लंदन में आयोजित होने वाले यूनिटी कप फुटबॉल टूर्नामेंट के शुरू होने से ठीक पहले भारतीय फुटबॉल जगत में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश के सबसे पुराने और बड़े क्लबों में शुमार मोहन बागान सुपर जाइंट ने राष्ट्रीय टीम के कैंप से अपने प्रमुख खिलाड़ियों को अचानक वापस बुला लिया है। क्लब के इस फैसले पर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने कड़ी नाराजगी जताई है। महासंघ का कहना है कि क्लब के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम की तैयारियों को बड़ा झटका लगा है और इससे टीम का संतुलन बिगड़ गया है। खेल प्रेमियों और फुटबॉल विशेषज्ञों के बीच भी इस फैसले की काफी आलोचना हो रही
केवल 18 खिलाड़ियों के साथ रवाना हुई टीम
भारतीय फुटबॉल टीम अपने नए मुख्य कोच खालिद जमील के नेतृत्व में इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए लंदन पहुंच चुकी है। भारत को प्रतियोगिता में अपना पहला मैच सत्ताईस मई को जमैका के खिलाफ खेलना है। इस त्रिकोणीय सीरीज में जमैका के अलावा नाइजीरिया और जिम्बाब्वे जैसी मजबूत टीमें भी भाग ले रही हैं। विवाद का असर यह हुआ कि भारतीय टीम इस दौरे पर केवल अठारह खिलाड़ियों के साथ रवाना हो सकी है। महासंघ का कहना है कि कुछ खिलाड़ी बाद में टीम के साथ जुड़ेंगे, लेकिन प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण कोच के लिए अपनी नई रणनीति को आजमाना बेहद मुश्किल हो गया है।शुरुआत में राष्ट्रीय टीम के संभावित खिलाड़ियों की सूची में मोहन बागान के आठ प्रमुख खिलाड़ियों को जगह दी गई थी। इन खिलाड़ियों में मनवीर सिंह, लिस्टन कोलासो, सहल अब्दुल समद, अनिरुद्ध थापा और स्टार गोलकीपर विशाल कैथ जैसे बड़े नाम शामिल थे। इन सभी खिलाड़ियों को भारतीय टीम की रीढ़ माना जा रहा था और इनके दम पर टीम मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर रही थी। लेकिन ऐन वक्त पर क्लब द्वारा इन्हें वापस बुलाए जाने से भारतीय टीम कमजोर नजर आ रही है।
read also :
- इंडियन सुपर लीग 2025-26 खिताब की जंग रोमांचक मोड़ पर
- इंडियन सुपर लीग 2025-26 मोहन बागान और ईस्ट बंगाल का मुकाबला
एआईएफएफ ने कहा- क्लब ने आखिरी समय में बदला रुख
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। महासंघ का कहना है कि क्लब को इस पूरे टूर्नामेंट और राष्ट्रीय कैंप के शेड्यूल की जानकारी बहुत पहले ही दे दी गई थी। खिलाड़ियों के वीजा आवेदन से लेकर उनके हवाई टिकट और ठहरने की तमाम व्यवस्थाएं पूरी की जा चुकी थीं। ऐसे में जब पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया खत्म हो चुकी थी, तब आखिरी समय पर खिलाड़ियों को रोकना कहीं से भी उचित नहीं है। महासंघ के अधिकारियों का मानना है कि घरेलू क्लबों को राष्ट्रीय टीम के कार्यक्रमों और देश के गौरव को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब प्रदर्शन का असर पूरे देश के फुटबॉल पर पड़ता है।
मोहन बागान ने फीफा नियमों का दिया हवाला
दूसरी तरफ, मोहन बागान क्लब भी अपने फैसले पर अड़ा हुआ है और उसने महासंघ के आरोपों को खारिज किया है। क्लब प्रबंधन ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ यानी फीफा के नियमों का हवाला दिया है। क्लब का तर्क है कि यूनिटी कप का आयोजन आधिकारिक फीफा इंटरनेशनल विंडो के दौरान नहीं हो रहा है, इसलिए नियमों के मुताबिक क्लब के लिए अपने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम के लिए रिलीज करना अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही क्लब ने खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर फीफा विंडो से बाहर खिलाड़ी देश के लिए खेलते हुए चोटिल हो जाते हैं, तो उसका पूरा नुकसान क्लब को उठाना पड़ता है क्योंकि क्लब उन्हें भारी-भरकम फीस देता है।
क्लब और महासंघ के बीच पुराना है यह विवाद
भारतीय फुटबॉल में क्लब और राष्ट्रीय महासंघ के बीच इस तरह का टकराव कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार इंडियन सुपर लीग के क्लबों और फुटबॉल महासंघ के बीच खिलाड़ियों को रिलीज करने और राष्ट्रीय कैंप की तारीखों को लेकर विवाद हो चुके हैं। फुटबॉल समीक्षकों का कहना है कि देश में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि महासंघ और क्लबों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के कैलेंडर को लेकर बेहतर तालमेल होना चाहिए। जब तक दोनों पक्ष मिलकर एक स्पष्ट नीति नहीं बनाएंगे, तब तक इस तरह के विवाद सामने आते रहेंगे और इसका खामियाजा अंततः भारतीय फुटबॉल और देश के खिलाड़ियों को ही भुगतना पड़ेगा।
अग्निपरीक्षा के दौर में मुख्य कोच खालिद जमील
यह विदेशी दौरा भारतीय टीम के नए बॉस खालिद जमील के लिए एक बहुत बड़े इम्तिहान और अग्निपरीक्षा जैसा साबित होने वाला है। बतौर मुख्य कोच भारतीय सीनियर टीम के साथ यह उनका पहला सबसे बड़ा विदेशी असाइनमेंट है, और मैदान पर उतरने से ठीक पहले ही उनके हाथ-पैर बांध दिए गए हैं। मुख्य खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में उन्हें अब उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ ही रणनीति तैयार करनी होगी। अब खेल जगत की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बिखरी हुई और कम अनुभवी टीम के सहारे खालिद जमील लंदन के मैदान पर क्या कोई नया चमत्कार दिखा पाते हैं या फिर भारतीय टीम इस प्रशासनिक गुटबाजी की भेंट चढ़ जाएगी।







