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AIADMK में नेतृत्व को लेकर आर-पार की जंग पलानीस्वामी के खिलाफ लामबंद हुए असंतुष्ट विधायक

AIADMK में नेतृत्व को लेकर आर-पार की जंग पलानीस्वामी के खिलाफ लामबंद हुए असंतुष्ट विधायक
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 12, 2026 1:00 अपराह्न
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तमिलनाडु की सियासत में दशकों तक दबदबा रखने वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर सुलग रहा असंतोष अब ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। 

पार्टी महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए अब कई दिग्गज नेता और विधायक खुलकर उनके सामने खड़े हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो पार्टी में एक बड़ी टूट हो सकती है।

आंतरिक कलह और नेतृत्व पर उठते गंभीर सवाल

विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी की चूलें हिला दी हैं। चुनाव हारने के बाद से ही जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं में यह धारणा बन रही थी कि ईपीएस के नेतृत्व में पार्टी अपनी पहचान खो रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के लगभग 30 विधायक इस समय ईपीएस की कार्यशैली से बेहद खफा हैं। इन विधायकों का मानना है कि पार्टी के महत्वपूर्ण फैसले बंद कमरों में लिए जा रहे हैं और संगठन में जमीनी नेताओं की अनदेखी की जा रही है।

असंतोष का आलम यह है कि नाराज विधायकों का एक बड़ा धड़ा अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी का एक धड़ा अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलनाडु वेत्री कड़गम’ (टीवीके) के प्रति भी नरम रुख दिखा रहा है। इसे ईपीएस के लिए सीधा संकेत माना जा रहा है कि यदि उन्होंने अपनी रणनीति नहीं बदली, तो पार्टी के हाथ से सत्ता ही नहीं बल्कि उसके विधायक भी फिसल सकते हैं।

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विधायक दल के नेता पद को लेकर खींचतान हुई सार्वजनिक

एआईएडीएमके के भीतर चल रही यह जंग उस वक्त सार्वजनिक मंच पर आ गई, जब विधानसभा में विधायक दल के नेता के चयन को लेकर दो फाड़ नजर आए। ईपीएस गुट ने जहां विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखकर पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखने यानी खुद को ही नेता बनाए रखने की पैरवी की, वहीं विपक्षी धड़े ने अपनी अलग रणनीति पेश कर सबको चौंका दिया।

असंतुष्ट गुट ने एस.पी. वेलुमणि को विधायक दल का नेता और सी. विजयभास्कर को व्हिप बनाने का प्रस्ताव रख दिया है। एक ही पार्टी से दो अलग-अलग दावों ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने भी तकनीकी पेंच फंसा दिया है। वरिष्ठ नेताओं का इस तरह दो गुटों में बंट जाना यह साफ दर्शाता है कि अब समझौता केवल बातचीत से मुमकिन नहीं लग रहा। यह खींचतान सिर्फ पदों की नहीं, बल्कि पार्टी पर वर्चस्व कायम करने की लड़ाई बन चुकी है।

चुनावी हार और टीवीके का बढ़ता प्रभाव

पार्टी के भीतर इस बगावत की मुख्य वजह हालिया चुनाव परिणाम हैं। एआईएडीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में इस बार बड़ी सेंधमारी देखने को मिली है। सबसे ज्यादा चिंता का विषय अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके का उभार है। राजनीति में नए होने के बावजूद विजय ने जिस तरह युवाओं और न्यूट्रल वोटर्स को अपनी ओर खींचा है, उसने एआईएडीएमके के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।पार्टी के कई रणनीतिकारों का मानना है कि संगठन में तालमेल की भारी कमी है।

 चुनावी हार के बाद कोई ठोस समीक्षा करने के बजाय नेतृत्व ने यथास्थिति बनाए रखने की कोशिश की, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा। असंतुष्ट नेताओं का तर्क है कि अगर पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखना है, तो नेतृत्व में व्यापक बदलाव और नई सोच की जरूरत है।

विधानसभा सत्र के दौरान भी दिखी बिखराव की तस्वीर

पार्टी में बढ़ती दूरी का अंदाजा नई विधानसभा के पहले दिन ही लग गया था। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दोनों गुटों के विधायक अलग-अलग समूहों में बैठे नजर आए। उनके बीच औपचारिक बातचीत तक नहीं दिखी। विधानसभा अध्यक्ष ने फिलहाल इस गुटबाजी पर कोई भी टिप्पणी करने या जल्दबाजी में निर्णय लेने से परहेज किया है, क्योंकि मामला दलबदल कानून और तकनीकी पेचीदगियों से जुड़ा हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि जयललिता के जाने के बाद पार्टी ने कई बार बिखराव देखा है, चाहे वह ओपीएस-ईपीएस का विवाद हो या शशिकला का मामला। लेकिन इस बार की चुनौती अलग है क्योंकि पार्टी के पास न तो सत्ता है और न ही कैडर को जोड़े रखने वाला कोई सर्वमान्य चेहरा।

पार्टी के अस्तित्व पर मंडराता संकट

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से दो ध्रुवीय रही है, लेकिन अब तीसरे विकल्प के तौर पर टीवीके की मौजूदगी ने एआईएडीएमके की रातों की नींद उड़ा दी है। ईपीएस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को एकजुट रखने की है। यदि वे विधायकों की नाराजगी दूर करने में विफल रहते हैं, तो राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन एआईएडीएमके के भविष्य और तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित होंगे।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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