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बनारसी स्वाद और दादी-नानी के नुस्खे –  पारंपरिक लाल मिर्च का भरवा अचार बनाने की संपूर्ण विधि

बनारसी स्वाद और दादी-नानी के नुस्खे -  पारंपरिक लाल मिर्च का भरवा अचार बनाने की संपूर्ण विधि
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 8, 2026 7:59 अपराह्न
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लाल मिर्च का भरवा अचार भारतीय रसोइयों की शान है। सर्दियों के अंत और गर्मियों में जब बाजारों में सुर्ख लाल, मोटी और चमकदार मिर्चें नजर आने लगती हैं तो समझ लीजिए कि ‘अचार का सीजन’ आ गया है। यह अचार न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि दाल-चावल या परांठे के साथ यह एक संपूर्ण भोजन जैसा अनुभव देता है।

​यहाँ पारंपरिक तरीके से लाल मिर्च का भरवा अचार बनाने की विस्तृत विधि और इसे सालों-साल सुरक्षित रखने के लिए एक विस्तृत जानकारी दी गई है

​पारंपरिक बनारसी लाल मिर्च का भरवा अचार –  संपूर्ण मार्गदर्शिका

​आवश्यक सामग्री (Ingredients)

​एक उत्तम अचार की नींव उसकी सामग्री की गुणवत्ता पर टिकी होती है। हम यहाँ 1 किलोग्राम ताजी लाल मिर्च के हिसाब से माप देख रहे हैं

  • मुख्य सामग्री
    • ​ताजी मोटी लाल मिर्च – 1 किलो
    • ​सरसों का तेल (Pure Mustard Oil) –  500 मिली (लगभग)
    • ​नमक – 150 ग्राम (स्वाद और संरक्षण के लिए)
  • मसाला मिश्रण (Masala Mix)
    • ​सौंफ (Fennel Seeds) –  100 ग्राम
    • ​पीली/काली सरसों या राई (Mustard Seeds) – 100 ग्राम
    • ​मेथी दाना (Fenugreek Seeds) – 25 ग्राम
    • ​जीरा (Cumin Seeds) –  25 ग्राम
    • ​कलौंजी (Nigella Seeds) –  15 ग्राम (इसे पीसना नहीं है)
    • ​अजवाइन (Carom Seeds) – 15 ग्राम
    • ​आमचूर पाउडर (Dry Mango Powder) –  100 ग्राम (खटास के लिए अनिवार्य)
    • ​हल्दी पाउडर –  2 बड़े चम्मच
    • ​हींग (Asafoetida) –  1 छोटा चम्मच
    • ​काला नमक –  1 बड़ा चम्मच

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​पूर्व-तैयारी (The Preparation Phase)

​अचार बनाने की प्रक्रिया शुरू करने से कम से कम एक दिन पहले तैयारी जरूरी है

  • मिर्च का चयन –  हमेशा ऐसी मिर्च चुनें जो सख्त हों और जिनकी त्वचा चमकदार हो। मुरझाई हुई या दाग वाली मिर्च अचार को जल्दी खराब कर सकती हैं।
  • सफाई और सुखाना –  मिर्चों को अच्छी तरह धो लें। धोने के बाद इन्हें एक सूती कपड़े पर फैलाकर 3-4 घंटे की धूप दिखाएं ताकि इनकी बाहरी नमी पूरी तरह खत्म हो जाए। याद रखें नमी अचार की सबसे बड़ी दुश्मन है।
  • चीरा लगाना और बीज निकालना –  मिर्च के डंठल काटकर हटा दें। अब मिर्च के बीच में एक लंबा चीरा लगाएं। एक छोटे चम्मच की मदद से सावधानीपूर्वक अंदर के बीज निकाल लें। इन बीजों को फेंकें नहीं, इन्हें हम मसाले में मिलाएंगे।

 मसाला तैयार करने की विधि (Step-by-Step Process)

  • मसालों को भूनना – ​एक भारी तले की कड़ाही लें। इसमें सौंफ, मेथी, जीरा और अजवाइन को धीमी आंच पर हल्का भूनें। मसालों को तब तक भूनें जब तक उनमें से सौंधी खुशबू न आने लगे। ध्यान रहे, मसालों का रंग नहीं बदलना चाहिए, बस उनकी नमी खत्म करनी है।
  • दरदरा पीसना – भुने हुए मसालों को ठंडा होने दें। इसके बाद इन्हें मिक्सी में दरदरा (Coarse) पीस लें। अचार में एकदम बारीक पाउडर की जगह दरदरा मसाला ज्यादा स्वाद देता है। सरसों (राई) को बिना भूने अलग से दरदरा पीसें।
  • मिक्सिंग – ​एक बड़े बर्तन में पिसा हुआ मसाला, राई, हल्दी, आमचूर, नमक, काला नमक, हींग और निकाली गई मिर्च के बीज डाल दें। इसमें कलौंजी (मंगरेल) मिलाएं।
  • तेल का मिलान – ​लगभग 100 मिली सरसों तेल को धुआं उठने तक गर्म करें, फिर उसे गुनगुना होने दें। इस गुनगुने तेल को मसाले के मिश्रण में मिलाएं। तेल डालने से मसाला थोड़ा गीला और बांधने योग्य (Binding consistency) हो जाएगा।
  • ​मिर्च भरना (The Stuffing) – ​यह सबसे धैर्यपूर्ण कार्य है। प्रत्येक मिर्च को लें और तैयार मसाले को अंगूठे या एक पतली लकड़ी/चम्मच के पीछे के हिस्से की मदद से दबा-दबाकर भरें। मसाला ऊपर तक अच्छी तरह भरा होना चाहिए ताकि मिर्च अंदर से खोखली न रहे।

​ अचार को सुरक्षित करने की प्रक्रिया (Curing)

  • कंटेनर का चुनाव –  हमेशा कांच के मर्तबान या चीनी मिट्टी के बर्तन (Ceramic jars) का प्रयोग करें। प्लास्टिक के डिब्बों से बचें क्योंकि वे तेल और मसालों के साथ क्रिया कर सकते हैं। मर्तबान को उबले पानी से धोकर तेज धूप में सुखा लें।
  • तेल में डुबोना –  बाकी बचे हुए सरसों तेल को गर्म करके ठंडा कर लें। प्रत्येक भरी हुई मिर्च को तेल में डुबोएं और मर्तबान में व्यवस्थित रूप से रखते जाएं।
  • धूप दिखाना – मर्तबान का मुंह एक पतले सूती कपड़े से बांध दें। इसे कम से कम 7 से 10 दिनों तक तेज धूप में रखें। धूप अचार को प्राकृतिक रूप से ‘पकाती’ है और मसालों को मिर्च के अंदर तक पहुंचाती है।

​अचार को साल भर सुरक्षित रखने के प्रो-टिप्स (Preservation Tips)

​यदि आप चाहते हैं कि आपका अचार दो साल तक भी खराब न हो, तो इन नियमों का पालन करें

  • तेल का स्तर – अचार पकने के बाद, मर्तबान में इतना तेल जरूर होना चाहिए कि मिर्च पूरी तरह से तेल में डूबी रहें। तेल एक ‘नेचुरल सीलेंट’ का काम करता है जो फफूंद (Fungus) को लगने से रोकता है।
  • नमक की मात्रा –  नमक केवल स्वाद के लिए नहीं होता, यह एक संरक्षक (Preservative) है। नमक की मात्रा कम होने पर अचार जल्दी गलकर खराब हो सकता है।
  • गीले चम्मच से बचाव – अचार निकालने के लिए हमेशा सूखे और साफ चम्मच का प्रयोग करें। जरा सी नमी पूरे मर्तबान को खराब कर सकती है।
  • आमचूर का महत्व – लाल मिर्च में खुद की खटास नहीं होती। आमचूर पाउडर की अच्छी मात्रा अचार के स्वाद को संतुलित करती है और उसे लंबे समय तक ताजा रखती है।
  • सिरके का प्रयोग (Optional) – यदि आप बहुत गर्म और उमस वाले इलाके में रहते हैं, तो मसाला बनाते समय 2 चम्मच सफेद सिरका (Vinegar) डाल सकते हैं। यह फफूंद के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

​भरवा लाल मिर्च का अचार बनाना एक कला है जिसमें थोड़ा समय और धैर्य लगता है, लेकिन इसका परिणाम बाजार में मिलने वाले किसी भी डिब्बाबंद अचार से कहीं बेहतर होता है। जब आप अपने हाथों से मसालों को भूनकर और उन्हें मिर्च में भरकर धूप में रखते हैं, तो वह केवल भोजन नहीं, बल्कि एक परंपरा बन जाता है।

​इस विधि का पालन करके आप न केवल एक स्वादिष्ट अचार तैयार करेंगे, बल्कि घर के बड़ों की उस पारंपरिक विरासत को भी जीवित रखेंगे जो भारतीय खानपान की पहचान है। इस बार गर्मियों में इस तीखे-चटपटे सफर को अपनी रसोई का हिस्सा जरूर बनाएं

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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