामान्य घटना है। साथ ही इस घटना से इस बात को भी समझा जा सकता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व का वातावरण वन्यजीवों के लिये सकारात्म रहन सहन, खानपान होनें के साथ उन्हें एक स्वस्थ व अनुकूल परिवेश देता है।
जहां वन्यजीव न केवल अपनें आपको बेहद सुरक्षित महसूस करते हैं बल्कि इस संरक्षित क्षेत्र में भी उन्हें वह तमाम अनुकूल परिस्थियां मिलती है जो उनके रहवास के लिये उपयुक्त मानी जा सकती है।
बाघों की आबादी के लिये भी प्रसिद्ध है पीटीआर
पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) बाघों की आबादी के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, लेकिन यहां हाथियों की भी एक मजबूत आबादी है। और इन दोनों जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद इनकी संख्या अब 21 बताई जा रही है। पीटीआर अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब PTR किसी हथिनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है।

इस खबर ने वन कर्मचारियों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है। PTR फील्ड निदेशक नरेश सिंह यादव ने बताया कि बच्चों के लिए विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई है।
अनारकली है बेहद समझदार उसका है भरा पूरा परिवार*
पीटीआर में अनारकली का भरा पूरा परिवार है। अब तक यह 6 शावकों को जन्म दे चुकी है। लेकिन यह पहली बार है जब उसने जुड़वां मादा शावकों को जन्म दिया है। पीटीआर के वनकर्मी बताते है कि अनारकली अपनी तेज अंतर्दृष्टि के लिये जानी जाती है, वन सुरक्षा में अनारकली का बड़ा योगदान रहता है।
वन कर्मचारियों का कहना है कि यदि उसे शिकारियों या अवैध लकड़हारों की उपस्थिति का आभास होता है, तो वह तुरंत प्रतिक्रिया करती है इतना ही नहीं कभी-कभी तो वह उन्हें डराने के लिए अपनी सूंड से पत्थर फेंकती है।
शुद्ध घी के लड्डू के साथ दिया जा रहा पौष्टिक आहार
प्रसूता अनारकली के जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद वन अमला भी उसकी देखरेख में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा। वन अधिकारियों द्वारा अनारकली के सेहत के लिये तमाम इंतजाम किये गये है और उसे पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। बताया गया कि अनारकली को गन्ना, गुड़ दलिया के साथ ही शुद्ध घी के लड्डू सहित विभिन्न पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। इतना ही नहीं नवजात दोनों शावकों की देखभाल और पोषण के लिए भी विशेष व्यवस्था कि गई है और इसके लिये वन अमले की एक विशेष टीम समर्पित होकर सेवा में लगी है।
1986 में पन्ना लाई गई थी अनारकली
जानकारी सामनें आई है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में अनारकली सन् 1986 में लाई गई थी, जिसके बाद से ही वह पन्ना के हरे भरे वातावरण में शामिल हो गई बल्कि पन्ना टाईगर रिजर्व के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानें लगी। वैसे भी किसी भी टाइगर रिजर्व में गश्त और बचाव अभियान की रीढ़ के रुप नें हाथी जाना जाता है। पन्ना की अनारकली इसका अहम हिस्सा भी है और उसका योगदान भी है।
मानसून के महीनों में जब जंगलों के रास्ते कीचड़ व फिसलन भरे हो जाते हैं और वहां वाहनों का जाना खतरे से खाली नहीं होता और यह रास्ते दुर्गम हो जाते हैं, तो अनारकली जैसी हथनियां गश्त और बचाव अभियानों की रीढ़ बन जाती हैं।
इन हाथियों के द्वारा बाघों की ट्रैकिंग (उनका भौतिक सत्यापन) क्षेत्र की निगरानी, शिकार-रोधी निगरानी और यहां तक कि कठिन बचाव मिशनों में भी सहायता करती हैं। अनारकली द्वारा इस जुड़वा जन्म को एक शुभ संकेत के रुप में देखा जा रहा है जो भविष्य में पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण में अपना योगदान देगें।
देश का 22 वां टाइगर रिजर्व है पीटीआर
पन्ना टाइगर रिजर्व, भारत का 22वां बाघ अभयारण्य और मध्य प्रदेश का पांचवां अभयारण्य है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित पन्ना और छतरपुर जिलों में फैले विशाल वन क्षेत्रों को कवर करता है। PTR अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर न केवल बाघों के पुन: परिचय की सफलता के लिए, बल्कि अपने मगरमच्छ पुनर्वास कार्यक्रम और गिद्ध संरक्षण प्रयासों के लिए भी जाना जाता है।







