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सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर चला सरकारी डंडा X ने भारत में अकाउंट किया ब्लॉक

सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर चला सरकारी डंडा X ने भारत में अकाउंट किया ब्लॉक
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 22, 2026 12:16 अपराह्न
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नई दिल्ली।सोशल मीडिया के गलियारों से शुरू हुआ एक डिजिटल व्यंग्य अभियान अब देश के सबसे बड़े राजनीतिक और कानूनी विवादों में से एक बन चुका है। पिछले कुछ हफ्तों से इंटरनेट पर धूम मचाने वाले पेज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर केंद्र सरकार के निर्देश के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्मन एक्स ने इस अकाउंट को भारत में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से ही भारतीय यूजर्स इस अकाउंट और इसकी पोस्ट्स को नहीं देख पा रहे हैं, जिसने देश में डिजिटल अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

 ‘मज़ाक’ से कैसे शुरू हुआ यह बड़ा आंदोलन?

इस पूरे विवाद की जड़ें देश के युवाओं में पनप रहे आर्थिक असंतोष और गुस्से से जुड़ी हैं। पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी नौकरियों की कमी और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों को लेकर युवा लगातार अपनी आवाज उठा रहे थे। इसी दौरान इंटरनेट की दुनिया में “कॉकरोच” शब्द अचानक एक मीम के रूप में वायरल हो गया। युवाओं ने इस शब्द को एक आम आदमी की उस स्थिति के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया, जो तमाम मुश्किलों, भ्रष्टाचार और खराब व्यवस्था के बावजूद किसी तरह ‘सर्वाइव’ (जीवित) कर जाता है।देखते ही देखते कुछ रचनात्मक युवाओं ने इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया और इंस्टाग्राम व X पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से पैरोडी अकाउंट्स बना दिए। इन पेजों पर तीखे मीम्स, हास्यप्रद पैरोडी वीडियो और सीधे तौर पर व्यवस्था पर चोट करने वाले पोस्ट शेयर किए जाने लगे। इस अभियान का अंदाज इतना अनूठा और चुटीला था कि महज कुछ ही दिनों में लाखों युवा इससे जुड़ गए। बेरोजगारी और महंगाई पर बने इसके वीडियोज को युवाओं ने अपनी दबी हुई आवाज का जरिया मान लिया और यह अभियान एक डिजिटल मूवमेंट में तब्दील हो गया।

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सुरक्षा बनाम स्वतंत्रता की बहस हुई तेज

समाचारों के मुताबिक केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम  के तहत एक्स को एक निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में कहा गया था कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अकाउंट की कुछ गतिविधियां और पोस्ट्स समाज में सामाजिक तनाव बढ़ा सकती हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।जब कोई सोशल मीडिया कंपनी किसी देश की सरकार के कानूनी आदेश के बाद किसी अकाउंट को ‘विथहेल्ड’ करती है, तो वह अकाउंट उस विशिष्ट देश की भौगोलिक सीमा के भीतर ब्लॉक कर दिया जाता है। यानी, भारत में रहने वाले लोग इसे नहीं देख पाएंगे, लेकिन विदेशों में बैठे यूजर्स के लिए यह सामग्री सामान्य रूप से उपलब्ध रहेगी। हालांकि इस पूरे मामले पर सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों ने इस पेज के कुछ हालिया पोस्ट्स पर आपत्ति जताई थी। वहीं दूसरी ओर इस डिजिटल मूवमेंट का चेहरा बने अभिजीत दिपके ने सरकारी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इंटरनेट पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि उनके डिजिटल वजूद को मिटाने की कोशिश हो रही है और इंस्टाग्राम अकाउंट तक को हैक करने का प्रयास किया गया। दिपके ने साफ कहा, “हम कोई देशविरोधी गतिविधि नहीं कर रहे थे। हमारा काम व्यंग्य के जरिए सिस्टम की कमियों को उजागर करना था। एक लोकतांत्रिक समाज में अगर युवा अपनी बेरोजगारी और दिक्कतों पर तंज भी नहीं कस सकते, तो फिर अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ किताबों में ही बची है।”

सोशल मीडिया पर बहस : राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम रचनात्मक स्वतंत्रता

इस डिजिटल पाबंदी ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है। प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं और नागरिक अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की तीखी मजम्मत की है। विपक्ष का साफ कहना है कि एक परिपक्व और जीवंत लोकतंत्र की पहचान ही यही है कि वहां व्यंग्य, मज़ाक और तीखी से तीखी आलोचना को खुलकर बर्दाश्त किया जाए। उनका आरोप है कि सरकार युवाओं के मीम्स और कार्टूनों से डर रही है, जो कि बेहद चिंताजनक संकेत है।इसके उलट, सरकार के समर्थकों और कुछ वरिष्ठ साइबर विशेषज्ञों का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका तर्क है कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर नैरेटिव बहुत खतरनाक गति से बदलता है। एक छोटा सा भ्रामक वीडियो या संवेदनशील मीम भी बहुत कम समय में कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है, इसलिए आंतरिक सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए सरकार का समय रहते एहतियाती कदम उठाना पूरी तरह न्यायसंगत है।

डिजिटल एज की सबसे बड़ी चुनौती

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इस कड़वे सच को सतह पर ला दिया है कि सोशल मीडिया अब महज टाइमपास या मनोरंजन का साधन नहीं रहा। यह जनभावनाओं को भुनाने और राजनीतिक विचारों को आकार देने का आधुनिक कुरुक्षेत्र बन चुका है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में नीति-निर्माताओं और सोशल मीडिया कंपनियों के सामने सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा यही होगी कि वे किसी नागरिक की रचनात्मक स्वतंत्रता और जायज आलोचना के अधिकार का गला घोंटे बिना, देश की सुरक्षा और संप्रभुता के बीच एक संतुलित और निष्पक्ष लकीर कैसे खींचते हैं। फिलहाल, भले ही यह हैंडल भारत में ब्लॉक हो गया हो, लेकिन इसने इंटरनेट की दुनिया में एक नए वैचारिक आंदोलन की नींव रख दी है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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