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तमिलनाडु में सरकार बनाने की जोड़-तोड़ शुरू- सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी फंसी विजय की TVK सहयोगियों पर टिकी नजर

तमिलनाडु में सरकार बनाने की जोड़-तोड़ शुरू- सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी फंसी विजय की TVK सहयोगियों पर टिकी नजर
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 7, 2026 4:46 अपराह्न
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चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति को एक दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) राज्य में सबसे बड़ी ताकत बनकर तो उभरी है, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा न छू पाने की वजह से सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विजय जरूरी विधायकों का समर्थन कैसे जुटाते हैं।234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित नतीजों में टीवीके इस आंकड़े के बेहद करीब तो पहुंच गई है, लेकिन बहुमत की दहलीज पार करने से कुछ कदम पीछे रह गई है जिसने सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा दिया है। अब पूरी लड़ाई उस ‘नंबर गेम’ पर टिक गई है, जो यह तय करेगा कि चेन्नई के राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ कौन लेगा।

चेन्नई में बैठकों का दौर और रणनीतियों की बिसात

जैसे ही चुनाव के नतीजे पूरी तरह साफ हुए, चेन्नई के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। विजय के निवास और पार्टी दफ्तर पर समर्थकों का हुजूम तो है ही, लेकिन बंद कमरों में रणनीतिकारों की बैठकें भी लगातार जारी हैं। सूत्रों की मानें तो टीवीके के बड़े नेता अब उन निर्दलीय विधायकों और छोटे क्षेत्रीय दलों के संपर्क में हैं, जिन्होंने 2 से 5 सीटें जीती हैं। ये छोटे दल अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं और उनकी पूछ अचानक बढ़ गई है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय की टीम उन दलों को साधने की कोशिश कर रही है जो विचारधारा के स्तर पर द्रमुक(DMK )या अन्नाद्रमुक (AIADMK) के कट्टर विरोधी रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ दल बाहर से समर्थन देने की शर्त पर बातचीत की मेज पर बैठे हैं। हालांकि, अभी तक किसी ने भी आधिकारिक तौर पर समर्थन का ऐलान नहीं किया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक अजीब सा सन्नाटा और तनाव बना हुआ है।

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डीएमके और एआईएडीएमके की खामोशी के पीछे का तूफान

राज्य के दो बड़े दिग्गज—एम.के. स्टालिन की डीएमके और पलानीस्वामी की एआईएडीएमके—फिलहाल रक्षात्मक मुद्रा में दिख रहे हैं, लेकिन वे मैदान से बाहर नहीं हुए हैं। दोनों दलों के मुख्यालयों में बंद कमरों में बैठकें हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि अगर विजय बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं, तो ये पुरानी पार्टियां मिलकर या छोटे दलों को तोड़कर एक नया गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकती हैं।

डीएमके के लिए यह नतीजे आत्ममंथन का विषय हैं, क्योंकि सत्ता में होने के बावजूद वे अपनी जमीन बचाने में संघर्ष करते दिखे। वहीं, एआईएडीएमके के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई बनती जा रही है।

कांग्रेस के रुख पर टिकी सबकी नजरें

नतीजों के बाद सबसे बड़ी सुगबुगाहट कांग्रेस पार्टी को लेकर है। चर्चा है कि कांग्रेस के निर्वाचित विधायक टीवीके को समर्थन दे सकते हैं। यदि कांग्रेस विजय का साथ देती है, तो टीवीके की राह काफी आसान हो जाएगी। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान इस पर बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। दिल्ली से लेकर चेन्नई तक मंथन जारी है कि क्या एक नई पार्टी के साथ गठबंधन करना भविष्य की राजनीति के लिए सही होगा?

कांग्रेस के अलावा, कुछ क्षेत्रीय दल जो अब तक डीएमके गठबंधन का हिस्सा थे, वे भी बदलते समीकरणों को देखते हुए विजय के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

राजभवन की भूमिका और संवैधानिक प्रक्रिया

तमिलनाडु के राज्यपाल की भूमिका अब सबसे अहम हो गई है। संविधान के जानकारों का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल ने विजय को मौका तो दिया है, लेकिन ‘संख्या बल’ के बिना उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई जा सकती। विजय को यह साबित करना होगा कि उनके पास न केवल उनकी पार्टी के विधायक हैं, बल्कि अन्य साथियों को मिलाकर 118 का आंकड़ा पार हो रहा है।अगले 72 घंटे तमिलनाडु की भावी राजनीति की दिशा तय करेंगे। यदि विजय निर्दलीयों और छोटे दलों को एकजुट करने में सफल रहे, तो तमिलनाडु में एक नए युग की शुरुआत होगी। और यदि वे चूक गए, तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता या फिर किसी अप्रत्याशित गठबंधन की सरकार देखने को मिल सकती है।

बदलाव की बयार

यह चुनाव केवल हार-जीत का फैसला नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की उस राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है जहां अब तक केवल दो ही झंडों का बोलबाला था। विजय की टीवीके ने यह साबित कर दिया है कि अगर मुद्दा और चेहरा सही हो, तो जनता विकल्प चुनने में देर नहीं करती।

चेन्नई से लेकर मदुरै तक, हर तरफ बस एक ही सवाल है— “क्या थलापति (विजय) बनेंगे अगले मुख्यमंत्री?” इसका जवाब जल्द ही मिलने वाला है, लेकिन तब तक तमिलनाडु की राजनीति में हलचल कम होने वाली नहीं है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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