गर्मियों का मौसम आते ही भारतीय रसोइयों में अचार बनाने की खुशबू महकने लगती है। आम और नींबू के अचार तो सभी बनाते हैं लेकिन एक ऐसा अचार है जो अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है वह है लसोड़े का अचार। इसे उत्तर भारत में ‘लसोड़ा’, राजस्थान और गुजरात में ‘गोंदा’ और कहीं-कहीं ‘निसोरा’ भी कहा जाता है।
लसोड़ा भले ही छूने में चिपचिपा हो, लेकिन मसालों के मेल के बाद यह इतना स्वादिष्ट बनता है कि आप अपनी उंगलियां चाटते रह जाएंगे। आइए, जानते हैं पारंपरिक तरीके से लसोड़े का अचार बनाने की विधि और इसे साल भर सुरक्षित रखने के खास राज।
लसोड़े का अचार – पारंपरिक रेसिपी और महत्वपूर्ण टिप्स
लसोड़े का अचार बनाने के लिए धैर्य और सही तकनीक की आवश्यकता होती है। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप विधि दी गई है
आवश्यक सामग्री (Ingredients)
| सामग्री | मात्रा |
| ताजे लसोड़े (गोंदा) | 1 किलो |
| कच्चा आम (कद्दूकस किया हुआ या छोटे टुकड़े) | 250 ग्राम (खटास के लिए) |
| सरसों का तेल | 500 मिली (आवश्यकतानुसार) |
| सौंफ (दरदरी पिसी हुई) | 4 बड़े चम्मच |
| पीली सरसों या राई की दाल | 4 बड़े चम्मच |
| मेथी दाना | 2 बड़े चम्मच |
| हल्दी पाउडर | 2 बड़े चम्मच |
| लाल मिर्च पाउडर | 3-4 बड़े चम्मच (स्वादानुसार) |
| कलौंजी | 1 छोटा चम्मच |
| हींग | ½ छोटा चम्मच |
| नमक | 100-150 ग्राम (स्वाद और संरक्षण के लिए) |
बनाने की विधि (Step-by-Step Process)
लसोड़े की सफाई और उबालना – सबसे पहले लसोड़ों को अच्छी तरह धो लें। ध्यान रहे कि उबालने से पहले इनकी टोपी (Caps) न हटाएं, वरना इनके अंदर पानी भर जाएगा और अचार खराब हो सकता है।
- एक बड़े पतीले में पानी उबालें और उसमें आधा चम्मच हल्दी डालें।
- जब पानी उबलने लगे, तो लसोड़े डालें और 5-7 मिनट तक पकाएं।
- जब लसोड़े थोड़े नरम हो जाएं (पूरी तरह गलने नहीं चाहिए), तो उन्हें छान लें।
सुखाना – उबले हुए लसोड़ों को एक सूती कपड़े पर फैला दें। जब ये ठंडे हो जाएं, तब इनकी टोपी सावधानी से हटाएं। अब इन्हें 3-4 घंटे की तेज धूप में सुखाएं ताकि इनकी ऊपरी सतह की नमी पूरी तरह खत्म हो जाए। नमी ही अचार खराब होने का मुख्य कारण होती है।
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मसाला तैयार करना
- मेथी दाना और सौंफ को हल्का सा भून लें और दरदरा पीस लें।
- एक बड़े बर्तन में पीली सरसों, सौंफ, मेथी, हल्दी, मिर्च, कलौंजी और हींग मिलाएं।
- इसमें थोड़ा सा गरम करके ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालें ताकि मसाला एक पेस्ट की तरह बन जाए।
भरावन और मिक्सिंग – अगर आप चाहें तो लसोड़े के बीच में चीरा लगाकर गुठली निकाल सकते हैं और मसाला भर सकते हैं। या फिर, लसोड़ों को सीधे तैयार मसाले और कद्दूकस किए हुए कच्चे आम के साथ अच्छी तरह मिला दें। आम की खटास लसोड़े के चिपचिपेपन (Lace) को खत्म करने में मदद करती है।
साल भर सुरक्षित रखने के ‘प्रो-टिप्स’ (Storage Tips)
लसोड़े का अचार लंबे समय तक चले, इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें
- तेल का स्तर – अचार को हमेशा कांच या चीनी मिट्टी के जार में रखें। जार भरने के बाद उसमें इतना सरसों का तेल डालें कि अचार पूरी तरह तेल में डूबा रहे। तेल एक प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव (संरक्षक) का काम करता है।
- कांच के जार का उपयोग – अचार रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें। कांच के जार को पहले उबलते पानी से धोएं और धूप में अच्छी तरह सुखा लें (Sterilize करें)।
- गीले हाथों से बचें – अचार निकालते समय हमेशा सूखे और साफ चम्मच का प्रयोग करें। जरा सी भी नमी पूरे जार को फफूंद (Fungus) लगा सकती है।
- धूप दिखाना – अचार तैयार होने के बाद इसे 4-5 दिनों तक रोज 2-3 घंटे की धूप दिखाएं। इससे मसाले अच्छी तरह पक जाते हैं और स्वाद बढ़ जाता है।
- नमक की मात्रा – अचार में नमक की मात्रा सामान्य खाने से थोड़ी ज्यादा रखनी चाहिए, क्योंकि नमक भी इसे खराब होने से बचाता है।
लसोड़े के अचार के फायदे
यह सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत के लिए भी बेहतरीन है
- पाचन में सहायक – इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है।
- जोड़ों के दर्द में राहत – लसोड़ा अपनी तासीर और गुणों के कारण जोड़ों के दर्द में फायदेमंद माना जाता है।
- एंटी-ऑक्सीडेंट – यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
नोट – लसोड़े का चिपचिपापन दूर करने के लिए इसमें अमचूर पाउडर या कच्चे आम का प्रयोग अवश्य करें। यह न केवल स्वाद बढ़ाएगा बल्कि इसकी ‘लेस’ को भी काट देगा।







